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Balochistan: The betrayal of 1948 is still alive, why is Pakistan moving towards breakup forgetting Jinnah's promise?

बलूचिस्तान: 1948 का धोखा आज भी जिंदा, जिन्ना का वादा भूलकर पाकिस्तान टूटने की ओर क्यों बढ़ रहा?

नई दिल्ली/क्वेटा, 13 फरवरी 2026

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है (क्षेत्रफल 44% से ज्यादा), लेकिन आबादी में सबसे छोटा (करीब 12 मिलियन) और सबसे गरीब। यहां के लोग दशकों से कहते आ रहे हैं कि 1947-48 में बलूचिस्तान का पाकिस्तान में विलय धोखे और जबरदस्ती से हुआ था। मोहम्मद अली जिन्ना ने खुद 1947 में बलूचिस्तान के लिए स्वायत्तता और अलग संविधान का वादा किया था, लेकिन बाद में पाकिस्तान ने इसे नजरअंदाज कर दिया। आज बलूचिस्तान फिर से विद्रोह की आग में जल रहा है – और कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो पाकिस्तान टूटने की कगार पर पहुंच सकता है।

जिन्ना का वादा और विलय की कहानी

  • 1947 में स्थिति: ब्रिटिश भारत के समय बलूचिस्तान तीन हिस्सों में बंटा था – ब्रिटिश बलूचिस्तान, कलात रियासत (सबसे बड़ी), और छोटी रियासतें (लस्बेला, मकरान, खारान)।
  • जिन्ना का वादा: 1947 में जिन्ना ने कलात के खान अहमद यार खान से कहा था कि बलूचिस्तान को पूर्ण स्वायत्तता मिलेगी, अपना संविधान होगा, और पाकिस्तान में शामिल होने पर भी उसकी संप्रभुता बनी रहेगी। जिन्ना ने कलात को “स्वतंत्र राज्य” के रूप में मान्यता देने की बात भी कही थी।
  • 15 अगस्त 1947: कलात ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया और अपना झंडा फहराया।
  • धोखा और जबरदस्ती:
  • 1947 के अंत में पाकिस्तान ने दबाव बनाया।
  • 27 मार्च 1948 को पाकिस्तानी सेना ने कलात पर कब्जा कर लिया। खान को बंदूक के बल पर हस्ताक्षर करवाए गए।
  • बलूच नेताओं का कहना है कि ये विलय “जबरन” और “धोखे” से हुआ – क्योंकि जिन्ना का वादा पूरा नहीं किया गया।
  • 1948 में पहला बलूच विद्रोह शुरू हुआ, जिसे पाकिस्तान ने दबा दिया।

आज बलूचिस्तान में क्या हो रहा है?

  • विद्रोह का नया दौर: 2004 से लगातार बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA), बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) और अन्य ग्रुप्स सक्रिय हैं।
  • 2024-2026 में हिंसा:
  • 2024 में 500+ हमले, 700+ मौतें (सुरक्षा बल और नागरिक)।
  • 2025 में चीनी इंजीनियरों और CPEC प्रोजेक्ट्स पर हमले बढ़े।
  • जनवरी-फरवरी 2026 में क्वेटा, गुश्की, पंजगुर में बम धमाके और टारगेट किलिंग।
  • मुख्य मांगें:
  • संसाधनों (गैस, खनिज, तेल) पर स्थानीय अधिकार।
  • CPEC से बलूचों को नुकसान (जमीन छीनी जा रही है)।
  • बलूच गायब लोगों (enforced disappearances) का हिसाब।
  • स्वायत्तता या अलगाव।

पाकिस्तान टूटने की कगार पर क्यों?

  • आर्थिक असमानता: बलूचिस्तान में गरीबी दर 70%+, बेरोजगारी 40%। गैस निकलती है लेकिन बलूचों को फायदा नहीं।
  • सैन्य दमन: पाकिस्तान ने हजारों बलूच युवकों को गायब किया (Amnesty International रिपोर्ट: 5,000+ मामले)।
  • चीनी प्रोजेक्ट्स का विरोध: CPEC (ग्वादर पोर्ट) से बलूचों को डर है कि उनकी जमीन और संसाधन छीन लिए जाएंगे।
  • अलगाववादी भावना: युवा पीढ़ी अब “बलूचिस्तान” को अलग देश मानती है। सोशल मीडिया पर #FreeBalochistan ट्रेंड करता रहता है।
  • पाकिस्तान की कमजोरी: आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता, और सेना पर बढ़ता दबाव। अगर बलूचिस्तान में बड़ा विद्रोह हुआ तो सिंध और पश्तून क्षेत्र भी प्रभावित हो सकते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय नजर: भारत, अमेरिका और यूरोपीय देश बलूच मानवाधिकार मुद्दे उठा रहे हैं।

निष्कर्ष

जिन्ना का वादा अधूरा रह गया, और बलूचिस्तान में धोखे का दर्द आज भी जिंदा है। अगर पाकिस्तान ने स्थानीय लोगों के अधिकार नहीं दिए, संसाधनों में हिस्सेदारी नहीं दी, और दमन जारी रखा तो बलूचिस्तान का अलगाववाद और तेज होगा – और पाकिस्तान के टूटने का खतरा बढ़ जाएगा।

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