वाशिंगटन/कोपेनहेगन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही वैश्विक कूटनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की इच्छा जताई है और व्हाइट हाउस ने साफ कहा कि “सभी विकल्प खुले हैं”, जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है, जो NATO का संस्थापक सदस्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रंप ग्रीनलैंड पर “कब्जा” करने की कोशिश करते हैं, तो NATO का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है और अमेरिका-यूरोप के बीच दशकों पुराना गठबंधन टूट सकता है। यह विवाद वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बाद और तेज हुआ है।
विवाद की शुरुआत और ट्रंप की धमकी
- ट्रंप की पुरानी इच्छा: 2019 में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को डेनमार्क से “खरीदने” की पेशकश की थी, जिसे डेनमार्क ने “बेतुका” करार देकर ठुकरा दिया। अब 2026 में सत्ता संभालते ही ट्रंप ने इसे फिर से उठाया। 6 जनवरी 2026 को उन्होंने कहा, “हमें ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चाहिए।” उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों को कम महत्व देते हुए सामरिक महत्व पर जोर दिया।
- सैन्य विकल्प: व्हाइट हाउस ने 7 जनवरी को बयान जारी कर कहा कि “सभी ऑप्शन टेबल पर हैं”, जिसमें सैन्य बल का इस्तेमाल भी शामिल है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के सलाहकार ग्रीनलैंड हासिल करने के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं। यह धमकी वेनेजुएला में मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद आई, जिससे लैटिन अमेरिका में तनाव बढ़ा था।
- ग्रीनलैंड का महत्व: ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जहां जलवायु परिवर्तन से नए संसाधन (तेल, गैस, दुर्लभ धातु) उजागर हो रहे हैं। अमेरिका का थुले एयर बेस पहले से वहां है, लेकिन ट्रंप पूर्ण नियंत्रण चाहते हैं। रूस और चीन की बढ़ती मौजूदगी के खिलाफ यह सामरिक कदम बताया जा रहा है।
NATO पर असर: टूटने का खतरा क्यों?
- NATO की नींव: 1949 में स्थापित NATO में 32 सदस्य हैं, जिसमें डेनमार्क संस्थापक है। अनुच्छेद 5 के तहत एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। अगर अमेरिका (NATO का सबसे बड़ा सदस्य) डेनमार्क के हिस्से ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो यह गठबंधन की बुनियाद हिला सकता है।
- विशेषज्ञों की चिंता: AP न्यूज के अनुसार, ट्रंप की धमकी NATO के भविष्य को जोखिम में डाल सकती है। DW रिपोर्ट में कहा गया कि सिर्फ बातें ही NATO को नुकसान पहुंचा रही हैं, क्योंकि यह सहयोगी देशों में अविश्वास पैदा कर रही है। Chatham House ने चेतावनी दी कि यूरोपीय देश असहाय नहीं हैं और उनके पास लीवरेज है, जैसे व्यापार या सैन्य सहयोग।
- ट्रंप का NATO पर हमला: ट्रंप ने पहले भी NATO को “पुराना” करार दिया था और सदस्यों से रक्षा खर्च बढ़ाने की मांग की। अब उन्होंने कहा, “NATO अमेरिका के बिना नहीं चल सकता।” LSE ब्लॉग में कहा गया कि धमकियां डेनमार्क और NATO की एकता के लिए खतरनाक हैं।
- अमेरिका-यूरोप रिश्ते पर असर: अगर ग्रीनलैंड पर विवाद बढ़ा, तो ट्रांस-अटलांटिक संबंध टूट सकते हैं। यूरोप पहले से रूस-यूक्रेन युद्ध से जूझ रहा है, और अमेरिका का अलगाववाद यूरोपीय सुरक्षा को कमजोर कर सकता है। NPR के अनुसार, डेनमार्क ने कहा कि अमेरिकी हमला NATO को खतरे में डालेगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
- डेनमार्क: प्रधानमंत्री मेते फ्रेडरिकसन ने धमकी को “अस्वीकार्य” बताया और कहा, “ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।” कोपेनहेगन में विरोध प्रदर्शन हुए।
- यूरोपीय संघ: EU ने अमेरिका से संयम की अपील की और NATO एकता पर जोर दिया।
- रूस और चीन: मॉस्को ने इसे “अमेरिकी साम्राज्यवाद” करार दिया, जबकि बीजिंग ने आर्कटिक में अपनी रुचि दोहराई।
- ग्रीनलैंड: स्थानीय नेता मुटे ईगेडे ने कहा कि फैसला ग्रीनलैंडवासियों का होगा, अमेरिका का नहीं।
- ट्रंप का जवाब: ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट किया कि “यह चर्चा जारी रहेगी”, लेकिन सैन्य विकल्प को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।
वर्तमान स्थिति
- 8 जनवरी 2026 तक कोई सैन्य कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन तनाव बढ़ा हुआ है। NATO महासचिव ने आपात बैठक बुलाई है। CNN के अनुसार, ट्रंप संसाधनों से ज्यादा सामरिक महत्व पर फोकस कर रहे हैं। अगर विवाद बढ़ा, तो NATO से अमेरिका का अलग होना या गठबंधन का पुनर्गठन संभव है।
- विशेषज्ञों का मानना: यह ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा है, जो बहुपक्षीय गठबंधनों को कमजोर कर रही है। यूरोप को अपनी रक्षा क्षमता बढ़ानी होगी।
यह घटना वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है, जहां अमेरिका की आक्रामकता सहयोगियों को ही निशाना बना रही है।


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