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समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट की अदृश्य दुनिया

दुनिया में इंटरनेट का इस्तेमाल हमें इतना सामान्य लगता है कि हम शायद ही कभी सोचते हैं कि एक देश से दूसरे देश तक हमारा डेटा आखिर पहुंचता कैसे है। ईमेल, वीडियो कॉल, ऑनलाइन बैंकिंग, सोशल मीडिया, क्लाउड सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों का विशाल हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलों पर निर्भर करता है। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के अनुसार, दुनिया के 99% से अधिक अंतरराष्ट्रीय डेटा आदान-प्रदान इन समुद्री केबलों के माध्यम से होता है।

इन केबलों को Submarine Communication Cables कहा जाता है। ये कोई साधारण तार नहीं होते, बल्कि इनके अंदर बेहद पतले फाइबर-ऑप्टिक स्ट्रैंड होते हैं, जिनमें प्रकाश के माध्यम से डिजिटल जानकारी भेजी जाती है। इनके ऊपर कई सुरक्षात्मक परतें होती हैं ताकि समुद्र का दबाव, घर्षण और समुद्री गतिविधियां उन्हें नुकसान न पहुंचाएं। दुनिया में 500 से अधिक सक्रिय और नियोजित submarine cable systems मौजूद हैं, जो महाद्वीपों और देशों को जोड़ते हैं।

लेकिन इतनी महत्वपूर्ण व्यवस्था होने के बावजूद समुद्र के नीचे की ये केबल पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर, जहाजों के एंकर, भूकंप, समुद्र के भीतर भूस्खलन, सुनामी, उम्र बढ़ने और उपकरणों की खराबी के कारण केबल टूट सकती है। ITU के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में 170 से अधिक submarine cable repairs रिपोर्ट किए गए—यानी औसतन लगभग चार खराबियां हर सप्ताह।

केबल टूटने का पता कैसे चलता है?

सबसे पहले समुद्र में जाकर कोई व्यक्ति केबल को आंखों से नहीं ढूंढता। केबल के दोनों सिरों पर मौजूद terminal stations लगातार सिस्टम की निगरानी करते हैं। यदि optical signal या electrical parameters में असामान्य बदलाव दिखाई देता है, तो तकनीकी विशेषज्ञ परीक्षण करके यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि केबल के किस हिस्से में समस्या आई है।

इसके लिए Optical Time-Domain Reflectometry (OTDR) जैसी तकनीकों और अन्य electrical measurements का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनसे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि terminal station से कितनी दूरी पर fault मौजूद है। इसके बाद repair team को समुद्र में उस स्थान तक भेजा जाता है।

फिर आती है Cable Repair Ship की बारी

जब fault की जगह का अनुमान मिल जाता है, तो एक विशेष cable repair ship को उस क्षेत्र में भेजा जाता है। ये सामान्य जहाज नहीं होते। इनमें cable tanks, विशेष cable-handling machinery, winches और underwater equipment मौजूद होते हैं। कई जहाजों में Dynamic Positioning System भी होता है, जिससे जहाज समुद्र में अपनी स्थिति को बहुत सटीक तरीके से बनाए रख सकता है।

समुद्र में पहुंचने के बाद तकनीकी टीम केबल की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए underwater equipment और आवश्यकता पड़ने पर ROV (Remotely Operated Vehicle) जैसे उपकरणों का इस्तेमाल कर सकती है। ROV समुद्र की गहराई में जाकर कैमरों और robotic arms की मदद से केबल को खोजने और उसके आसपास की स्थिति देखने में सहायता करता है।

टूटी हुई केबल को ऊपर कैसे लाया जाता है?

