ढाका, 11 फरवरी 2026: बांग्लादेश में कल 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले आवामी लीग के सीनियर नेता और पूर्व विदेश मंत्री हसन महमूद ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अंतरिम सरकार (मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ये चुनाव पाकिस्तान के इशारे पर हो रहा है, निष्पक्ष नहीं है और आवामी लीग को बाहर रखकर इसे एक ‘फार्स’ या दिखावा बनाया गया है। हसन महमूद ने कहा कि पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियां 1971 की आजादी की जंग के बाद कभी नहीं देखी गईं, और ये सब जमात-ए-इस्लामी जैसी पाकिस्तान-समर्थक ताकतों को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।
हसन महमूद के मुख्य बयान (एक्सक्लूसिव इंटरव्यू से):
- “PAK के इशारे पर चुनाव”: अंतरिम सरकार पाकिस्तान के साथ मिलिट्री और डिप्लोमैटिक टाई-अप बढ़ा रही है। “1971 के बाद कभी पाकिस्तान के साथ इतनी नजदीकी नहीं हुई। चुनाव से पहले ये सब इसलिए हो रहा है ताकि जमात-ए-इस्लामी और उसके गठबंधन मजबूत हों, जो हमेशा पाकिस्तान समर्थक रहे हैं।”
- आवामी लीग पर बैन और बहिष्कार की अपील: “हमारी पार्टी को एंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत बैन किया गया है, जबकि हमने स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया और कई बार लोकतांत्रिक चुनाव जीते। ये चुनाव बिना आवामी लीग के ‘कोरोनेशन’ या तयशुदा है, न कि असली चुनाव। हम समर्थकों से अपील करते हैं कि वो वोटिंग का बहिष्कार करें – ‘No Boat, No Vote’।”
- शेख हसीना की वापसी और न्याय: “शेख हसीना भारत में निर्वासित हैं, लेकिन वो जल्द बांग्लादेश लौट सकती हैं। न्याय होगा, और आवामी लीग फिर से मजबूत बनेगी। अंतरिम सरकार बिना जनादेश के चल रही है और हम पर अन्याय हो रहा है।”
- अंतरिम सरकार पर आरोप: “यूनुस सरकार अवैध है। 2024 के छात्र आंदोलन में हुई हिंसा को माफ किया जा रहा है, लेकिन हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं की हत्याएं जारी हैं। पोस्टल बैलेट से वोट चोरी की आशंका है। ये चुनाव अविश्वसनीय और अनियमित है।”
- जमात-ए-इस्लामी का खतरा: “जमात को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो 1971 में पाकिस्तान के साथ थी। अगर वो सत्ता में आई तो महिलाओं के अधिकार, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और भारत के साथ रिश्ते खतरे में पड़ सकते हैं।”
चुनाव का बैकग्राउंड:
2024 के छात्र-नेतृत्व वाले ‘मॉनसून रेवोल्यूशन’ के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और वो भारत में निर्वासित हैं। आवामी लीग को मई 2025 में बैन कर दिया गया, और नवंबर 2025 में हसीना को अनुपस्थित में क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी के लिए मौत की सजा सुनाई गई।
मुख्य मुकाबला:
- BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) – तारिक रहमान के नेतृत्व में फ्रंट-रनर, कई सर्वे में आगे।
- जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला गठबंधन – जिसमें नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) भी शामिल, इस्लामी ताकतों का उदय।
आवामी लीग के बहिष्कार से वोटिंग पर असर पड़ सकता है। 12.7 करोड़ से ज्यादा वोटर हैं, 10 लाख से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात। हिंसा और मिसइनफॉर्मेशन की आशंका बनी हुई है।
एक्सपर्ट्स की राय:
- कई विश्लेषकों का कहना है कि आवामी लीग के बहिष्कार से करोड़ों वोटर प्रभावित होंगे, लेकिन ज्यादातर पूर्व आवामी वोटर अब BNP की ओर जा सकते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनाव को ‘इनक्लूसिव’ न होने की आलोचना हो रही है, क्योंकि प्रमुख पार्टी बाहर है।
ये चुनाव बांग्लादेश की लोकतंत्र की परीक्षा है। क्या ये नया दौर लाएगा या अस्थिरता बढ़ाएगा? नतीजे 12 फरवरी के बाद साफ होंगे।


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