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America is ready to sell Venezuela's oil to India, but with a strict condition from the Trump administration!

अमेरिका वेनेजुएला का तेल भारत को बेचने को तैयार, लेकिन ट्रंप प्रशासन की एक सख्त शर्त के साथ!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही वेनेजुएला पर बड़ा एक्शन हो चुका है। जनवरी 2026 की पहली सप्ताह में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में छापेमारी की, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया और उन्हें अमेरिका ले जाया गया। ट्रंप प्रशासन ने इसे “भ्रष्टाचार और ड्रग तस्करी के खिलाफ निर्णायक कदम” बताया है। अब वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार (दुनिया के सबसे बड़े क्रूड ऑयल रिजर्व में से एक) पर अमेरिका का प्रत्यक्ष नियंत्रण है।

यहां प्रमुख अपडेट्स और डिटेल्स:

1. अमेरिका का तेल नियंत्रण प्लान

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रमुख अमेरिकी ऑयल कंपनियों (ExxonMobil, Chevron आदि) के CEOs से मीटिंग की। उन्होंने $100 बिलियन (लगभग 8.5 लाख करोड़ रुपये) का निवेश मांगा है ताकि वेनेजुएला की “सड़ चुकी” ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक किया जा सके।

ट्रंप का दावा:

  • वेनेजुएला 30-50 मिलियन बैरल (करीब 5 करोड़ बैरल) हाई-क्वालिटी क्रूड ऑयल अमेरिका को सौंपेगा।
  • यह तेल मार्केट रेट पर बेचा जाएगा, लेकिन राजस्व पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल रहेगा – अनिश्चित काल तक।
  • ऊर्जा मंत्री क्रिस्टोफर राइट ने कहा: “हम वेनेजुएला के तेल की बिक्री और फंड्स को ऐसे अकाउंट्स में रखेंगे जो वेनेजुएला के लोगों को फायदा पहुंचाएं, न कि भ्रष्टाचार या विरोधी देशों को।”

2. वेनेजुएला के तेल भंडार – Orinoco Belt की ताकत

वेनेजुएला के Orinoco Oil Belt में दुनिया के सबसे बड़े हेवी क्रूड रिजर्व हैं। लेकिन सालों की सैंक्शंस, भ्रष्टाचार और रखरखाव की कमी से प्रोडक्शन गिरकर 7-8 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। अमेरिका अब इसे दोबारा 20 लाख बैरल/दिन तक ले जाना चाहता है।

यहां Orinoco Belt के ऑयल फील्ड्स और मैप की तस्वीरें:

ये मैप और फील्ड्स दिखाते हैं कि कितना बड़ा रिजर्व है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार बदल सकता है।

3. भारत के लिए खास अपडेट – वो “एक शर्त” क्या है?

ट्रंप प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी ने इंडिया टुडे और IANS को बताया कि भारत को वेनेजुएला का तेल खरीदने की पूरी अनुमति मिल सकती है। लेकिन शर्त साफ है:

  • सारा सौदा वाशिंगटन-कंट्रोल्ड फ्रेमवर्क के तहत होगा।
  • भारत सीधे PDVSA (वेनेजुएला की स्टेट ऑयल कंपनी) से नहीं, बल्कि अमेरिकी सरकार द्वारा मैनेज किए गए चैनल से तेल खरीदेगा।
  • पेमेंट, ट्रांसपोर्ट और राजस्व पर अमेरिका की निगरानी रहेगी।

यह भारत के लिए बड़ा मौका है क्योंकि:

  • भारत रूसी तेल पर ज्यादा निर्भर है, और ट्रंप रूस के तेल पर सख्त हैं (टैरिफ की धमकी)।
  • वेनेजुएला का हेवी क्रूड भारत की रिफाइनरियों (जैसे रिलायंस जामनगर) के लिए परफेक्ट है।

रिलायंस जैसी कंपनियां पहले से अमेरिकी लाइसेंस के लिए बात कर रही हैं।

यहां भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी जामनगर की तस्वीरें, जहां वेनेजुएला का क्रूड प्रोसेस हो सकता है:

Trump's Venezuela Move A $17 Trillion Reset of Global ...

4. मादुरो का क्या हुआ? और वैश्विक रिएक्शन

मादुरो को अमेरिका ले जाया गया है। ट्रंप ने उन्हें “ड्रग लॉर्ड और भ्रष्ट” बताया।

रिएक्शन:

  • चीन और रूस ने विरोध किया, इसे “साम्राज्यवाद” कहा।
  • कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह अमेरिका का “ऊर्जा साम्राज्यवाद” है।
  • तेल कीमतें $50/बैरल तक लाने का ट्रंप का लक्ष्य – अगर सफल हुआ तो ग्लोबल इकोनॉमी को फायदा।

यह स्थिति तेजी से बदल रही है। अमेरिका का प्लान है कि वेनेजुएला का तेल अब “अमेरिकी हितों” के तहत बेचा जाए। भारत के लिए यह ऊर्जा विविधता का सुनहरा मौका है, लेकिन अमेरिकी शर्तों को मानना होगा।

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