नई दिल्ली, 13 फरवरी 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (13 फरवरी 2026) नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन-1 व 2 का उद्घाटन किया। ये सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा हैं, जो देश के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक, एकीकृत और नागरिक-केंद्रित बनाने का बड़ा कदम है। अब से देश का ‘पावर सेंटर’ साउथ ब्लॉक से हटकर सेवा तीर्थ में शिफ्ट हो गया है। ये बदलाव 78 साल बाद हुआ है – साउथ ब्लॉक 1947 से पीएमओ का केंद्र रहा था।
सेवा तीर्थ-कर्तव्य भवन की खास डिजाइन विशेषताएं
ये भवन ब्रिटिश काल की पुरानी इमारतों से पूरी तरह अलग हैं। मुख्य खासियतें:
- पर्यावरण-अनुकूल और सस्टेनेबल डिजाइन
4-स्टार GRIHA (ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटैट असेसमेंट) मानकों के अनुसार बने। - नवीकरणीय ऊर्जा: सोलर पैनल, सोलर वॉटर हीटिंग।
- जल संरक्षण: रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और वाटर रीसाइक्लिंग।
- अपशिष्ट प्रबंधन: आधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम।
- एनर्जी एफिशिएंट: उच्च-प्रदर्शन वाली भवन संरचनाएं, नेचुरल लाइटिंग और वेंटिलेशन से बिजली खपत कम।
इससे पर्यावरण पर असर कम और परिचालन लागत में बचत। - डिजिटल और एकीकृत कार्यालय प्रणाली
डिजिटल रूप से जुड़े ऑफिस स्पेस। - ओपन फ्लोर कॉन्सेप्ट: सेवा तीर्थ में औपचारिकताएं कम, अधिकारियों के बीच संवाद और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए।
- स्मार्ट वर्कस्पेस: आईटी-इंटीग्रेटेड ऑफिस, केंद्रीकृत कमांड सिस्टम।
- पब्लिक इंटरफेस जोन: आम नागरिकों के लिए सुव्यवस्थित क्षेत्र, शिकायत निवारण और सेवाएं एक जगह।
- केंद्रीकृत स्वागत और रिसेप्शन: विजिटर्स के लिए आसान एक्सेस।
- सुरक्षा और टेक्नोलॉजी
स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम (आईडी कार्ड बेस्ड)।
आधुनिक निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली।
एन्क्रिप्टेड संचार और साइबर सुरक्षा नेटवर्क। - संरचना और लेआउट
सेवा तीर्थ में तीन इमारतें: - सेवा तीर्थ-1: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)।
- सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय।
- सेवा तीर्थ-3: राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और NSA ऑफिस।
कर्तव्य भवन-1 और 2: रक्षा, वित्त, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, कानून, संस्कृति आदि कई प्रमुख मंत्रालय एक छत के नीचे।
कुल क्षेत्र: सेवा तीर्थ परिसर करीब 2.26 लाख वर्ग फीट, लागत ₹1,189 करोड़ (L&T द्वारा बनाया)।
साउथ-नॉर्थ ब्लॉक से कितना अलग?
- डिजाइन स्टाइल
साउथ-नॉर्थ ब्लॉक: ब्रिटिश वास्तुकार हर्बर्ट बेकर द्वारा 1930 के दशक में बनाए गए – इंडो-सरसेनिक/औपनिवेशिक स्टाइल, भव्य लेकिन पुरानी, कम नेचुरल लाइट, हवादार लेकिन एनर्जी-इंटेंसिव।
सेवा तीर्थ-कर्तव्य भवन: आधुनिक, क्लीन लाइन्स, ओपन स्पेस, भारतीय तत्वों के साथ फ्यूजन – पर्यावरण-अनुकूल, हाई-टेक और फंक्शनल। - कार्यक्षमता
पुराने ब्लॉक: मंत्रालय अलग-अलग जगहों पर बिखरे, समन्वय मुश्किल।
नए भवन: एकीकृत – मंत्रालय एक जगह, तेज निर्णय, बेहतर तालमेल। - नागरिक फोकस
पुराने: आम आदमी के लिए मुश्किल एक्सेस।
नए: जनसेवा केंद्र जैसा – शिकायत निवारण, पब्लिक एरिया, पारदर्शिता। - पर्यावरण और टेक्नोलॉजी
पुराने: कोई ग्रीन फीचर्स नहीं, पुरानी वायरिंग।
नए: GRIHA 4-स्टार, स्मार्ट सिस्टम, एनर्जी सेविंग।
ये बदलाव “नए भारत” का प्रतीक है – पुरानी औपनिवेशिक व्यवस्था से मुक्ति और आधुनिक, कुशल शासन की ओर। साउथ-नॉर्थ ब्लॉक अब संग्रहालय बनेंगे।


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