ट्रंप को जिस ‘एक कॉल’ की उम्मीद थी, वह PM मोदी ने क्यों नहीं किया? — यह सवाल हाल ही में वायरल हुआ है, खासकर अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के एक बयान के बाद। जनवरी 2026 में लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता (ट्रेड डील) इसलिए फाइनल नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वह “आखिरी फोन कॉल” नहीं किया, जिसकी ट्रंप को उम्मीद थी।
लुटनिक का दावा क्या था?
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने ऑल-इन पॉडकास्ट में कहा:
- उन्होंने खुद डील की पूरी तैयारी की थी।
- सब कुछ तैयार था, बस आखिरी कदम के लिए पीएम मोदी को ट्रंप को फोन करके डील को फाइनल करना था।
- ट्रंप खुद ऐसे डील को “क्लोज” करते हैं (वे “द क्लोजर” हैं)।
- भारतीय पक्ष इस कॉल को लेकर “असहज” (uncomfortable) महसूस कर रहा था, इसलिए मोदी ने फोन नहीं किया।
- इसके बाद अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के साथ ट्रेड डील कर लीं।
- लुटनिक का इशारा था कि भारत को पहले मौका मिला था, लेकिन यह चूक गई।
यह बयान ऐसे समय आया जब ट्रंप प्रशासन भारत पर 50% तक टैरिफ लगा चुका है और रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर और सख्ती की धमकी दे रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की ईगो से जुड़ा मामला था — वे चाहते थे कि मोदी खुद कॉल करके उन्हें “विजेता” दिखाएँ।
भारत का पलटवार और हकीकत
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने लुटनिक के दावे को “गलत” और “असटी” करार दिया। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया:
- पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने 2025 में कुल 8 बार फोन पर बातचीत की, जिसमें दोनों देशों की साझेदारी के कई पहलुओं पर चर्चा हुई।
- शीर्ष स्तर पर राजनीतिक संवाद की कोई कमी नहीं थी।
- ट्रेड डील पर बातचीत कई बार करीब आई, लेकिन अंततः दोनों पक्षों के बीच नीतिगत मतभेद, टैरिफ और अन्य मुद्दों के कारण अटकी रही।
कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि 2025 में ट्रंप ने मोदी को कई बार कॉल करने की कोशिश की, लेकिन मोदी ने कुछ मामलों में बात करने से परहेज किया। इसका कारण बताया गया कि ट्रंप अक्सर बातचीत को बढ़ा-चढ़ाकर सोशल मीडिया पर पेश करते हैं, जिससे भारत को असहजता होती है।
क्यों नहीं किया मोदी ने वह “एक कॉल”?
यह सवाल अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन मुख्य वजहें ये लगती हैं:
- रणनीतिक असहजता — भारत ने कभी भी ट्रंप को “बॉस” की तरह ट्रीट नहीं किया। मोदी ने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी, खासकर जब ट्रंप रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ की धमकी दे रहे थे।
- ट्रंप की स्टाइल से सावधानी — ट्रंप बातचीत को अक्सर अपने पक्ष में ट्विस्ट करते हैं। भारत नहीं चाहता था कि कोई कॉल बाद में गलत तरीके से पेश की जाए।
- ट्रेड डील के गहरे मुद्दे — असल समस्या टैरिफ, मार्केट एक्सेस, कृषि सब्सिडी और अन्य नीतिगत मतभेद थे। “एक कॉल” सिर्फ प्रतीकात्मक था, लेकिन असल बाधा यही नहीं थी।
- घरेलू राजनीति — मोदी ने ट्रंप के सामने झुकने से परहेज किया, जो भारत में “मजबूत नेता” की छवि के अनुकूल है।
सारांश
यह पूरा विवाद व्यापार, ईगो और कूटनीति का मिश्रण है। लुटनिक का बयान ट्रंप प्रशासन की तरफ से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश लगता है, जबकि भारत ने साफ कहा कि बातचीत जारी है और 2025 में ही 8 बार लीडर्स ने बात की। ट्रेड डील अभी अटकी हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत बनी हुई है।
अगर ट्रंप को वह “एक कॉल” मिल जाती, तो शायद डील हो जाती — लेकिन मोदी ने राष्ट्रीय हित और आत्मसम्मान को प्राथमिकता दी।


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