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Faster than the BrahMos missile, another name for destruction within a range of 500 kilometers, Indian Rocket Force's 'Arjun'

ब्रह्मोस मिसाइल से भी तेज रफ्तार, 500 किलोमीटर के रेंज में तबाही का दूसरा नाम, इंडियन रॉकेट फोर्स का ‘अर्जुन’

प्रलय (Pralay) मिसाइल को “इंडियन रॉकेट फोर्स का ‘अर्जुन'” बताया गया है, जो ब्रह्मोस से तेज, 500 किमी रेंज वाली क्वैसी-बैलिस्टिक सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल है। यह DRDO द्वारा विकसित भारत की पहली टैक्टिकल क्वैसी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे तिब्बत में चीनी सैन्य बेस को टारगेट करने के लिए खासतौर पर डिजाइन किया गया है।

मुख्य विशेषताएं और तुलना

  • रेंज: 150-500 किमी (टैक्टिकल स्ट्राइक के लिए आदर्श, ब्रह्मोस की एक्सटेंडेड रेंज 450-500+ किमी से तुलनीय लेकिन अलग कैटेगरी)।
  • स्पीड: मैक 6.1 (लगभग 7500 kmph) – हाइपरसोनिक कैटेगरी में। ब्रह्मोस सुपरसोनिक है (मैक 2.8-3, यानी 3700 kmph तक), इसलिए प्रलय ब्रह्मोस से कहीं ज्यादा तेज है।
  • वॉरहेड: 500-1000 किग्रा (कन्वेंशनल या स्पेशलाइज्ड), प्रिसिजन टारगेटिंग के साथ।
  • वजन: लगभग 5000 किग्रा (मोबाइल लॉन्चर से फायर)।
  • टेक्नोलॉजी: सबमरीन-लॉन्च्ड K-सीरीज (K-4/K-15) की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, देसी एवियोनिक्स, हाई प्रिसिजन गाइडेंस। यह क्वैसी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी फॉलो करती है – बैलिस्टिक की तरह हाई अल्टीट्यूड लेकिन क्रूज की तरह मैन्यूवरेबल।
  • लॉन्च प्लेटफॉर्म: मोबाइल ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर (TEL), इंडियन आर्मी की रॉकेट फोर्स में शामिल।

ब्रह्मोस vs प्रलय की तुलना (स्टोरी में हाइलाइट)

पैरामीटरब्रह्मोस (सुपरसोनिक क्रूज)प्रलय (क्वैसी-बैलिस्टिक)
स्पीडमैक 2.8-3 (3700 kmph)मैक 6.1 (7500 kmph)
रेंज290-900 km (एक्सटेंडेड)150-500 km
प्रकारक्रूज (रैमजेट)क्वैसी-बैलिस्टिक
मुख्य रोलएंटी-शिप/लैंड अटैकटैक्टिकल सरफेस-टू-सरफेस, चीन बॉर्डर फोकस
इंटरसेप्शन मुश्किलहाई (सुपरसोनिक)बहुत हाई (हाइपरसोनिक + मैन्यूवर)

प्रलय को “तबाही का दूसरा नाम” कहा गया क्योंकि इसकी हाइपरसोनिक स्पीड से दुश्मन के डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400) इसे रोकना बेहद मुश्किल है। यह इंडियन रॉकेट फोर्स (Army की आर्टिलरी/मिसाइल यूनिट्स) का प्रमुख हथियार बन चुका है, खासकर LAC पर चीन के खिलाफ।

बैकग्राउंड और डेवलपमेंट

  • DRDO द्वारा विकसित: पूरी तरह स्वदेशी, K-सीरीज SLBM टेक्नोलॉजी से लिया गया।
  • इंडक्शन: आर्मी में शामिल, कई टेस्ट सफल (2021-2025 में), अब ऑपरेशनल।
  • रणनीतिक महत्व: चीन की तिब्बत में बेस, एयरफील्ड्स को टारगेट करने के लिए। रॉकेट फोर्स में ब्रह्मोस, पिनाका, प्रलय की तिकड़ी घातक मानी जाती है।
  • 2026 अपडेट: हालिया रिपोर्ट्स में प्रलय को “अर्जुन” जैसा कहा गया – अचूक, तेज और विनाशकारी। (अर्जुन यहां मिसाइल का नाम नहीं, बल्कि महाभारत के योद्धा की तरह प्रतीकात्मक – अचूक निशानेबाज)।

अन्य संबंधित डेवलपमेंट (2026 में)

  • इंडियन आर्मी रॉकेट-कम-मिसाइल फोर्स बनाने की प्लानिंग (चीनी/पाकिस्तानी मॉडल पर)।
  • गणतंत्र दिवस 2026 में LR-AShM (हाइपरसोनिक, 1500 km रेंज, मैक 5-10) जैसी नई मिसाइलें दिखाई गईं, लेकिन स्टोरी स्पेसिफिक प्रलय पर है।
  • प्रलय को “इंडियन रॉकेट फोर्स का अर्जुन” कहना इसका महत्व दर्शाता है – यह टैक्टिकल स्ट्राइक में गेम-चेंजर है।

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