वाशिंगटन/कोपेनहेगन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे या खरीदने की लगातार धमकियों के बीच डेनमार्क ने अब सख्त रुख अपना लिया है। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर कोई विदेशी ताकत (अमेरिका सहित) ग्रीनलैंड पर हमला करेगी, तो डेनिश सैनिक “पहले गोली मारेंगे, फिर सवाल पूछेंगे” – यानी बिना किसी आदेश या इजाजत के तुरंत फायरिंग शुरू कर देंगे। यह आदेश 1952 का पुराना कोल्ड वॉर दौर का नियम है, जो आज भी पूरी तरह लागू है।
यह बयान 8-9 जनवरी 2026 को सामने आया, जब ट्रम्प प्रशासन ने ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई को “विकल्प” बताया। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिक्सन ने इसे “NATO के लिए अंत” करार दिया और कहा, “अगर अमेरिका किसी NATO देश पर हमला करेगा, तो सब कुछ खत्म हो जाएगा।”
क्या है 1952 का निर्देश?
- यह नियम 1940 में नाजी जर्मनी द्वारा डेनमार्क पर हमले के बाद बनाया गया था, जब संचार व्यवस्था ध्वस्त हो गई और सैनिकों को आदेश का इंतजार नहीं कर पाया।
- निर्देश स्पष्ट कहता है: “विदेशी हमले पर सैनिक बिना आदेश के तुरंत लड़ाई शुरू करेंगे, भले ही कमांडर को युद्ध की घोषणा की जानकारी न हो।”
- डेनमार्क के जॉइंट आर्कटिक कमांड (ग्रीनलैंड में) तय करेगा कि क्या हमला माना जाएगा।
- रक्षा मंत्रालय ने डेनिश अखबार Berlingske को बताया: “सैनिकों को तुरंत फायरिंग शुरू करनी होगी, बिना राजनीतिक मंजूरी या आदेश के।”
ट्रम्प की धमकी का पूरा संदर्भ
- ट्रम्प ने बार-बार कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है, क्योंकि वहां रूसी और चीनी जहाज घूम रहे हैं।
- उन्होंने खरीदने या “सैन्य विकल्प” से कब्जा करने की बात की।
- व्हाइट हाउस ने कहा: “ट्रम्प सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।”
- अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा: “डेनमार्क ने ग्रीनलैंड को विश्व सुरक्षा का एंकर बनाने में नाकाम रहे हैं।”
- रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ग्रीनलैंडवासियों को 10,000-1 लाख डॉलर प्रति व्यक्ति देने की योजना पर विचार कर रहा है (कुल 6 अरब डॉलर) ताकि वे डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका के साथ जुड़ें।
ग्रीनलैंड की स्थिति
- ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है (जनसंख्या लगभग 57,000)।
- अमेरिका के पास वहां थुले एयर बेस है।
- आर्कटिक में बढ़ते तापमान से खनिज संसाधन (रेयर अर्थ) उपलब्ध हो रहे हैं।
- ग्रीनलैंडवासी ज्यादातर स्वतंत्रता चाहते हैं, लेकिन अमेरिका का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
डेनमार्क और यूरोप की प्रतिक्रियाएं
- PM फ्रेडरिक्सन (TV2 को): “अमेरिका का हमला NATO को खत्म कर देगा।”
- यूरोपीय देश (फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड) डेनमार्क के साथ खड़े हैं। फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा: “हम साथ मिलकर कार्रवाई करेंगे।”
- डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रतिनिधि व्हाइट हाउस और कांग्रेस से मिले, लेकिन ट्रम्प नहीं माने।
अमेरिका-डेनमार्क/NATO पर असर
- यह NATO के लिए सबसे बड़ा संकट है, क्योंकि अमेरिका और डेनमार्क दोनों सदस्य हैं।
- विशेषज्ञों का कहना: अमेरिका का ग्रीनलैंड पर हमला NATO को तोड़ सकता है।
- ट्रम्प ने NATO पर पहले भी खर्च न करने का आरोप लगाया है।
यह घटनाक्रम जनवरी 2026 में तेजी से बढ़ा है, जब ट्रम्प ने वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद ग्रीनलैंड पर नजरें गड़ाईं। डेनमार्क की यह चेतावनी साफ संदेश है: “हम मजाक नहीं कर रहे।” स्थिति पर नजर बनी हुई है, क्योंकि NATO सहयोगी देशों के बीच यह पहली बार इतनी गंभीर टकराव की स्थिति है।


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