नई दिल्ली/डिब्रूगढ़, 14 फरवरी 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम के डिब्रूगढ़ जिले में डिब्रूगढ़-मोरान इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का उद्घाटन किया और इतिहास रच दिया। उन्होंने भारतीय वायुसेना के C-130J Super Hercules ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से इस हाईवे-कम-रनवे पर लैंडिंग की – यह किसी प्रधानमंत्री द्वारा किसी प्रधानमंत्री द्वारा ऐसे हाईवे पर पहली लैंडिंग है। यह पूर्वोत्तर भारत का पहला हाईवे आधारित इमरजेंसी लैंडिंग रनवे है, जो सामान्य समय में NH-127 का हिस्सा है और आपातकाल (युद्ध या प्राकृतिक आपदा) में लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों के लिए रनवे बन जाता है।
इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) क्या है और क्या खास है?
- लंबाई: 4.2 किलोमीटर का मजबूत हिस्सा (National Highway 127 के मोरान बाईपास पर)।
- क्षमता: लड़ाकू विमान (जैसे सुखोई Su-30MKI, राफेल), भारी ट्रांसपोर्ट विमान (C-130J, C-17) और हेलीकॉप्टर लैंड कर सकते हैं। वजन क्षमता 74 टन तक।
- लागत: करीब 100 करोड़ रुपये।
- निर्माण: 2021 में कॉन्सेप्ट शुरू, 2025 में पूरा हुआ। हाईवे को मजबूत किया गया है – रनवे जैसी सतह, लाइटिंग, मार्किंग और आपातकालीन सुविधाएं।
- उद्देश्य:
- युद्ध में अगर मुख्य एयरबेस (जैसे चाबुआ, तेजपुर) पर हमला हो तो वैकल्पिक लैंडिंग जगह।
- प्राकृतिक आपदा (बाढ़, भूस्खलन) में राहत सामग्री पहुंचाना।
- पूर्वोत्तर में तेज डिप्लॉयमेंट और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट।
चीन के लिए क्या मायने?
- स्थान: डिब्रूगढ़ ऊपरी असम में है – LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) से 300 किमी से कम दूरी पर।
- रणनीतिक महत्व:
- LAC के पास एयरबेस कम हैं। अगर चीन हमला करे तो ये ELF वैकल्पिक बेस बनेगा।
- तेज रिस्पॉन्स: विमान लैंड कर रिफ्यूल, री-आर्म कर फिर उड़ान भर सकते हैं।
- चीन की बढ़ती गतिविधि (हेलीपोर्ट, रनवे निर्माण) के जवाब में भारत की तैयारी।
- विशेषज्ञों का कहना: ये “मैसेज टू चाइना” है – भारत अब पूर्वोत्तर में डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से मजबूत कर रहा है। ग्वादर पोर्ट और CPEC के जवाब में भारत LAC पर मजबूत हो रहा है।
आज का कार्यक्रम
- PM मोदी ने C-130J से लैंडिंग की।
- उसके बाद Su-30MKI और राफेल की एरियल डिस्प्ले देखी।
- बाद में गुवाहाटी में 5,000 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए।
- ब्रह्मपुत्र पर नया ब्रिज और अन्य विकास परियोजनाएं भी शुरू कीं।
ये ELF पूर्वोत्तर भारत में रक्षा और विकास का नया अध्याय है – चीन को “दमखम” दिखाने वाला कदम। क्या ये LAC पर तनाव बढ़ाएगा या भारत की मजबूती दिखाएगा?


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