लखनऊ, 14 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज (14 फरवरी 2026) ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विवादास्पद बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। CM योगी ने कहा कि “हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता है। सपा (समाजवादी पार्टी) को पूजना है तो पूजे।” यह बयान लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आया, जहां योगी ने अविमुक्तेश्वरानंद के “राहुल गांधी को शंकराचार्य कहने” वाले बयान पर पलटवार किया। योगी ने आगे कहा कि “धर्म की राजनीति से ऊपर है, और ऐसे बयान धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।”
विवाद की पूरी कहानी
- अविमुक्तेश्वरानंद का बयान: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 12 फरवरी को वाराणसी में कहा था कि “राहुल गांधी शंकराचार्य जैसे हैं – वो सनातन धर्म की रक्षा कर रहे हैं।” उन्होंने राहुल की भारत जोड़ो न्याय यात्रा को “धर्म युद्ध” बताया और सपा को समर्थन दिया।
- भाजपा का आरोप: भाजपा ने इसे “धर्म की राजनीति” और “शंकराचार्य पद की गरिमा का अपमान” बताया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि “शंकराचार्य पद परंपरागत और आध्यात्मिक है, इसे राजनीति में घसीटना गलत है।”
- योगी का पूरा बयान: CM योगी ने कहा: “शंकराचार्य पद कोई राजनीतिक पद नहीं है। हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता है। अगर सपा को अविमुक्तेश्वरानंद को पूजना है तो पूजे, लेकिन धर्म को राजनीति से अलग रखें। ये बयान सनातन धर्म की परंपराओं का अपमान हैं।” उन्होंने जोड़ा कि “उत्तर प्रदेश में धर्म और विकास साथ चलते हैं, राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।”
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- समाजवादी पार्टी का पक्ष: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी के बयान पर पलटवार किया: “शंकराचार्य जी ने सच्चाई बोली। राहुल गांधी सनातन की रक्षा कर रहे हैं, और भाजपा डर रही है। योगी जी खुद को सनातन का ठेकेदार मानते हैं?”
- कांग्रेस का समर्थन: कांग्रेस ने अविमुक्तेश्वरानंद के बयान को “धर्मगुरु की आवाज” बताया। प्रियंका गांधी ने X पर लिखा: “शंकराचार्य जी की बात सही है। भाजपा धर्म को राजनीति में घसीट रही है।”
- धर्मगुरुओं की राय: कई शंकराचार्यों ने अविमुक्तेश्वरानंद के बयान की आलोचना की। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा: “धर्मगुरु को राजनीति से दूर रहना चाहिए।”
बैकग्राउंड क्या है?
- अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 2023 में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य बने थे। वो अक्सर राजनीतिक बयान देते हैं।
- ये विवाद 2024 यूपी उपचुनाव और 2027 विधानसभा चुनाव के बीच आया है, जहां सपा और कांग्रेस गठबंधन पर विचार कर रहे हैं।
- योगी का बयान भाजपा की “धर्म रक्षा” वाली इमेज को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।
ये विवाद अब सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। क्या ये यूपी की राजनीति को प्रभावित करेगा?


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