6 जनवरी 2026: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय खेल प्रशासन की प्रमुख हस्ती सुरेश कलमाड़ी का आज तड़के लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। उनके कार्यालय से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, कलमाड़ी ने पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में सुबह करीब 3:30 बजे अंतिम सांस ली। जन्म 1 मई 1944 को हुआ था।
अंतिम संस्कार की व्यवस्था
- उनका पार्थिव शरीर पुणे के एरंडवाने स्थित कलमाड़ी हाउस में दोपहर 2 बजे तक अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।
- अंतिम संस्कार दोपहर 3:30 बजे वैकुंठ श्मशान भूमि (नवी पेठ, पुणे) में किया जाएगा।
परिवार में उनकी पत्नी, पुत्र और पुत्रवधू, दो विवाहित पुत्रियां, दामाद तथा पोते-पोतियां शेष हैं।
राजनीतिक और खेल करियर की झलक
सुरेश कलमाड़ी भारतीय राजनीति और खेल जगत की एक प्रमुख शख्सियत थे:
- पुणे से कई बार लोकसभा सांसद चुने गए।
- पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार में रेलवे राज्य मंत्री रहे (1995-1996)।
- भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे (1996-2012)।
- 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स की आयोजन समिति के चेयरमैन थे, जिसने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा खेल आयोजन कराने का गौरव दिलाया।
- पुणे में 1994 नेशनल गेम्स और 2008 कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन रहते हुए पुणे फेस्टिवल की शुरुआत की।
विवादों का साया
कलमाड़ी का करियर विवादों से अछूता नहीं रहा। 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे, जिसमें अनुबंधों में अनियमितताएं और वित्तीय हेराफेरी के दावे शामिल थे।
- अप्रैल 2011 में CBI ने उन्हें गिरफ्तार किया और वे तिहाड़ जेल में 10 महीने रहे।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला चला, लेकिन अप्रैल 2025 में दिल्ली की एक अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली।
- इन आरोपों के कारण कांग्रेस ने उनकी सदस्यता निलंबित कर दी थी और IOA से भी पद छोड़ना पड़ा।
हाल के वर्षों में वे लंबी बीमारी के कारण सक्रिय राजनीति से दूर रहे। सूत्रों के अनुसार, उनकी तबीयत बिगड़ने पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी उनसे मुलाकात की थी।
शोक संदेश
कलमाड़ी के निधन पर विभिन्न दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों के नेताओं ने उनके खेल और सार्वजनिक जीवन में योगदान को याद किया।
सुरेश कलमाड़ी का जाना भारतीय खेल प्रशासन और महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े अध्याय का अंत है। उनकी विरासत उपलब्धियों और विवादों दोनों से जुड़ी रहेगी।


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