नई दिल्ली, 10 जनवरी 2026 — भारत और जर्मनी के बीच Project-75I (P-75I) के तहत 6 अत्याधुनिक कन्वेंशनल सबमरीनों की डील अब फाइनल स्टेज में पहुंच गई है। यह डील लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब ₹70,000 से 72,000 करोड़) की है और भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील बन सकती है।
जर्मन चांसलर फ्रीडरिक मर्ज़ की 12-13 जनवरी 2026 को भारत यात्रा के दौरान इस डील को फाइनल टच या औपचारिक ऐलान मिलने की मजबूत संभावना है। यह भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग का नया अध्याय होगा, जिसमें पूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) और मेक इन इंडिया पर जोर दिया गया है।
डील के मुख्य विवरण
- कंपनी पार्टनरशिप — जर्मनी की Thyssenkrupp Marine Systems (TKMS) और भारत की Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL), मुंबई के साथ मिलकर काम करेंगी।
- सबमरीन मॉडल — Type 214NG (Next Generation) या HDW Class 214 पर आधारित, Air-Independent Propulsion (AIP) सिस्टम से लैस। यह तकनीक सबमरीन को लंबे समय तक पानी के अंदर रहने की क्षमता देती है (बिना सतह पर आने के), जिससे यह बेहद स्टील्थ (छिपने में माहिर) बन जाती है।
- संख्या — कुल 6 सबमरीनें।
- निर्माण स्थान — ज्यादातर भारत में (MDL, मुंबई) बनेंगी। पहली सबमरीन में 45%+ इंडिजिनस कंटेंट, बाद वाली में 60% तक पहुंच सकता है।
- कीमत — अनुमानित $8 बिलियन (₹70,000 करोड़+), कुछ रिपोर्ट्स में ₹90,000 करोड़ तक की बात भी चल रही है (मुद्रास्फीति और अतिरिक्त फीचर्स के कारण)।
- टाइमलाइन —
- कॉन्ट्रैक्ट साइनिंग: मार्च 2026 तक (FY 2025-26 के अंत तक)।
- निर्माण शुरू: 2026 के अंत में।
- पहली सबमरीन डिलीवरी: 2032-2033 के आसपास (साइनिंग के 7 साल बाद)।
क्यों है यह डील ‘गेम-चेंजर’?
यह डील इंडियन नेवी की अंडरवॉटर क्षमता को नया आयाम देगी, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक ताकत के खिलाफ।
- AIP तकनीक से सबमरीनें दिनों तक पानी के नीचे रह सकती हैं, दुश्मन के सोनार/रडार से बच सकती हैं।
- एडवांस्ड टॉरपीडो, एंटी-शिप मिसाइल, और स्टील्थ फीचर्स से लैस।
- समुद्री युद्ध में ये “जलसमाधि” देने वाली घातक हथियार बन सकती हैं।
News18 हिंदी जैसी रिपोर्ट्स में इसे सनसनीखेज तरीके से पेश किया गया: “₹72000 करोड़ की महाडील, टूटेगा हर चक्रव्यूह, दुश्मनों की बनेगी जलसमाधि, ब्रह्मोस और अग्नि-5 को भूल जाएंगे।” यह अतिशयोक्ति है, लेकिन इसका मतलब है कि ये सबमरीनें समुद्री डोमिनेंस में इतनी मजबूत होंगी कि सतह-आधारित हथियारों (जैसे BrahMos) या लैंड-बेस्ड (Agni-5) से अलग स्तर का खतरा पैदा करेंगी। वास्तव में BrahMos और Agni-5 भारत की मिसाइल ताकत के मजबूत स्तंभ बने रहेंगे।
रणनीतिक महत्व
- चीन का मुकाबला — PLA Navy की 355+ युद्धपोतों/सबमरीनों के सामने भारत की मौजूदा 16 पारंपरिक सबमरीनें (जिनमें से कई पुरानी) कमजोर पड़ रही हैं।
- आत्मनिर्भर भारत — यह डील टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ भारत को भविष्य में खुद सबमरीन डिजाइन करने की क्षमता देगी।
- पिछले प्रोजेक्ट — Project-75 (Scorpene-class) पूरा हो चुका है। अब P-75I अगली पीढ़ी की जरूरत पूरी करेगा।
वर्तमान स्थिति (10 जनवरी 2026 तक)
- बातचीत अंतिम दौर में है।
- जर्मन चांसलर की यात्रा से पहले इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट पर फोकस।
- कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से अंतिम मंजूरी बाकी।
- अगर डील फाइनल हुई, तो यह इंडो-पैसिफिक में भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा और मेक इन इंडिया को नई ऊंचाई देगा।
यह डील अभी फाइनल नहीं हुई है, लेकिन अगले कुछ दिनों में बड़ा अपडेट आ सकता है। रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत का यह एक और प्रमाण है! 🚀🇮🇳


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