अंकारा/वाशिंगटन: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तईप एर्दोगन ने अमेरिका से एक बार फिर बड़ी मांग की है, जो NATO की सामूहिक सुरक्षा और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन से जुड़ी हुई है। 5 जनवरी 2026 को ब्लूमबर्ग को दिए लिखित इंटरव्यू में एर्दोगन ने स्पष्ट कहा कि तुर्की को अमेरिका के F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट कार्यक्रम में दोबारा शामिल करना और पहले से भुगतान किए गए विमानों की डिलीवरी NATO की रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने इसे अमेरिका-तुर्की संबंधों को रीसेट करने का मौका बताया, खासकर जब डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बन चुके हैं।


एर्दोगन के इंटरव्यू के प्रमुख अंश
- एर्दोगन ने कहा: “तुर्की का F-35 कार्यक्रम में पुनर्निर्माण और उन विमानों की प्राप्ति, जिनके लिए हमने पहले ही भुगतान कर दिया है, अमेरिका-तुर्की संबंधों और NATO की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण और आवश्यक है।”
- उन्होंने 2019 में तुर्की को कार्यक्रम से बाहर करने के फैसले को “अन्यायपूर्ण और NATO की भावना के खिलाफ” करार दिया।
- ट्रंप के सत्ता में लौटने पर: “ट्रंप की वापसी से तुर्की-अमेरिका संबंधों को अधिक उचित और रचनात्मक आधार पर ले जाने का अवसर मिला है।”
- एर्दोगन ने खुलासा किया कि उन्होंने यह मुद्दा सितंबर 2025 में व्हाइट हाउस में ट्रंप से व्यक्तिगत रूप से उठाया था।
- F-16 ब्लॉक 70 की खरीद पर भी बात: कीमतें NATO की भावना के अनुरूप हों, यूरोफाइटर जेट्स की खरीद का उदाहरण दिया।


विवाद की जड़: S-400 और 2019 का बहिष्कार
- 2017-2019 में तुर्की ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा, जिसे अमेरिका ने F-35 की गोपनीय तकनीक के लिए खतरा माना (रूस को डेटा लीक का डर)।
- ट्रंप के पहले कार्यकाल में ही तुर्की को कार्यक्रम से हटाया गया और CAATSA प्रतिबंध लगाए गए।
- तुर्की ने कार्यक्रम में $1.4 बिलियन निवेश किया था, कुछ पार्ट्स बनाए, लेकिन विमान नहीं मिले – वे अब अमेरिका के पास हैं।
- हाल की रिपोर्ट्स: तुर्की S-400 को वापस करने या निष्क्रिय करने की कोशिश कर रहा है। एर्दोगन ने पुतिन से इस पर बात की (क्रेमलिन ने इनकार किया), और अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक ने कहा कि मुद्दा 4-6 महीनों में हल हो सकता है।


ट्रंप क्या करेंगे? संभावनाएं, चुनौतियां और विरोध
- ट्रंप और एर्दोगन के बीच पुराना व्यक्तिगत रिश्ता है। ट्रंप ने पहले एर्दोगन की तारीफ की और कुछ रिपोर्ट्स में F-35 पर विचार करने की बात कही।
- अमेरिकी पक्ष से सकारात्मक संकेत: दिसंबर 2025 में बातचीत चल रही है, S-400 हटाने पर सहमति की उम्मीद।
- चुनौतियां:
- इजरायल का कड़ा विरोध: इजरायली डिप्टी विदेश मंत्री शारन हास्केल ने 5 जनवरी 2026 को कहा कि F-35 में इजरायली तकनीक है, जिसे तुर्की को नहीं दिया जा सकता – यह इजरायल की क्षेत्रीय श्रेष्ठता को कमजोर करेगा।
- अमेरिकी कांग्रेस में कुछ सांसदों की आपत्ति (तुर्की की रूस नीति, ग्रीस से तनाव)।
- कानूनी बाधा: CAATSA के तहत S-400 रहते हुए F-35 नहीं मिल सकता।
- अगर ट्रंप सहमत होते हैं, तो S-400 को हटाना या अलग रखना मुख्य शर्त होगी। यह NATO की एकता मजबूत करेगा, खासकर ब्लैक सी और मध्य पूर्व में तुर्की की रणनीतिक भूमिका को देखते हुए।
NATO और क्षेत्रीय प्रभाव
- तुर्की NATO का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य बल है, यूक्रेन युद्ध में रूस को ब्लैक सी में रोकने और कीव को हथियार देने में सक्रिय।
- एर्दोगन ने कहा कि F-35 से NATO की दक्षिणी सीमा मजबूत होगी।
- तुर्की स्वदेशी KAAN फाइटर जेट भी विकसित कर रहा है, लेकिन F-35 तत्काल पांचवीं पीढ़ी की क्षमता देगा।
यह मांग अमेरिका-तुर्की संबंधों में बड़ा बदलाव ला सकती है। ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति में तुर्की को मजबूत करना फिट बैठता है, लेकिन इजरायल लॉबी, कांग्रेस और S-400 की बाधाएं अहम होंगी। दुनिया की नजरें ट्रंप के फैसले पर टिकी हैं – क्या 2026 में तुर्की F-35 क्लब में वापस आएगा? स्थिति पर अपडेट आते रहेंगे।

More Stories
बाल राम बाहुबली महाराज का खौफनाक ऐलान: 2031 में उत्तर प्रदेश से आएगा देश का नया PM – कौन होगा वो?
अंबरनाथ में बड़ा धोखा: सबसे बड़ी पार्टी शिंदे सेना बाहर, BJP-कांग्रेस की गुप्त डील ने सबको चौंकाया!
वैष्णो देवी कॉलेज की मान्यता रातोंरात रद्द… 42 मुस्लिम छात्रों का एडमिशन बना वजह? पूरी सच्चाई उजागर!