यह शीर्षक आज तक (AajTak) की एक हालिया ओपिनियन-एनालिसिस स्टोरी से लिया गया है, जो 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित हुई। यह लेख भारतीय वामपंथी दलों (मुख्य रूप से CPI और CPM) और कांग्रेस के बीच के गठबंधन को “आत्मघाती” करार देता है, जिसमें दावा किया गया है कि कांग्रेस से की गई दोस्ती ने लेफ्ट पार्टियों को काफी नुकसान पहुंचाया है। लेख में कहा गया है कि यह रिश्ता अब लेफ्ट के लिए “गले का फंदा” बन चुका है, क्योंकि इससे उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है और वे हाशिए पर पहुंच गए हैं।
मुख्य बिंदु और बैकग्राउंड
लेख के अनुसार, लेफ्ट पार्टियां (CPI(M), CPI आदि) पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ीं, लेकिन इसका फायदा कांग्रेस को ज्यादा हुआ, जबकि लेफ्ट की स्थिति और खराब हुई। अब स्थिति यह है कि:
- पश्चिम बंगाल में: कांग्रेस ने लेफ्ट फ्रंट के साथ गठबंधन तोड़ दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में वे अकेले ही लड़ेंगे और सभी सीटों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ममता बनर्जी के खिलाफ उतरेंगे। इससे लेफ्ट को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि बंगाल में उनका आधार पहले से ही कमजोर हो चुका है (2011 से TMC सत्ता में है)। कांग्रेस का यह फैसला लेफ्ट को अलग-थलग कर देता है, और दोनों पार्टियां एक-दूसरे को “बोझ” मान रही हैं।
- केरल में: लेफ्ट (LDF, जिसमें CPM प्रमुख है) अपना आखिरी मजबूत गढ़ बचाने की जद्दोजहद में है। यहां भी कांग्रेस (UDF) के साथ पुराने गठबंधनों की यादें हैं, लेकिन अब लेफ्ट खुद को अकेला महसूस कर रहा है। लेख में कहा गया है कि लेफ्ट पार्टियां अब अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं।
लेफ्ट की दुविधा
- लेफ्ट नेताओं को समझ नहीं आ रहा कि उनका असली दुश्मन भाजपा है या कांग्रेस।
- कांग्रेस अब खुद को “नया वामदल” (नया लेफ्ट) के रूप में पेश कर रही है, जबकि असली लेफ्ट पार्टियां विचारधारा, नेतृत्व और एजेंडे के संकट में फंसी हैं।
- गठबंधन से लेफ्ट का वोट बैंक और संगठन कमजोर हुआ, क्योंकि कांग्रेस के साथ रहने से उनकी अलग पहचान धूमिल हो गई।
विस्तृत विश्लेषण
यह लेख राजनीतिक विश्लेषण है, जो बताता है कि कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन (जैसे INDIA ब्लॉक या राज्य स्तर पर) ने लेफ्ट को ज्यादा फायदा नहीं दिया। बल्कि, कांग्रेस ने लेफ्ट के वोटर बेस का फायदा उठाया, लेकिन लेफ्ट की सीटें और प्रभाव घटता गया। अब 2026 के चुनावों (बंगाल, केरल आदि) में यह रिश्ता टूटने की कगार पर है।
- बंगाल में कांग्रेस का अकेले लड़ने का फैसला लेफ्ट के लिए “आत्मघाती” साबित हो सकता है, क्योंकि वोट बंटवारा TMC और BJP को फायदा पहुंचा सकता है।
- लेफ्ट अब हाशिए पर है, और उनके सामने अस्तित्व का संकट है।
यह स्टोरी आज तक की वेबसाइट पर उपलब्ध है और सोशल मीडिया (X, Instagram, Facebook) पर भी वायरल हो रही है। यह ओपिनियन पीस है, जो वामपंथी दलों की गिरावट पर केंद्रित है।


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