जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले (कटरा के पास) स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) में एमबीबीएस कोर्स चलाने की अनुमति राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने तत्काल प्रभाव से वापस ले ली है। यह फैसला 6 जनवरी 2026 को आया, जब NMC के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने 2 जनवरी 2026 को किए गए सरप्राइज निरीक्षण में गंभीर कमियां पाईं।
यह कॉलेज श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित है, जो मुख्य रूप से हिंदू श्रद्धालुओं के चढ़ावे से चलता है। इसी वजह से 2025-26 सत्र के पहले बैच में 50 में से 42 मुस्लिम छात्रों (ज्यादातर कश्मीर से) के एडमिशन को लेकर पिछले दो महीनों से तीव्र विवाद चल रहा था।
विवाद की पूरी कहानी
- कॉलेज की शुरुआत: दिसंबर 2024 में NMC के पब्लिक नोटिस पर आवेदन कर 8 सितंबर 2025 को 50 एमबीबीएस सीटों की अनुमति मिली।
- एडमिशन लिस्ट: NEET मेरिट के आधार पर JKBOPEE ने काउंसलिंग की। 50 सीटों में से:
- 42 मुस्लिम छात्र (ज्यादातर कश्मीर वैली से)
- 7 हिंदू छात्र
- 1 सिख छात्र
- विरोध शुरू: नवंबर-दिसंबर 2025 में जम्मू क्षेत्र में हिंदू संगठनों, भाजपा, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, शिवसेना आदि ने प्रदर्शन किए।
- मांग: कॉलेज श्राइन बोर्ड के चढ़ावे से बना है, इसलिए हिंदू छात्रों को प्राथमिकता/आरक्षण मिलना चाहिए।
- श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति (60 संगठनों का गठबंधन) ने एडमिशन लिस्ट रद्द करने की मांग की।
- कुछ प्रदर्शनकारियों ने कॉलेज बंद करने तक की बात की।
- राजनीतिक बयान:
- जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला: “सीटें धर्म के आधार पर नहीं बांटी जा सकतीं, मेरिट ही योग्यता है। इतनी राजनीति हो रही है तो कॉलेज बंद कर दो और बच्चों को दूसरे अच्छे कॉलेजों में एडजस्ट करो।”
- भाजपा नेता आरएस पठानिया: “गुणवत्ता पर मात्रा को प्राथमिकता दी गई। फैसला स्वागतयोग्य है।”
- NMC का आधिकारिक कारण:
- 39% फैकल्टी की कमी
- ट्यूटर/डेमॉन्स्ट्रेटर/सीनियर रेजिडेंट में 65% कमी
- अपर्याप्त क्लिनिकल मटेरियल (मरीजों की संख्या बहुत कम)
- बुनियादी ढांचे की कमी
- इनपेशेंट/आउटपेशेंट लोड और बेड ऑक्यूपेंसी बहुत कम
NMC ने स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल तकनीकी कमियों पर आधारित है, न कि एडमिशन विवाद पर।
छात्रों का क्या होगा?
NMC ने राहत देते हुए कहा है कि 2025-26 सत्र में एडमिशन ले चुके सभी 50 छात्रों की सीट सुरक्षित रहेगी। उन्हें जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमेरी (अतिरिक्त) सीटों पर समायोजित किया जाएगा। यह जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग और काउंसलिंग अथॉरिटी की है।
कॉलेज की प्रतिक्रिया
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि निरीक्षण सर्दियों की छुट्टियों में हुआ, जब 50% फैकल्टी छुट्टी पर थी। उन्हें सिर्फ 15 मिनट पहले सूचना मिली थी। वे इसे अनुचित मानते हैं।
सारांश में मुख्य बिंदु
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| कॉलेज का नाम | श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) |
| स्थान | रियासी जिला, कटरा (जम्मू-कश्मीर) |
| सीटें | 50 एमबीबीएस (2025-26 सत्र) |
| विवादित एडमिशन | 42 मुस्लिम, 7 हिंदू, 1 सिख |
| NMC का फैसला | 6 जनवरी 2026 को LoP वापस, तत्काल प्रभाव से |
| मुख्य कारण | न्यूनतम मानकों का गंभीर उल्लंघन |
| छात्रों का भविष्य | अन्य J&K मेडिकल कॉलेजों में एडजस्टमेंट |
| राजनीतिक प्रतिक्रिया | भाजपा ने स्वागत किया, NC ने जम्मू के लिए झटका बताया |
यह मामला चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता, मेरिट-आधारित एडमिशन और धार्मिक भावनाओं के बीच टकराव को उजागर करता है। NMC ने दोहराया है कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।


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