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The dark truth of Clean Indore: Poisonous water in the ward of the Best Councillor, video goes viral – who is responsible?

स्वच्छ इंदौर की काली सच्चाई: बेस्ट पार्षद के वार्ड में जहरिला पानी, वीडियो वायरल – कौन जिम्मेदार?

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। इस संकट के बीच एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें इलाके के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला को इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव सार्वजनिक मंच से ‘बेस्ट पार्षद‘ का अवॉर्ड और सर्टिफिकेट देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में महापौर पार्षद की जमकर तारीफ करते हैं और अन्य पार्षदों को उनके वार्ड में आकर विकास कार्य देखने की सलाह देते हैं। यह वीडियो करीब 7-8 महीने पुराना बताया जा रहा है, लेकिन अब मौतों के बाद यह विडंबना का प्रतीक बन गया है।

वायरल वीडियो में क्या है?

  • वीडियो में महापौर पुष्यमित्र भार्गव कहते हैं: “भागीरथपुरा के पार्षद कमल वाघेला कमल (कमल का फूल) भी हैं और बाघ भी। जब नरम होना होता है तो नरम, गरम होना होता है तो गरम।”
  • वे गिनाते हैं: वार्ड में 24 सड़कें बनाईं, पहले ड्रेनेज लाइन, फिर पानी की लाइन, करीब 2.40 करोड़ की सड़कें और कुल तीन साल में 10 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए।
  • अंत में पार्षद को ‘बेस्ट पार्षद‘ का सर्टिफिकेट सौंपा जाता है और अन्य पार्षदों से कहा जाता है: “भागीरथपुरा आकर देखें कि कैसे काम हुआ है।”

यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर आलोचना का केंद्र बन गया है। लोग पूछ रहे हैं कि जहां करोड़ों के विकास का दावा किया गया, वहां पानी कैसे जहर बन गया?

भागीरथपुरा में क्या हुआ?

  • दिसंबर 2025 के अंत से जनवरी 2026 तक नर्मदा पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का गंदा पानी मिल गया।
  • जांच रिपोर्ट में फीकल कॉलीफॉर्म, ई. कोलाई, क्लेबसिएला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले।
  • सरकारी आंकड़ों में 6-10 मौतें पुष्टि, लेकिन स्थानीय लोग और रिपोर्ट्स 15-17 मौतों का दावा कर रही हैं (छह महीने के बच्चे से 75 साल के बुजुर्ग तक)।
  • 1400-3000 से ज्यादा लोग बीमार, उल्टी-दस्त और डायरिया के शिकार।
  • लोगों का आरोप: 1-2 साल से बदबूदार पानी की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन पार्षद और प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।

प्रशासनिक लापरवाही के आरोप

  • पार्षद कमल वाघेला पर शिकायतें नजरअंदाज करने का इल्जाम।
  • टेंडर में देरी: पाइपलाइन बदलने का टेंडर अगस्त 2025 में निकला, लेकिन महीनों देरी हुई।
  • नवंबर 2024 में पार्षद ने खुद पत्र लिखकर शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
  • एक अन्य वीडियो में पार्षद को संकट के दौरान झूला झूलते देखा गया, जो भी वायरल हुआ।
  • हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई, मुख्य सचिव को तलब किया और स्वच्छ शहर की छवि खराब होने पर नाराजगी जताई।

राजनीतिक हलचल

  • विपक्ष (कांग्रेस) ने BJP पर हमला बोला, लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
  • BJP नेताओं ने अधिकारियों पर ठीकरा फोड़ा, कुछ निलंबित।
  • मुख्यमंत्री और मंत्री मौके पर पहुंचे, मुआवजा और जांच के आदेश दिए।
  • ‘वॉटरमैन ऑफ इंडिया’ राजेंद्र सिंह ने इसे “सिस्टम की बनाई आपदा” बताया, पैसे बचाने के चक्कर में ड्रेनेज के पास लाइन बिछाने को जिम्मेदार ठहराया।

यह घटना इंदौर की ‘सबसे स्वच्छ शहर’ की छवि पर बड़ा दाग लग गई है। फाइलों में विकास के दावे और जमीन पर जहर जैसा पानी – यह विडंबना सिस्टम की गहराई को उजागर कर रही है। जांच जारी है, और दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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