कोलकाता, 17 सितंबर 2025: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर पश्चिम बंगाल के लिए आवंटित आर्थिक फंड को रोक रही है। यह बयान ममता ने हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा में दिया, जहां उन्होंने केंद्र पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का इल्ज़ाम लगाया।
आरोपों का विवरण
ममता बनर्जी ने विधानसभा में कहा कि केंद्र सरकार बंगाल के लिए निर्धारित धनराशि को रोक रही है और इसे भाजपा शासित राज्यों को भेजा जा रहा है। उन्होंने इसे “बंगाल के लोगों के साथ अन्याय” करार दिया। ममता ने दावा किया कि पहले केंद्र से फंड समय पर मिलता था, लेकिन अब बंगाल को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने 16 जून 2025 को विधानसभा में कहा, “बंगाली भाषा बोलने वालों के साथ भेदभाव हो रहा है।” इसके अलावा, उन्होंने केंद्र पर “विदेशी ताकतों को भारत की प्रतिष्ठा बेचने” का भी आरोप लगाया।
पृष्ठभूमि और पहले के आरोप
यह कोई नया विवाद नहीं है। ममता ने पहले भी केंद्र सरकार पर बंगाल के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था। 2023 में मुर्शिदाबाद की एक रैली में और 2024 के केंद्रीय बजट के दौरान उन्होंने इसी तरह के आरोप दोहराए थे। हाल ही में, ममता ने प्रवासी बंगाली मजदूरों के मुद्दे को उठाया और कहा कि भाजपा शासित राज्यों में 22 लाख बंगाली मजदूरों को साजिश के तहत परेशान किया जा रहा है।
केंद्र और भाजपा का जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में एक रैली के दौरान ममता सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र से मिलने वाला फंड बंगाल की जनता तक नहीं पहुंचता, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पास चला जाता है। भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने भी ममता सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र ने बंगाल को पैकेज न देकर सही किया।
हालिया घटनाक्रम
- 4 सितंबर 2025: विधानसभा में “बंगाली गर्व” पर बहस के दौरान ममता ने भाजपा को “वोट चोर” और “मोदी चोर” कहा, जिसके बाद भारी हंगामा हुआ। इस दौरान भाजपा के 5 विधायकों को निलंबित कर दिया गया, और एक विधायक पर हमले का आरोप भी सामने आया।
- 10-14 सितंबर 2025: एक्स पर इस मुद्दे ने जोर पकड़ा, जहां ममता ने बंगाली अधिकारों की रक्षा का वादा किया।
राजनीतिक मायने
यह विवाद 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले गरमाता दिख रहा है। ममता बनर्जी बंगाली पहचान को एक बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि केंद्र का कहना है कि फंड आवंटन पूरी तरह पारदर्शी है। टीएमसी इसे राजनीतिक साजिश बता रही है, जिससे राज्य में सियासी माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।


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