नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 7 फरवरी 2026 — पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को जुमे की नमाज के दौरान एक शिया इमामबाड़ा (खदीजतुल कुबरा इमामबाड़ा, तरलाई इलाका) में हुए आत्मघाती धमाके ने पूरे देश को हिला दिया। इस हमले में कम से कम 31 लोग मारे गए और 160 से अधिक घायल हुए। कुछ रिपोर्ट्स में मौतों की संख्या 69 तक बताई गई, लेकिन आधिकारिक पुष्टि 31 की है।
यह धमाका ठीक उसी समय हुआ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने PoK (मुजफ्फराबाद) में कश्मीर को लेकर विवादित बयान दिया था कि “कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा”। भारतीय मीडिया में इसे “कश्मीर के नाम पर भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले पाकिस्तान को खुद की ही आतंक की आग में झुलसने” के रूप में पेश किया गया है।
मुख्य घटना विवरण
- समय और स्थान: 6 फरवरी 2026, जुमे की नमाज के दौरान, तरलाई क्षेत्र में शिया इमामबाड़ा (मस्जिद/इमामबाड़ा)।
- हमले का तरीका: एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। धमाका इतना भीषण था कि इमारत के बड़े हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए।
- मौतें और घायल: पाकिस्तानी मीडिया (Dawn, Geo News) के अनुसार, 31 मृतक और 169 घायल। कई घायलों की हालत गंभीर बताई गई।
- जिम्मेदारी: इस्लामिक स्टेट पाकिस्तान प्रोविंस (ISPP) ने हमले की जिम्मेदारी ली है। ISPP, ISIS का पाकिस्तानी प्रांत है, जो पाकिस्तान में शिया समुदाय को निशाना बनाता रहा है।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और आरोप
- पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तुरंत भारत और अफगानिस्तान पर आरोप लगाया। उन्होंने X पर पोस्ट किया कि हमलावर अफगानिस्तान से आया था और भारत-अफगान तालिबान के बीच “उभरता गठजोड़” इसका कारण है। उन्होंने कहा कि “नई दिल्ली में अब प्रत्यक्ष संघर्ष का साहस नहीं बचा, इसलिए परोक्ष हमले”।
- पाकिस्तानी सेना और सरकार ने जांच शुरू की, लेकिन कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।
- प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हमले की निंदा की और “आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता” की बात कही।
भारत की प्रतिक्रिया
- भारत ने हमले की कड़ी निंदा की और मृतकों के प्रति शोक व्यक्त किया।
- विदेश मंत्रालय ने कहा: “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान अपनी घरेलू समस्याओं का समाधान करने के बजाय दूसरों पर बेबुनियाद आरोप लगाकर खुद को धोखा दे रहा है।”
- भारत ने स्पष्ट किया कि कोई भी आरोप “तथ्यहीन” है और पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाने वाली अपनी नीतियों पर आत्ममंथन करना चाहिए।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
- पाकिस्तान लंबे समय से भारत पर कश्मीर में आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाता रहा है, जबकि भारत पाकिस्तान को आतंक की फैक्ट्री कहता है (जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा आदि)।
- हाल ही में पाकिस्तान में बलूचिस्तान (BLA हमले) और अन्य क्षेत्रों में अंदरूनी अशांति बढ़ी है। ISPP जैसे संगठन शिया-सुन्नी तनाव और अफगान सीमा से आतंकवाद का फायदा उठाते हैं।
- भारतीय मीडिया (आज तक, हिंदुस्तान टाइम्स आदि) ने इसे “जैसा करोगे वैसा भरना पड़ेगा” के रूप में पेश किया, क्योंकि पाकिस्तान कश्मीर के नाम पर भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है, लेकिन अब खुद ISPP जैसे संगठनों से प्रभावित है।
प्रभाव और विश्लेषण
- पाकिस्तान के लिए: यह हमला सेना (आसिम मुनीर) और सरकार की सुरक्षा विफलता को उजागर करता है। शिया समुदाय में आक्रोश बढ़ सकता है।
- भारत-पाक संबंध: आरोप-प्रत्यारोप से तनाव बढ़ा, लेकिन कोई तत्काल सैन्य एस्केलेशन नहीं दिख रहा।
- क्षेत्रीय संदर्भ: ISPP का उभार अफगानिस्तान से ISIS-K के प्रभाव को दर्शाता है। पाकिस्तान की “आतंकवाद विरोधी” छवि पर सवाल।
यह घटना पाकिस्तान की आंतरिक कमजोरियों और भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा के बीच विरोधाभास को रेखांकित करती है। जांच जारी है, लेकिन ISPP की जिम्मेदारी ने पाकिस्तान को अपने ही “बॉयलर” में फंसा दिया है।


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