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Opinion: What is behind the political strength of the NDA, while economic challenges persist?

ओपिनियन: NDA की सियासी मजबूती के पीछे क्या है, जबकि आर्थिक चुनौतियाँ बरकरार हैं?

भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में संकट में नहीं है, बल्कि यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनी हुई है। हालाँकि, बेरोजगारी, मुद्रास्फीति और अमेरिकी टैरिफ जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं, फिर भी NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सियासी रूप से मजबूत स्थिति में है। यह विरोधाभास क्यों है? आइए, तथ्यों और विश्लेषण के आधार पर समझते हैं। मेरा मत है कि NDA की सफलता मजबूत नेतृत्व छवि, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं में विश्वास, चुनावी जीत और विपक्ष की कमजोरी पर टिकी है, जबकि आर्थिक दर्द को मतदाता ‘बड़े चित्र’ के सामने नजरअंदाज कर रहे हैं।

1. आर्थिक स्थिति: संकट नहीं, लेकिन दर्द है

  • भारत की GDP वृद्धि 2025-26 में 7.4% रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से ज्यादा है। 2026 में यह 6.6-6.9% रह सकती है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत है। अर्थव्यवस्था में गति बनी हुई है, जो खुदरा, सेवाओं और विनिर्माण से आ रही है।
  • चुनौतियाँ: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ (2025 में 50% तक) ने निर्यात को प्रभावित किया, लेकिन भारत ने फरवरी 2026 में अंतरिम व्यापार समझौते से इसे 18% तक घटा लिया। निजी निवेश कमजोर है (2012 से 12% GDP पर स्थिर), बेरोजगारी और कृषि संकट बरकरार है। फिर भी, मुद्रास्फीति नियंत्रण में है, और RBI ने विकास दर को 7.4% तक बढ़ाया।
  • मतदाताओं का दर्द: एक सर्वे में 53% ने कहा कि NDA की नीतियाँ बड़े कारोबारियों को फायदा पहुँचा रही हैं, जबकि परिवारों की आर्थिक स्थिति तनावपूर्ण है। लेकिन यह ‘संकट’ नहीं, बल्कि ‘दर्द’ है – विकास है, लेकिन असमान।

2. सियासी फायदे के प्रमुख कारण

  • मोदी की मजबूत छवि और भू-राजनीतिक विश्वास: मतदाता आर्थिक दर्द के बावजूद NDA को 47% वोट देने को तैयार हैं, क्योंकि पड़ोस (चीन, पाकिस्तान) और दुनिया (अमेरिका-रूस तनाव) की अनिश्चितताओं में मोदी को ‘सबसे सुरक्षित विकल्प’ मानते हैं। विश्व स्तर पर भारत की ताकत को मान्यता मिल रही है, जैसे EU और US के साथ व्यापार समझौते। मोदी की तीसरी टर्म में NDA ने दिल्ली और बिहार जैसे चुनाव जीते, जो आत्मविश्वास बढ़ा रहा है।
  • चुनावी सफलताएँ और गठबंधन की स्थिरता: NDA के पास लोकसभा में 293 सीटें हैं, और यह 18 राज्यों में सत्ता में है। 2024 चुनाव में बहुमत कम होने के बावजूद, TDP और JD(U) जैसे सहयोगी मजबूत हैं। दक्षिण (तमिलनाडु, केरल) और पूर्व में विस्तार हो रहा है।
  • विपक्ष की कमजोरी: INDIA गठबंधन को सिर्फ 39% वोट मिलने का अनुमान है। विपक्षी संवाद टूटा हुआ है, और NDA की सुधार (GST, श्रम कोड) से फायदा उठा रही है।
  • आर्थिक कथा का प्रबंधन: सरकार ‘विकसित भारत 2047’ का नारा दे रही है, और बजट 2026 को ‘ऐतिहासिक’ बता रही है। विकास को संरचनात्मक बताया जा रहा है, जो मतदाताओं को आकर्षित करता है। आर्थिक दर्द के बावजूद, मोदी और NDA का प्रदर्शन उच्च अंकों पर है।

3. क्या यह टिकाऊ है?

  • अगर टैरिफ का असर बढ़ा या निजी निवेश नहीं उछला, तो सियासी जोखिम बढ़ सकता है। 2026 में चार राज्यों के चुनाव NDA की परीक्षा लेंगे। युवा असंतोष (बेरोजगारी) और सामाजिक विभाजन बढ़ सकते हैं।
  • लेकिन फिलहाल, NDA की मजबूती ‘राजनीतिक लाभ आर्थिक दर्द के बावजूद’ वाली स्थिति है। यह मोदी की ब्रांडिंग और वैश्विक स्थिति पर निर्भर है।

यह एक सत्य-खोजी, गैर-पक्षपाती दृष्टिकोण है। आर्थिक विकास मजबूत है, लेकिन वितरण की समस्या है – NDA इसी अंतर को सियासी कुशलता से संभाल रही है। अगर ज्यादा डेटा या विशिष्ट पहलू चाहिए, तो बताएँ!

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