नई दिल्ली, 4 फरवरी 2026: लोकसभा के बजट सत्र में एक बार फिर राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया, जब कांग्रेस के नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा “Four Stars of Destiny” की प्रति संसद परिसर में लेकर पहुंचे। उन्होंने मीडिया के सामने किताब दिखाते हुए दावा किया कि यह किताब विदेश में उपलब्ध है, लेकिन भारत में सरकार की मंजूरी न मिलने के कारण प्रकाशित नहीं हो पा रही है। राहुल गांधी ने कहा, “देश के हर युवा को इस किताब के बारे में पता होना चाहिए। जनरल नरवणे ने इसमें 2020 के लद्दाख गतिरोध का पूरा सच लिखा है। सरकार कह रही है कि किताब मौजूद नहीं है, लेकिन यह है। अगर प्रधानमंत्री सदन में आएंगे, तो मैं उन्हें खुद यह किताब सौंपूंगा।”
यह घटना सोमवार (2 फरवरी 2026) से शुरू हुए विवाद का चरम बिंदु थी, जब राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान किताब के कुछ अंश पढ़ने की कोशिश की। सदन में हंगामा मच गया, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने आपत्ति जताई, और स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा नियम 349 और 353 का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। सदन बार-बार स्थगित हुआ।
किताब में क्या विवादास्पद खुलासे?
जनरल नरवणे (सेना प्रमुख 2019-2022) की यह आत्मकथा 2024 से रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे BBC, Hindustan Times, The Caravan, The Wire) के अनुसार, किताब में 2020 के पूर्वी लद्दाख (गलवान-पैंगोंग त्सो) गतिरोध के दौरान राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं:
- राहुल गांधी के हवाले से: अक्टूबर 2020 में जब चीनी टैंक कैलाश रेंज (पैंगोंग झील के दक्षिण) की ओर बढ़ रहे थे, तो उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने बार-बार तोपखाने से फायर करने की अनुमति मांगी, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व से स्पष्ट निर्देश नहीं मिले।
- जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री से संपर्क किया, लेकिन जवाब में कहा गया “जो उचित समझो, वो करो” (do what you think is appropriate)।
- राहुल गांधी ने इसे “सेना को अकेला छोड़ देने” के रूप में पेश किया और कहा कि प्रधानमंत्री ने जिम्मेदारी नहीं निभाई, जिससे सेना प्रमुख को “अकेला” महसूस हुआ।
- किताब में यह भी जिक्र है कि चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की, और राजनीतिक स्तर पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया गया।
किताब के कुछ अंश दिसंबर 2023 में PTI और The Caravan मैगजीन में प्रकाशित हुए थे, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। पेंगुइन रैंडम हाउस ने जनवरी 2024 में लॉन्च प्लान किया था, लेकिन मंजूरी न मिलने से रुक गया।
किताब की वर्तमान स्थिति (फरवरी 2026 तक)
- भारत में आधिकारिक प्रकाशन नहीं हुआ; रक्षा मंत्रालय की “रिव्यू” में 1+ साल से अटकी हुई है।
- राहुल गांधी ने दावा किया कि यह विदेश में प्रकाशित और उपलब्ध है, लेकिन भारत में सरकार रोक रही है।
- घटना के बाद Amazon और Flipkart से किताब गायब हो गई (कई रिपोर्ट्स में उल्लेख)।
- 2020-2024 में रक्षा मंत्रालय ने 35 अन्य किताबों को मंजूरी दी, लेकिन नरवणे की किताब एकमात्र लंबित है।
- जनरल नरवणे ने खुद कहा है कि मामला प्रकाशक और MoD के बीच है; वे फॉलो-अप नहीं कर रहे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- कांग्रेस पक्ष: राहुल गांधी ने इसे “सच्चाई छिपाने” का मामला बताया और युवाओं से किताब पढ़ने की अपील की।
- भाजपा/सरकार: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अप्रकाशित किताब का हवाला सदन नियमों के खिलाफ है। अमित शाह ने इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जोड़ा। सरकार का रुख: किताब अनऑफिशियल है, इसलिए उद्धरण नहीं हो सकता।
- विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार किताब को दबा रही है ताकि 2020 लद्दाख संकट पर सवाल न उठें।
यह विवाद राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और सेना-राजनीति के रिश्ते पर नई बहस छेड़ रहा है। किताब की आधिकारिक रिलीज कब होगी, यह देखना बाकी है, लेकिन फिलहाल यह संसद की सबसे गर्म बहस का केंद्र बनी हुई है।


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