नई दिल्ली, 13 फरवरी 2026
राफेल जेट्स की नई खेप के बाद अब भारत ने अपनी एयर डिफेंस को और मजबूत कर लिया है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 288 अतिरिक्त S-400 सतह-से-हवा मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दे दी है। ये डील रूस से करीब ₹10,000 करोड़ की है और इसे फास्ट ट्रैक प्रक्रिया (Fast Track Procedure) से पूरा किया जाएगा। ये मिसाइलें ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) में इस्तेमाल हुईं S-400 की स्टॉक को रीप्लेनिश करने के साथ-साथ एक्स्ट्रा लॉन्ग-रेंज और शॉर्ट-रेंज मिसाइलों का स्टॉक बढ़ाने के लिए हैं।
डील के मुख्य डिटेल्स
- कुल मिसाइलें: 288 (120 शॉर्ट-रेंज + 168 लॉन्ग-रेंज)।
- कॉस्ट: अनुमानित ₹10,000 करोड़।
- उद्देश्य:
- ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुई मिसाइलों की भरपाई (जहां S-400 ने पाकिस्तानी फाइटर जेट्स और स्पाई प्लेन को 314 किमी दूर से मार गिराया था)।
- एयर डिफेंस को और मजबूत करना, खासकर पाकिस्तान और चीन की बढ़ती हवाई धमकियों के खिलाफ।
- अतिरिक्त: रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ये डील दो अतिरिक्त S-400 सिस्टम्स के साथ भी जुड़ी हो सकती है। IAF पहले से ही पैंटसिर शॉर्ट-रेंज सिस्टम के साथ 5 और S-400 सिस्टम्स की मांग कर रहा है।
- डिलीवरी: 2018 के मूल $5.43 बिलियन (करीब ₹40,000 करोड़) डील के तहत 5 S-400 स्क्वाड्रन्स में से चौथा जून 2026 तक और पांचवां नवंबर 2026 तक आएगा। ये नई मिसाइलें उस स्टॉक को बूस्ट करेंगी।
ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका
मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच 88 घंटे के संघर्ष (ऑपरेशन सिंदूर) में S-400 ने कमाल दिखाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसने पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट को 314 किमी दूर से मार गिराया और पाक एयर फोर्स को सिंधु नदी के पूर्व में उड़ान भरने से रोका। ये सिस्टम 400 किमी तक की रेंज, मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग और हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी रोकने की क्षमता रखता है।
पाकिस्तान पर असर
ये डील पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है। पाक एयर फोर्स पहले से ही S-400 की वजह से डर में है, और अब 288 अतिरिक्त मिसाइलों से भारत का एयर डिफेंस और मजबूत हो जाएगा। पाकिस्तान के लिए “288 वोल्ट का झटका” जैसा टाइटल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, क्योंकि ये मिसाइलें पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट को दूर से ही निशाना बना सकती हैं।
बैकग्राउंड
- मूल डील: अक्टूबर 2018 में $5.43 बिलियन की 5 S-400 रेजिमेंट्स।
- डिलीवरी: 3 पहले से भारत में, बाकी 2026 में।
- CAATSA: अमेरिका ने CAATSA सैंक्शंस की धमकी दी थी, लेकिन भारत ने डील पूरी की।
- अब ये अतिरिक्त मिसाइलें स्टॉक बढ़ाने और ऑपरेशनल रेडीनेस के लिए।
ये डील भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रूस के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी को दिखाती है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की एयर डिफेंस अब क्षेत्र में सबसे मजबूत में से एक हो गई है।


More Stories
13 साल की बेटी को उत्तराधिकारी बनाया: किम जोंग उन का फैसला, NIS का बड़ा दावा – बीजिंग दौरे से शुरू हुआ प्रचार
बलूचिस्तान: 1948 का धोखा आज भी जिंदा, जिन्ना का वादा भूलकर पाकिस्तान टूटने की ओर क्यों बढ़ रहा?
सिर्फ 1 कप चाय की कीमत में 5-8 लीटर पेट्रोल! दुनिया के सबसे सस्ते पेट्रोल वाले 10 देश