यह सबसे कठिन चरणों में से एक है। समुद्र की गहराई बहुत अधिक होने पर केबल को सीधे हाथ से नहीं उठाया जा सकता। Repair ship विशेष recovery equipment की मदद से केबल को धीरे-धीरे समुद्र की सतह की ओर खींचता है। कुछ परिस्थितियों में केबल को समुद्र तल पर ही काटकर उसके दोनों सिरों को अलग-अलग recover किया जाता है, ताकि केबल पर अत्यधिक mechanical tension न पड़े।

जहाज पर लाए गए दोनों सिरों को जांचा जाता है और खराब हिस्से को हटाकर नई spare cable लगाई जाती है। इसके बाद दोनों हिस्सों को एक विशेष प्रक्रिया से जोड़ा जाता है, जिसे आम तौर पर splicing कहा जाता है। Optical fibres को अत्यंत सटीक तरीके से जोड़ा जाता है ताकि प्रकाश के माध्यम से डेटा फिर से सही तरीके से गुजर सके।

क्या मरम्मत के बाद केबल फिर समुद्र में डाल दी जाती है?

हाँ। जोड़ और परीक्षण पूरा होने के बाद repaired cable को वापस समुद्र में उतारा जाता है। गहरे समुद्र में अतिरिक्त cable length की आवश्यकता हो सकती है ताकि समुद्र तल की स्थिति और repair के कारण बनने वाले तनाव को संभाला जा सके। उथले पानी में जहां मानव गतिविधि का खतरा अधिक होता है, केबल को कई क्षेत्रों में समुद्र तल के नीचे bury भी किया जाता है।

पूरी प्रक्रिया कुछ घंटों में खत्म नहीं होती। fault की जगह, समुद्र की गहराई, मौसम, जहाज की उपलब्धता और नुकसान के कारण के आधार पर repair में एक से तीन सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है। ITU के तकनीकी दिशानिर्देश बताते हैं कि repair time इन परिस्थितियों पर काफी निर्भर करता है।

अगर केबल टूट जाए तो क्या पूरे देश का इंटरनेट बंद हो सकता है?

संभव है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। आधुनिक नेटवर्क में एक ही देश या क्षेत्र के लिए कई submarine cables और अलग-अलग routes रखे जाते हैं। यदि एक cable टूट जाती है तो डेटा को दूसरी उपलब्ध cable या route पर भेजा जा सकता है। इसे route diversity और redundancy कहा जाता है।

लेकिन जिन देशों या द्वीपीय क्षेत्रों के पास सीमित संख्या में international cable connections हैं, उनके लिए एक या दो महत्वपूर्ण cables का टूटना गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। ITU ने विशेष रूप से छोटे द्वीपीय देशों और कम-served क्षेत्रों की vulnerability को महत्वपूर्ण चिंता बताया है।

एक छोटी सी केबल की समस्या, पूरी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी समस्या

Submarine cables केवल YouTube, WhatsApp या social media के लिए नहीं हैं। इनके जरिए बैंकिंग transactions, financial markets, cloud computing, सरकारी संचार, healthcare, education और international business भी चलते हैं। इसलिए बड़ी cable disruption होने पर इंटरनेट की गति, international connectivity और कई digital services प्रभावित हो सकती हैं।

इसी वजह से आज दुनिया submarine cables को केवल telecom infrastructure नहीं, बल्कि critical global infrastructure के रूप में देख रही है। 2026 में ITU के International Advisory Body on Submarine Cable Resilience ने cable protection, तेजी से repair, बेहतर monitoring और अलग-अलग routes विकसित करने पर जोर दिया है।

निष्कर्ष

जब हम अपने फोन पर कुछ सेकंड में दुनिया के दूसरे कोने की वेबसाइट खोलते हैं, तो उसके पीछे समुद्र की हजारों किलोमीटर गहराई में बिछा एक विशाल infrastructure काम कर रहा होता है। यह infrastructure दिखाई नहीं देता, लेकिन आधुनिक डिजिटल दुनिया की रीढ़ बन चुका है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि यदि समुद्र के नीचे एक महत्वपूर्ण cable टूट जाए, तो उसे ठीक करने के लिए इंजीनियरों को केवल “तार जोड़ना” नहीं होता। उन्हें fault locate करना, समुद्र में repair ship भेजना, cable को गहराई से recover करना, damaged section हटाना, नई cable splice करना, testing करना और फिर उसे सुरक्षित रूप से समुद्र तल पर वापस रखना पड़ता है।

यानी हमारी दुनिया का इंटरनेट जितना wireless दिखाई देता है, उसकी असली backbone उतनी ही physical और समुद्र के नीचे छिपी हुई है।