जम्मू-कश्मीर विधानसभा में इन दिनों पीर पंजाल (Pir Panjal) को लेकर ऐसा हंगामा मचा है कि पूरा सदन 15 मिनट के लिए स्थगित हो गया, MLAs ने विरोध प्रदर्शन किया, और बाहर सड़कों पर भी लोग सड़कें जाम कर अपील कर रहे हैं। टाइटल में लिखा “नया ‘रायता'” और “POK” का जिक्र इसी राजनीतिक विवाद को इंगित करता है, जहां कुछ लोग इसे क्षेत्रीय पहचान (regional identity) से जोड़कर देख रहे हैं, और कुछ इसे विभाजनकारी बता रहे हैं – खासकर LoC के पास होने और PoK (Pakistan Occupied Kashmir) से सटे होने के कारण।
क्या है पूरा मामला?
फरवरी 2026 में चल रही बजट सेशन के दौरान BJP के नेता और Leader of Opposition (LoP) सुनील शर्मा ने एक इंटरव्यू में कहा कि “जम्मू-कश्मीर में कोई ‘पीर पंजाल’ नाम का क्षेत्र नहीं है”। उन्होंने कहा कि राजौरी और पुंछ जिलों को “पीर पंजाल क्षेत्र” कहना गलत है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर एक अविभाजित इकाई है, और ऐसे नाम से अलग क्षेत्रीय पहचान बनाने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने आगे कहा कि यह “Panchal Dev Ishtan” पर्वतमाला है, और कोई “खिता” (क्षेत्र) नहीं है। यह बयान सुनते ही सदन में तूफान आ गया!
- कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के MLAs, खासकर राजौरी-पुंछ से, भड़क गए। कांग्रेस MLA इफ्तिखार अहमद ने कहा कि यह लोगों की भावनाओं पर हमला है और सुनील शर्मा को माफी मांगनी चाहिए।
- सदन में “पीर पंजाल जिंदाबाद” के नारे लगे, कई MLAs खड़े होकर विरोध जताया।
- स्पीकर ने सदन को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया।
- विधानसभा के बाहर राजौरी-पुंछ के कई MLAs ने प्रदर्शन किया, अपील की कि LoP माफी मांगें।
- डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी और अन्य मंत्रियों ने भी बयान को “अपमानजनक” बताया।
पीर पंजाल क्या है और क्यों इतना संवेदनशील?
पीर पंजाल हिमालय की एक प्रमुख पर्वतमाला है, जो जम्मू-कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में फैली हुई है। इसमें मुख्य रूप से राजौरी और पुंछ जिले आते हैं (कभी-कभी रियासी, उधमपुर के कुछ हिस्से भी)। यह क्षेत्र LoC (Line of Control) से सटा हुआ है, यानी POK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) के ठीक सामने।
- यहां की आबादी में मुस्लिम बहुल है, और यह बॉर्डर एरिया होने से आतंकवाद, सेना की मौजूदगी, और विकास की कमी जैसी समस्याओं से जूझता रहा है।
- लोग इसे “पीर पंजाल क्षेत्र” कहते हैं क्योंकि यह पहाड़ी रेंज के नाम पर जाना जाता है – जैसे कश्मीर वैली, जम्मू रीजन, या चेनाब वैली।
- हाल के सालों में यहां आतंकवाद का नया केंद्र बनने की बातें आई हैं (पहले कश्मीर वैली में ज्यादा था, अब दक्षिण की तरफ शिफ्ट)।
- विकास की मांग: लोग अलग डिवीजन (divisional status), NLU (National Law University), बेहतर कनेक्टिविटी (जैसे मुगल रोड टनल) मांगते हैं।
क्यों मचा हंगामा? राजनीतिक कोण
- NC-Congress का आरोप: सुनील शर्मा ने क्षेत्र की पहचान को नकारकर लोगों का अपमान किया। यह 70 साल से भेदभाव झेल रहे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
- BJP का पक्ष: सुनील शर्मा ने सफाई दी कि वे जम्मू-कश्मीर को एकजुट देखना चाहते हैं, अलग-अलग “खिता” बनाने से विभाजन बढ़ेगा। कुछ BJP नेता इसे कांग्रेस-NC द्वारा सांप्रदायिक आधार पर जम्मू को बांटने की कोशिश बता रहे हैं।
- POK कनेक्शन: क्षेत्र LoC के पास होने से कुछ लोग इसे “POK से जुड़ा” देखते हैं, और नाम पर विवाद को “विभाजनकारी” या “पाकिस्तान समर्थक” एंगल से भी जोड़ा जा रहा है (हालांकि मुख्य मुद्दा पहचान और विकास का है)।
- यह विवाद बजट सेशन में आया, जहां डिवीजन स्टेटस और NLU जैसे मुद्दे चर्चा में थे।
अब क्या स्थिति?
- सुनील शर्मा ने अभी तक सार्वजनिक माफी नहीं मांगी, बल्कि अपना स्टैंड दोहराया।
- प्रदर्शन जारी हैं, राजौरी-पुंछ में लोग सड़कों पर उतरे।
- यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीति को उजागर कर रहा है – जम्मू vs कश्मीर, पहाड़ी vs मैदानी, और एकता vs अलग पहचान।
कुल मिलाकर, यह “रायता” राजनीतिक बयानबाजी से शुरू हुआ, लेकिन अब यह क्षेत्रीय भावनाओं और विकास की मांगों का बड़ा मुद्दा बन गया है।


More Stories
भीख का कटोरा भी छोटा हो गया? पाकिस्तान पर कर्ज का पहाड़… अब कमाई का आधा सिर्फ ब्याज में!
तारिक रहमान की सत्ता… भारत के साथ दोस्ती या जंग? मेनिफेस्टो में छिपा खतरनाक संकेत!
यमुनानगर चौक पर सरकारी बोलेरो से हमला: ड्राइवर सुरेंद्र को मारा-पीटा, पैसे छीने