डीमैट होल्डर्स के लिए SEBI का बड़ा प्लान अब अमल में आने वाला है, जिसमें मुख्य रूप से दो बड़े बदलाव हैं – एक म्यूचुअल फंड यूनिट्स में ऑटोमेटेड SWP/STP की सुविधा, और दूसरा पुराने फिजिकल शेयर्स के ट्रांसफर/डेमैट को आसान बनाने के लिए स्पेशल विंडो। ये नियम फरवरी 2026 में SEBI द्वारा जारी किए गए हैं, और इनसे लाखों निवेशकों को पेपरवर्क कम करने, समय बचाने और बेहतर कंट्रोल मिलेगा।
ये बदलाव Ease of Doing Investment के तहत आए हैं, जहां SEBI का फोकस निवेशकों की सुविधा बढ़ाना, फ्रॉड रोकना और प्रक्रिया तेज करना है। आइए डिटेल में समझते हैं कि क्या बदल रहा है, कब लागू होगा और किन्हें सबसे ज्यादा फायदा होगा।
1. डेमैट में म्यूचुअल फंड्स के लिए ऑटोमेटेड SWP/STP (सबसे बड़ा और नया प्लान)
5 फरवरी 2026 को SEBI ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया, जिसमें डेमैट अकाउंट में रखे म्यूचुअल फंड यूनिट्स पर Systematic Withdrawal Plan (SWP) और Systematic Transfer Plan (STP) को ऑटोमेटेड (standing instructions) बनाने का प्रस्ताव है।
- अभी की समस्या: डेमैट मोड में MF यूनिट्स रखने वाले निवेशकों को हर SWP/STP ट्रांजेक्शन के लिए मैनुअल Delivery Instruction Slip (DIS) भरनी पड़ती है। यह पेपरवर्क ज्यादा है, समय लगता है, और Statement of Account (SOA) मोड की तुलना में कम सुविधाजनक। कई बार Power of Attorney (PoA) की जरूरत पड़ती है, जो निवेशक का डायरेक्ट कंट्रोल कम करता है।
- नया प्रस्ताव क्या है? एक बार standing instruction (एक बार रजिस्टर) करने के बाद SWP/STP ऑटोमेटिक चलेंगे – बिना हर बार स्लिप या मैनुअल रिक्वेस्ट के। यह सुविधा डिपॉजिटरीज (NSDL/CDSL) या स्टॉक एक्सचेंज के जरिए होगी।
- इम्प्लीमेंटेशन फेज में:
- Phase 1: यूनिट-बेस्ड SWP/STP रजिस्टरेशन – डिपॉजिटरीज या एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर।
- Phase 2: आगे और आसान बनाया जाएगा (डिटेल्स बाद में)।
- किन्हें सबसे ज्यादा फायदा?
- सीनियर सिटीजन और रिटायरमेंट प्लानर्स: SWP से नियमित मंथली इनकम (जैसे ₹50,000-₹1 लाख) बिना झंझट के।
- STP यूजर्स: एक फंड से दूसरे में ऑटो ट्रांसफर (मार्केट टाइमिंग या रिस्क मैनेजमेंट के लिए)।
- डेमैट में MF होल्ड करने वाले करोड़ों निवेशक – अब SOA मोड जैसी आसानी मिलेगी।
- PoA की जरूरत कम होगी, निवेशक का डायरेक्ट कंट्रोल बढ़ेगा।
- स्टेटस: अभी प्रस्ताव है। पब्लिक कमेंट्स 26 फरवरी 2026 तक मांगे गए हैं। जल्दी फाइनल होकर लागू होने की उम्मीद है (शायद मार्च-अप्रैल 2026 तक)।
2. फिजिकल शेयर्स के ट्रांसफर/डेमैट के लिए स्पेशल विंडो और LOC खत्म
30 जनवरी 2026 को SEBI ने सर्कुलर जारी किया, जिसमें Letter of Confirmation (LOC) की जरूरत खत्म कर दी गई है, और एक साल की स्पेशल विंडो खोली गई है।
- पुरानी समस्या: 1 अप्रैल 2019 से पहले खरीदे/बेचे गए फिजिकल शेयर्स (duplicate certificate, transmission, transposition, unclaimed suspense, corporate actions) के लिए LOC जारी होता था, जो 150 दिनों तक लगता था। LOC खोने या मिसयूज का रिस्क था, और कई केस पेंडिंग रह जाते थे।
- नया नियम:
- अब डायरेक्ट क्रेडिट डेमैट अकाउंट में होगा – सिर्फ 30 दिनों में।
- RTAs/लिस्टेड कंपनियां ड्यू डिलिजेंस के बाद डायरेक्ट क्रेडिट करेंगी।
- CML (Client Master List) 2 महीने से पुराना नहीं होना चाहिए (DP द्वारा अटेस्टेड)।
- स्पेशल विंडो: 5 फरवरी 2026 से 4 फरवरी 2027 तक (1 साल) – उन फिजिकल शेयर्स के लिए जो 1 अप्रैल 2019 से पहले खरीदे/बेचे गए थे। ट्रांसफर सिर्फ डेमैट फॉर्म में होगा।
- पुराने रिजेक्टेड/रिटर्न्ड केस भी दोबारा लॉज कर सकते हैं।
- यह एक बार की मौका है – मिस करने पर परमानेंट लॉक हो सकता है।
- किन्हें फायदा?
- पुराने निवेशक जिनके पास फिजिकल सर्टिफिकेट पड़े हैं (ट्रांसमिशन, लॉस्ट सर्टिफिकेट, फैमिली ट्रांसफर आदि)।
- समय कम: 150 दिन से घटकर 30 दिन।
- रिस्क कम: LOC की जगह डायरेक्ट क्रेडिट।
- अप्रैल 2, 2026 से नया फ्रेमवर्क फुली लागू। पुराने LOC 120 दिनों तक यूज हो सकते हैं।
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव (SEBI के 2026 प्लान में)
- KYC और सिक्योरिटी: सख्त पीरियोडिक री-वेरिफिकेशन, Aadhaar-PAN लिंकिंग अनिवार्य, फ्रॉड रोकने के लिए।
- नॉमिनेशन: सभी डेमैट अकाउंट्स में नॉमिनेशन या “नॉन-नॉमिनेशन” डिक्लेयरेशन जरूरी।
- ओवरऑल इम्पैक्ट: ये बदलाव डेमैट होल्डर्स (खासकर MF और पुराने शेयर वाले) की जिंदगी आसान बनाएंगे। पेपरलेस, फास्टर और सुरक्षित निवेश।
ये नियम SEBI के “Ease of Doing Investment” कैम्पेन का हिस्सा हैं। अगर ये फाइनल हो गए तो मिलियन निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होगा – कम झंझट, ज्यादा कंट्रोल।


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