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Big statement from Penguin after the FIR: 'Narvane's book neither got published nor sold!' Now the question is – where did that PDF come from?

FIR के बाद पेंगुइन का बड़ा बयान: ‘नरवणे की किताब न छपी न बिकी!’ अब सवाल- वो PDF कहां से आया?

नई दिल्ली, 10 फरवरी 2026: पूर्व भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) को लेकर चल रहे विवाद में प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट बयान जारी किया है। कंपनी ने कहा है कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है, न ही इसकी कोई प्रति छपी है, बिकी है या बांटी गई है। यह बयान दिल्ली पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने के बाद आया है, जिसमें किताब के अनधिकृत प्रसार की जांच की जा रही है।

विवाद की शुरुआत और संसद में हंगामा

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पिछले सप्ताह संसद परिसर में इस किताब की एक हार्डकॉपी दिखाई और इसके कुछ अंशों का हवाला देकर सरकार पर सवाल उठाने की कोशिश की। किताब में कथित तौर पर 2017 के डोकलाम विवाद, 2020 के गलवान घाटी संघर्ष और भारत-चीन सीमा पर राजनीतिक-सैन्य स्तर की चर्चाओं का जिक्र है। राहुल गांधी ने दावा किया कि किताब में कुछ संवेदनशील जानकारियां हैं जो सरकार के लिए असुविधाजनक हो सकती हैं।

हालांकि, किताब को अभी तक रक्षा मंत्रालय या संबंधित अधिकारियों से आवश्यक मंजूरी नहीं मिली है, जिसके कारण यह अप्रकाशित बनी हुई है। पूर्व सेना प्रमुखों की किताबों में अक्सर ऐसी मंजूरी की जरूरत पड़ती है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां सार्वजनिक न हों।

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का आधिकारिक बयान

सोमवार को पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) और मीडिया को जारी बयान में कहा:

“हाल की सार्वजनिक चर्चा और मीडिया रिपोर्ट्स के संदर्भ में, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया स्पष्ट करना चाहता है कि हम जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के एकमात्र प्रकाशन अधिकार रखते हैं। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि किताब अभी प्रकाशन प्रक्रिया में नहीं गई है। किताब की कोई भी प्रति—चाहे प्रिंट रूप में हो या डिजिटल—हमारी ओर से प्रकाशित, वितरित, बेची या जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है।”

कंपनी ने आगे चेतावनी दी कि यदि किताब की कोई भी प्रति (पूरी या आंशिक), प्रिंट, डिजिटल, PDF या किसी अन्य फॉर्मेट में ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, तो यह उनके कॉपीराइट का उल्लंघन है। ऐसे प्रसार को तुरंत रोका जाना चाहिए और कंपनी कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार रखती है।

दिल्ली पुलिस की FIR और जांच

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सोमवार को ही इस मामले में FIR दर्ज की। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप्स और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर किताब के अंश या पूरी प्रति (संभवतः प्री-प्रिंट मैन्युस्क्रिप्ट या PDF) वायरल हो रही है। यह प्रसार बिना सरकारी मंजूरी के हो रहा है, जो प्रकाशन नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा के उल्लंघन का मामला बन सकता है। जांच में लीक का स्रोत, प्रसार का तरीका और इसमें शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सवाल

राहुल गांधी ने पेंगुइन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं या पेंगुइन। उन्होंने दावा किया कि जनरल नरवणे ने 2023 में खुद किताब का लिंक शेयर किया था और यह अमेजन पर उपलब्ध थी। कांग्रेस नेता ने कहा, “मुझे पूर्व सेना प्रमुख पर भरोसा है, वे झूठ नहीं बोलेंगे।”

दूसरी ओर, कई रिपोर्ट्स में सवाल उठ रहे हैं कि अगर किताब आधिकारिक तौर पर प्रकाशित नहीं हुई, तो राहुल गांधी के पास उसकी कॉपी कैसे आई? क्या यह लीक मैन्युस्क्रिप्ट थी या कोई अनधिकृत प्रति?

जनरल नरवणे (सेवानिवृत्त) ने अभी तक इस बयान पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। किताब 2024 से प्रकाशन के लिए लंबित है, लेकिन संवेदनशील सामग्री के कारण देरी हो रही है।

यह मामला अब राजनीतिक, कानूनी और प्रकाशन जगत के बीच गहरा विवाद बन चुका है, जहां कॉपीराइट, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप एक साथ जुड़ गए हैं। आगे जांच से लीक के पीछे की सच्चाई सामने आ सकती है।

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