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Lines of sindoor with blood: Pakistan's panic, 60 appeals – will the blaze of war ignite again?

सिंदूर की लकीरें खून से: पाकिस्तान की बौखलाहट, 60 अपीलें – क्या फिर भड़केगा युद्ध का शोला?

नई दिल्ली/वाशिंगटन: अमेरिकी न्याय विभाग के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत सार्वजनिक हुए दस्तावेजों ने 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की बौखलाहट को उजागर कर दिया है। इन दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए अमेरिकी अधिकारियों, सांसदों और मीडिया से 60 से अधिक बार संपर्क किया – ईमेल, फोन कॉल और व्यक्तिगत बैठकों के जरिए। पाकिस्तान ने लॉबिंग फर्मों पर करोड़ों रुपये खर्च किए, जबकि भारत ने भी ट्रंप प्रशासन के साथ ट्रेड और संबंधों के लिए संपर्क बनाए रखा। यह खुलासा 5-6 जनवरी 2026 को हुआ, जो भारत-पाकिस्तान तनाव की गहराई को दिखाता है।

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

  • पहलगाम हमला: 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 पर्यटकों की हत्या कर दी। हमलावरों ने हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया।
  • भारत की प्रतिक्रिया: 6-7 मई 2025 की रात भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। भारतीय वायुसेना और मिसाइलों से पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों (लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के) को निशाना बनाया, जिसमें मुरिदके और बहावलपुर जैसे प्रमुख केंद्र शामिल थे।
  • संघर्ष 4 दिन चला, जिसमें पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, लेकिन भारत ने आतंकी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। 10 मई को पाकिस्तान के DGMO ने भारतीय DGMO से संपर्क कर युद्धविराम की गुहार लगाई।

अमेरिकी दस्तावेजों में पाकिस्तान की लॉबिंग

Lines of sindoor with blood: Pakistan's panic, 60 appeals – will the blaze of war ignite again?
Lines of sindoor with blood: Pakistan's panic, 60 appeals – will the blaze of war ignite again?
  • FARA फाइलिंग्स से पता चला कि पाकिस्तान के राजदूत और डिफेंस अटैची ने 60+ संपर्क किए – पेंटागन, स्टेट डिपार्टमेंट, सांसदों और पत्रकारों से।
  • पाकिस्तान ने 6 लॉबिंग फर्मों पर सालाना लगभग 5 मिलियन डॉलर (करीब 45 करोड़ रुपये) खर्च किए ताकि ट्रंप प्रशासन तक तेज पहुंच बनाई जा सके।
  • मुद्दे: कश्मीर, क्षेत्रीय सुरक्षा, द्विपक्षीय संबंध और रेयर अर्थ मिनरल्स। पाकिस्तान का मकसद भारत पर दबाव डलवाना और कार्रवाई रोकवाना था।
  • एक फर्म (सिडली लॉ LLP) ने पाकिस्तान को आर्थिक संबंध मजबूत करने में मदद की। पाकिस्तान ने अमेरिकी मीडिया से इंटरव्यू और बैकग्राउंड जानकारी मांगी ताकि भारत विरोधी नैरेटिव बनाया जा सके।

भारत की डिप्लोमैटिक कोशिशें

  • भारतीय दूतावास ने लॉबिंग फर्म SHW Partners LLC (ट्रंप के करीबी जेसन मिलर की) और Seiden Law LLP को हायर किया।
  • 10 मई (युद्धविराम के दिन) को फर्म ने भारतीय दूतावास की ओर से व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के रिकी गिल से संपर्क कराया।
  • फोकस: अमेरिका-भारत ट्रेड वार्ताएं, ऑपरेशन सिंदूर की मीडिया कवरेज मैनेज करना और द्विपक्षीय संबंध मजबूत करना।
  • भारत ने अमेरिकी मीडिया (फॉक्स न्यूज आदि) से संपर्क कर अपनी स्थिति स्पष्ट की।

अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव और वर्तमान स्थिति

  • ट्रंप ने युद्धविराम में अपनी भूमिका का दावा किया, लेकिन FARA दस्तावेजों में इसका जिक्र नहीं – भारत ने इसे खारिज किया, कहा कि पाकिस्तान ने सैन्य चैनल से गुहार लगाई।
  • पाकिस्तान ने चीन की मध्यस्थता का भी दावा किया, जिसे भारत ने खारिज कर दिया।
  • ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की “नई नॉर्मल” नीति को मजबूत किया – आतंक पर सीधे प्रहार, बिना बड़े युद्ध के।
  • 2026 में तनाव बना हुआ: सिंधु जल समझौता निलंबित, F-16 अपग्रेड पर विवाद। अमेरिकी थिंक टैंक ने 2026 में बड़े संघर्ष की चेतावनी दी।

यह खुलासा दिखाता है कि कैसे दोनों देशों ने अमेरिका में लॉबिंग की – पाकिस्तान बचाव में, भारत संबंध मजबूत करने में। ऑपरेशन सिंदूर ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदल दिया, और भारत की आतंक विरोधी नीति को नई मजबूती दी। स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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