नई दिल्ली/वॉशिंगटन, 17 दिसंबर 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला पर अपना सैन्य और आर्थिक दबाव चरम पर पहुंचा दिया है। मंगलवार को ट्रंप ने सैंक्शन वाले सभी वेनेज़ुएला तेल टैंकरों का पूर्ण ब्लॉकेड घोषित किया – यानी कोई टैंकर वेनेज़ुएला से निकल या वहां पहुंच नहीं सकेगा। यह घोषणा कैरेबियन सागर में अमेरिकी नौसेना की भारी तैनाती, दर्जनों “ड्रग बोट्स” पर घातक हमलों और एक बड़े तेल टैंकर की जब्ती के बाद आई है। ट्रंप प्रशासन इसे “नारको-टेररिज्म” के खिलाफ कार्रवाई बताता है, लेकिन विशेषज्ञ और वेनेज़ुएला का कहना है कि असल मकसद निकोलस मदुरो की सत्ता उखाड़ना और देश के विशाल तेल भंडारों पर कब्जा है। इस बीच, मदुरो के पारंपरिक सहयोगी रूस और चीन की चुप्पी ने सबको हैरान किया है – सिर्फ मौखिक निंदा, कोई ठोस मदद नहीं। आइए 2025 की इस संकट की पूरी ताजा स्टोरी समझते हैं।
ट्रंप की कार्रवाइयों की पृष्ठभूमि और डिटेल्स
- सैन्य तैनाती: सितंबर 2025 से अमेरिका ने कैरेबियन और ईस्टर्न पैसिफिक में बड़ी सैन्य मौजूदगी बनाई – दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford, दर्जनों युद्धपोत, F-35 फाइटर जेट्स, सबमरीन, स्पाई प्लेन और करीब 15,000 सैनिक। यह दशकों में लैटिन अमेरिका में सबसे बड़ी अमेरिकी तैनाती है।
- बोट्स पर हमले: सितंबर से अब तक 25+ हमलों में 95+ लोग मारे गए। अमेरिका इन्हें “ड्रग तस्कर” बताता है, लेकिन जांच में कई मछुआरे निकले। एक हमले में बचाव करने वालों पर दूसरा हमला (डबल-टैप) हुआ, जिसे संभावित युद्ध अपराध कहा जा रहा है।
- तेल टैंकर जब्ती: 10 दिसंबर को Skipper नाम के टैंकर (1.1 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल) को जब्त किया। अमेरिकी फोर्सेस हेलिकॉप्टर से उतरकर जहाज पर चढ़े। ट्रंप ने इसे “नारको-टेररिज्म” से जोड़ा, लेकिन कीमत $60-100 मिलियन की बताई जा रही है।
- ब्लॉकेड घोषणा: 16 दिसंबर को ट्रंप ने कहा – “वेनेज़ुएला पूरी तरह घिरा है… आर्मडा और बड़ा होगा” जब तक वे “चुराया हुआ तेल, जमीन और एसेट्स” अमेरिका को न लौटाएं। यह वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था (तेल पर निर्भर) को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकता है।
- ट्रंप-मदुरो फोन कॉल: नवंबर में ट्रंप ने मदुरो को अल्टीमेटम दिया – तुरंत सत्ता छोड़ो, परिवार के साथ सुरक्षित निकासी मिलेगी। मदुरो ने ग्लोबल एमनेस्टी और सेना पर नियंत्रण मांगा, जो ठुकरा दिया गया। ट्रंप ने कहा, “मदुरो के दिन गिने-चुने हैं”।
ट्रंप का दावा: मदुरो “नारको-टेररिस्ट” है, ड्रग्स और माइग्रेशन भेजता है। लेकिन DEA रिपोर्ट 2025 में वेनेज़ुएला को फेंटानिल का सोर्स नहीं बताया। विशेषज्ञ: मुख्य मकसद रिजीम चेंज और तेल (दुनिया का सबसे बड़ा रिजर्व)।
रूस और चीन की खामोशी: मुख्य कारण
वेनेज़ुएला रूस (सैन्य सहयोग) और चीन (62 अरब डॉलर कर्ज, मुख्य तेल खरीदार) का बड़ा सहयोगी है। पुतिन ने मदुरो को फोन पर समर्थन दिया, लेकिन कोई सैन्य मदद नहीं। चीन ने UN में निंदा की, लेकिन सिर्फ बयानबाजी। कारण:
- अपनी समस्याओं में फंसे:
- रूस: यूक्रेन युद्ध में उलझा, सैंक्शंस झेल रहा। वेनेज़ुएला के लिए जोखिम नहीं लेगा।
- चीन: ट्रंप से ट्रेड वॉर, टैरिफ्स कम करने की डील बिगाड़ना नहीं चाहता।
- मदुरो की कमजोर स्थिति:
- 2024 चुनावों में धांधली आरोप, घरेलू समर्थन कम। दोनों देश जानते हैं कि मदुरो गिरे तो नई सरकार से डील कर लेंगे।
- वेनेज़ुएला का सामरिक महत्व घटा – अर्थव्यवस्था बर्बाद, तेल उत्पादन गिरा।
- जोखिम से बचाव:
- ज्यादा सैंक्शंस/टैरिफ्स का डर। अमेरिकी कार्रवाई उनके कोर हितों को नहीं छू रही।
- विशेषज्ञ (प्रो. फर्नांडो रेयेस मट्टा): “रूस-चीन को मदुरो की पूरी रक्षा का कोई कारण नहीं।”
दोनों पक्षों के तर्क और प्रभाव
- ट्रंप का पक्ष: ड्रग्स रोकना, अमेरिकी सुरक्षा। लेकिन घरेलू विरोध – 70% अमेरिकी युद्ध के खिलाफ। कांग्रेस में वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन नाकाम।
- मदुरो का पक्ष: अमेरिकी “पाइरेसी” और रिजीम चेंज। सेना अलर्ट, मिलिशिया जुटाई।
- प्रभाव: तेल कीमतें बढ़ीं। अगर युद्ध हुआ तो लाखों रिफ्यूजी, क्षेत्रीय अस्थिरता। लैटिन अमेरिका में चीन की पकड़ कमजोर।
पूरी सच्चाई
ट्रंप की कार्रवाइयां “ड्रग वॉर” से ज्यादा रिजीम चेंज और तेल पर फोकस लगती हैं। रूस-चीन की खामोशी से मदुरो अकेला पड़ गया। ब्लॉकेड से वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है, लेकिन पूर्ण आक्रमण का जोखिम कम (लॉजिस्टिक्स और पब्लिक सपोर्ट की कमी)। यह संकट ट्रंप की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति का हिस्सा है, लेकिन क्षेत्रीय शांति को खतरा।


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