उत्तर प्रदेश में अगर आप अपनी संपत्ति पत्नी, बच्चों, पोते-पोतियों या अन्य करीबी रिश्तेदारों के नाम गिफ्ट डीड (दान पत्र) के जरिए ट्रांसफर करना चाहते हैं, तो आपके लिए बड़ी अच्छी खबर है। योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट ने 6 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिससे अब व्यावसायिक (कमर्शियल) और औद्योगिक संपत्तियों को भी परिवार के सदस्यों के नाम दान करने पर स्टांप ड्यूटी में भारी छूट मिलेगी।
क्या है नया फैसला?
- पहले यह छूट केवल कृषि और आवासीय संपत्तियों तक सीमित थी, जहां परिवार के सदस्यों को गिफ्ट डीड पर अधिकतम 5000 रुपये स्टांप शुल्क देना पड़ता था।
- अब कैबिनेट के फैसले से यह छूट व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों पर भी लागू हो गई है।
- चाहे संपत्ति शहर में हो या गांव में, व्यावसायिक गतिविधि (जैसे दुकान, फैक्ट्री आदि) वाली हो, अब सभी पर एक समान अधिकतम 5000 रुपये स्टांप शुल्क लगेगा।
- उदाहरण: अगर एक करोड़ रुपये की कमर्शियल प्रॉपर्टी है, तो पहले शहरी क्षेत्र में करीब 7 लाख रुपये स्टांप ड्यूटी लगती थी। अब सिर्फ 5000 रुपये में काम हो जाएगा – यानी लाखों रुपये की बचत!
यह फैसला भारतीय स्टांप एक्ट 1899 के प्रावधानों के तहत लिया गया है। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि पहले कमर्शियल प्रॉपर्टी पर यह छूट नहीं मिलती थी, जिससे लोग परेशान थे। अब यह समस्या दूर हो गई।
कौन-कौन से रिश्तेदार आते हैं “परिवार” में? (ब्लड रिलेशन)
यह छूट रक्त संबंधियों (Blood Relations) तक सीमित है। मुख्य रूप से शामिल हैं:
- पत्नी/पति
- बेटा-बेटी
- पोता-पोती, नाती-नातिन (ग्रैंडचिल्ड्रेन)
- सगे भाई-बहन
- माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी
- दामाद (बेटी का पति), बहू (बेटे की पत्नी)
- चाचा-ताऊ, बुआ, मामा-मौसी और उनके बच्चे (कुछ मामलों में कोलेटरल रिलेशंस)
कैबिनेट ने इन रिश्तों की परिभाषा को और स्पष्ट किया है, ताकि कोई भ्रम न रहे। यह छूट गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद तुरंत प्रभावी हो जाएगी।

पहले क्या था नियम?
- 2022 से पहले परिवार में भी गिफ्ट डीड पर सर्किल रेट के हिसाब से पूरी स्टांप ड्यूटी (7% तक) देनी पड़ती थी।
- 2023 में अधिसूचना से कृषि और आवासीय पर 5000 रुपये की कैप लगाई गई।
- अब 2026 के इस फैसले से दायरा बढ़ा दिया गया।
क्यों लिया गया यह फैसला?
- परिवार के अंदर संपत्ति हस्तांतरण को आसान और सस्ता बनाना।
- विवादों को कम करना (कई बार हाई स्टांप ड्यूटी की वजह से लोग पावर ऑफ अटॉर्नी का सहारा लेते थे, जो कानूनी रूप से कमजोर होता है)।
- रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट देना और पारदर्शिता बढ़ाना।
यह फैसला लाखों परिवारों के लिए राहत की खबर है, खासकर उन लोगों के लिए जो अपनी कमर्शियल संपत्ति (दुकान, गोदाम, फैक्ट्री आदि) अगली पीढ़ी को ट्रांसफर करना चाहते हैं। अगर आप भी प्लान बना रहे हैं, तो जल्द ही सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में संपर्क करें – नोटिफिकेशन आने के बाद यह सुविधा शुरू हो जाएगी।


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