नई दिल्ली/वाशिंगटन, 7 फरवरी 2026 — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश जारी कर भारत से आयातित सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को हटा दिया। यह टैरिफ अगस्त 2025 में भारत की रूसी तेल खरीद के कारण लगाया गया था। आदेश के अनुसार, यह बदलाव आज (7 फरवरी 2026) सुबह 12:01 बजे (वाशिंगटन समय) से प्रभावी हो गया है।
इस कदम से भारत-अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में बड़ा सुधार हुआ है, जो एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Framework) का हिस्सा है। भारत ने रूस से तेल आयात रोकने (सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से), अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाने और रक्षा सहयोग विस्तार की प्रतिबद्धता जताई है।
मुख्य समझौते के बिंदु
- टैरिफ में कमी:
- अतिरिक्त 25% टैरिफ हटने से भारतीय सामानों पर कुल प्रभावी टैरिफ अब 18% रह गया है (पहले 50% तक था)।
- इससे टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, फुटवेयर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, जेम्स एंड डायमंड्स, जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, होम डेकोर, आर्टिसनल प्रोडक्ट्स, एयरक्राफ्ट पार्ट्स और कुछ मशीनरी को बड़ा फायदा होगा।
- भारत की खरीद प्रतिबद्धता:
- अगले 5 वर्षों में भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर (लगभग 42-45 लाख करोड़ रुपये) के सामान खरीदेगा।
- इसमें शामिल: ऊर्जा उत्पाद (तेल, गैस, कोकिंग कोल), एयरक्राफ्ट और पार्ट्स (जैसे बोइंग विमान), प्रीशियस मेटल्स, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स (AI GPUs, डेटा सेंटर सामान), कृषि उत्पाद आदि।
- कुछ रिपोर्ट्स में बोइंग एयरक्राफ्ट के लिए 70-80 अरब डॉलर का हिस्सा बताया गया है।
- रूस से तेल आयात पर प्रतिबद्धता:
- भारत ने रूसी तेल के सीधे या अप्रत्यक्ष आयात को रोकने का वादा किया है।
- ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि भारत फिर रूस से तेल खरीदता है, तो टैरिफ दोबारा लगाए जा सकते हैं।
- भारत ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अमेरिकी और अन्य स्रोतों (जैसे वेनेजुएला) से आपूर्ति बढ़ाएगा, लेकिन पूर्ण निर्भरता पर स्पष्टता बाकी है।
- भारत की तरफ से राहत:
- भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, कृषि उत्पादों (ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेंस, रेड सॉरघम, ट्री नट्स, फल, सोयाबीन ऑयल, वाइन, स्पिरिट्स आदि) पर टैरिफ खत्म या कम करेगा।
- संवेदनशील कृषि क्षेत्र (मक्का, गेहूं, चावल, सोया, डेयरी, पोल्ट्री, एथेनॉल आदि) पर भारतीय किसानों की सुरक्षा बरकरार रहेगी।
- 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार खुलना:
- वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों—खासकर MSMEs, किसानों, मछुआरों—के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर (अमेरिकी अर्थव्यवस्था का आकार) का बाजार खोलेगा।
- इससे महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नौकरियां पैदा होंगी।
पृष्ठभूमि और समयरेखा
- अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण भारत की रूसी तेल खरीद पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था (कुल 50% तक)।
- फरवरी 2025 में शुरू हुई BTA (Bilateral Trade Agreement) वार्ताओं के बाद फरवरी 2026 में अंतरिम फ्रेमवर्क घोषित हुआ।
- ट्रंप ने 2 फरवरी को Truth Social पर घोषणा की, मोदी ने X पर स्वागत किया।
- पूर्ण BTA मार्च 2026 तक संभव, जिसमें और बाजार पहुंच होगी।
प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
- भारतीय निर्यातकों के लिए: टैरिफ राहत से निर्यात में उछाल, विशेषकर टेक्सटाइल, फार्मा, रसायन, आभूषण, झींगा आदि सेक्टर में।
- MSMEs और किसानों के लिए: गोयल के अनुसार, ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा।
- अमेरिका के लिए: भारत में बड़ा बाजार, रूस पर दबाव, सप्लाई चेन विविधीकरण, ऊर्जा/टेक निर्यात बढ़ेगा।
- चिंताएं: 500 अरब डॉलर की खरीद कितनी बाध्यकारी/व्यावहारिक है, यह स्पष्ट नहीं। रूसी तेल पर भारत की निर्भरता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कुछ विशेषज्ञ इसे महत्वाकांक्षी मानते हैं (2024 में भारत-अमेरिका व्यापार ~83 अरब डॉलर था)।
ट्रंप का बयान (कार्यकारी आदेश): “भारत ने रूसी तेल आयात रोकने, अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदने और 10 वर्षों में रक्षा सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।”
पीयूष गोयल: “यह फ्रेमवर्क MSMEs, किसानों और मछुआरों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार खोलेगा, लाखों नौकरियां पैदा करेगा।”
यह समझौता भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करता है, लेकिन पूर्ण लागूकरण, रूसी तेल नीति और BTA पर नजर बनी रहेगी। (स्रोत: Bloomberg, Reuters, The Hindu, Business Standard, India Today, White House, Economic Times आदि, 6-7 फरवरी 2026 अपडेट्स)


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