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China's downfall in the rare earth game is certain! The US has sent a special invite to India, this is the plan!

रेयर अर्थ मिनरल्स में चीन का पतन तय! अमेरिका ने भारत को भेजा खास बुलावा, ये है प्लान!

10 जनवरी 2026 की ताजा खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने चीन की रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Elements – REE) पर दबदबे को तोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाया है। यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में कन्फर्म किया कि G7 फाइनेंस मिनिस्टर्स की बैठक (12 जनवरी 2026, वॉशिंगटन) में ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत को भी स्पेशल इनविटेशन भेजा गया है। यह बैठक क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ की सप्लाई चेन पर फोकस करेगी, जहां चीन की 90%+ प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग की मोनोपॉली को चैलेंज करने की रणनीति बनेगी।

चीन की दबदबे की हकीकत

  • चीन दुनिया का 70% माइनिंग, 90% सेपरेशन/प्रोसेसिंग, और 93% मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग कंट्रोल करता है।
  • 2025 में चीन ने कई बार एक्सपोर्ट कंट्रोल्स लगाए (जैसे अप्रैल और अक्टूबर में), जिससे EV, डिफेंस, सेमीकंडक्टर और क्लीन एनर्जी इंडस्ट्रीज में शॉर्टेज आई।
  • हालांकि ट्रंप-शी मीटिंग (अक्टूबर 2025) के बाद कुछ कंट्रोल्स 1 साल के लिए सस्पेंड हुए, लेकिन चीन की पकड़ अभी भी मजबूत है।
  • 2030 तक भी चीन की रिफाइनिंग में 76% शेयर रहने का अनुमान है, लेकिन ग्लोबल एफर्ट्स से धीरे-धीरे कमी आ रही है।

अमेरिका का प्लान: भारत को क्यों बुलाया?

अमेरिका G7 (US, UK, Japan, France, Germany, Italy, Canada + EU) के साथ मिलकर प्राइस फ्लोर्स (न्यूनतम मूल्य), इन्वेस्टमेंट्स, और अल्टरनेटिव सप्लाई चेन बनाने पर चर्चा करेगा। भारत को इनवाइट करने के पीछे मुख्य वजहें:

  • भारत के पास बड़े रेयर अर्थ रिजर्व्स हैं (दुनिया में 6%+), लेकिन अभी ज्यादातर रॉ मटेरियल एक्सपोर्ट होता है।
  • भारत Mineral Security Partnership (MSP) का सदस्य है (2023 से), और US-India TRUST (Transforming the Relationship Utilizing Strategic Technology) + iCET के तहत पहले से क्रिटिकल मिनरल्स पर कोऑपरेशन चल रहा है।
  • 2025 में US-India ने रिसाइक्लिंग, रिकवरी, और हाई-वैल्यू प्रोसेसिंग पर MoU साइन किए।
  • भारत की National Critical Minerals Mission (₹34,300 करोड़) और रेयर अर्थ मैग्नेट प्रोडक्शन स्कीम (₹7,280 करोड़) से डोमेस्टिक कैपेबिलिटी बढ़ रही है।
  • G7 बैठक में भारत को शामिल करके अमेरिका चाहता है कि भारत प्रोसेसिंग हब बने — रॉ मटेरियल से मैग्नेट्स/कंपोनेंट्स तक वैल्यू ऐड करे, ताकि चीन पर निर्भरता कम हो।
  • यह इंडो-पैसिफिक में Quad Critical Minerals Initiative और Pax Silica जैसे इनीशिएटिव्स को मजबूत करेगा।

क्या वाकई चीन का ‘पतन’ तय है?

  • हां, लेकिन धीरे-धीरे: US, EU, ऑस्ट्रेलिया, जापान, और अब भारत जैसे देश मिलकर डाइवर्सिफिकेशन कर रहे हैं। US ने MP Materials जैसी कंपनियों में इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स किए, और 2027 तक चीन पर डिपेंडेंसी काफी कम करने का टारगेट है।
  • नहीं, अभी नहीं: चीन की प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी और स्केल इतनी बड़ी है कि पूरी तरह रिप्लेसमेंट में 5-10 साल लगेंगे। लेकिन G7+ भारत जैसे पार्टनर्स से चीन का लेवरेज कमजोर पड़ रहा है।
  • भारत के लिए यह बड़ा अवसर है — डिफेंस, EV, सेमीकंडक्टर में सेल्फ-रिलायंस बढ़ेगी, और ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत पोजिशन मिलेगी।

यह बैठक 12 जनवरी को होगी, जहां प्राइस फ्लोर्स, जॉइंट इन्वेस्टमेंट्स, और इंडिया-US-ऑस्ट्रेलिया ट्राइलेटरल कोऑपरेशन पर बड़े ऐलान हो सकते हैं। चीन की ‘खनिज-बादशाहत’ को चुनौती देने का यह सबसे बड़ा ग्लोबल मूव है — और भारत इसमें सेंट्रल प्लेयर बन रहा है! 🚀🇮🇳🇺🇸

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