वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही रक्षा क्षेत्र में बड़ा दांव खेला है। 7 जनवरी 2026 को ट्रंप ने घोषणा की कि 2027 के लिए अमेरिकी डिफेंस बजट को $1.5 ट्रिलियन (लगभग 125 लाख करोड़ रुपये) किया जाए। यह 2026 के $901 बिलियन बजट से करीब 66% (या $599 बिलियन) की बढ़ोतरी है। ट्रंप ने इसे “ड्रीम मिलिट्री” बनाने और “खतरनाक समय” में अमेरिका को मजबूत करने का जरिया बताया। यह राशि भारत की अनुमानित 2026 GDP ($4.51 ट्रिलियन) का करीब 33% और कुछ प्रोजेक्शंस में $4.2 ट्रिलियन का 36% के बराबर है, जो अमेरिकी सैन्य खर्च की विशालता को उजागर करती है।
घोषणा का विवरण और पृष्ठभूमि
- कब और कैसे हुई घोषणा?
- 7 जनवरी 2026 को ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट किया और व्हाइट हाउस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, “ये बहुत खराब और खतरनाक समय हैं। हमें दुनिया की सबसे मजबूत सेना चाहिए। 2027 का मिलिट्री बजट $1 ट्रिलियन नहीं, बल्कि $1.5 ट्रिलियन होना चाहिए।” यह प्रस्ताव अब कांग्रेस को भेजा जाएगा, जहां FY2027 बजट प्रक्रिया में बहस होगी।
- वर्तमान vs प्रस्तावित बजट:
- FY2026: $901 बिलियन (कांग्रेस द्वारा पास, जिसमें अतिरिक्त $150 बिलियन जोड़ा गया था)।
- FY2027 प्रस्ताव: $1.5 ट्रिलियन (50-66% बढ़ोतरी, विभिन्न रिपोर्ट्स में थोड़ा अंतर)।
- मुख्य क्षेत्र जहां खर्च बढ़ेगा:
- नेवी और एयर फोर्स का विस्तार (नए जहाज, फाइटर जेट्स)।
- ICBMs (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल्स) और बॉम्बर्स का आधुनिकीकरण।
- न्यूक्लियर फोर्सेस के लिए अतिरिक्त फंडिंग।
- ट्रूप्स की सैलरी, ट्रेनिंग और वेलफेयर।
- “गोल्डन डोम” जैसे मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट्स।
- भारत की GDP से तुलना:
- IMF और अन्य प्रोजेक्शंस के अनुसार, भारत की 2026 नॉमिनल GDP करीब $4.51 ट्रिलियन होने का अनुमान है (7.4% ग्रोथ के साथ)।
- $1.5 ट्रिलियन इससे करीब 33% है। कुछ भारतीय मीडिया में इसे 36% बताया जा रहा है (अगर GDP $4.2 ट्रिलियन मानी जाए)।
- यह तुलना सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जो अमेरिका के सैन्य खर्च को भारत की पूरी अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से से जोड़ती है।
कारण: क्यों इतनी बड़ी बढ़ोतरी?
- ट्रंप का तर्क: “ट्रबल्ड एंड डेंजरस टाइम्स” – वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप, ग्रीनलैंड विवाद, कोलंबिया तनाव, रूस-चीन की चुनौतियां और आर्कटिक में प्रतिस्पर्धा।
- ट्रंप ने कहा कि टैरिफ राजस्व और आर्थिक ग्रोथ से यह फंडिंग संभव है। उन्होंने डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स को चेतावनी भी दी कि खर्च कंट्रोल में रखें, वरना रिस्ट्रिक्शंस लगेंगे।
- यह “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा है, जहां ट्रंप NATO सदस्यों से भी ज्यादा योगदान मांग रहे हैं।
आर्थिक और वैश्विक प्रभाव
- अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर: विशेषज्ञों (जैसे CRFB) का कहना है कि यह बढ़ोतरी राष्ट्रीय कर्ज को $5-6 ट्रिलियन तक बढ़ा सकती है। डेमोक्रेट्स ने इसे “फिजूलखर्ची” बताया, जबकि रिपब्लिकन्स में समर्थन मिश्रित है।
- स्टॉक मार्केट: घोषणा के बाद लॉकहीड मार्टिन, बोइंग, रेथियॉन जैसे डिफेंस कंपनियों के शेयर 5-10% उछले।
- वैश्विक हथियार दौड़: चीन ($300 बिलियन+ खर्च), रूस और अन्य देश जवाबी बढ़ोतरी कर सकते हैं। यूरोप में NATO खर्च पर दबाव बढ़ेगा।
- भारत पर असर: भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है। भारत का डिफेंस बजट वर्तमान में $75-80 बिलियन है, जो बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा तेज करेगा।
प्रतिक्रियाएं
- ट्रंप समर्थक: इसे “मजबूत अमेरिका” की जरूरत बताया।
- विपक्ष (डेमोक्रेट्स): “अनावश्यक और कर्ज बढ़ाने वाला”।
- अंतरराष्ट्रीय: चीन ने “साम्राज्यवाद” कहा, रूस ने आलोचना की। यूरोपीय देश चिंतित।
- भारतीय मीडिया: इसे अमेरिकी “वॉर मोड” का संकेत माना, भारत की GDP तुलना पर फोकस।
वर्तमान स्थिति
- 8 जनवरी 2026 तक प्रस्ताव औपचारिक रूप से कांग्रेस में नहीं गया, लेकिन बहस शुरू हो गई है। पास होने पर यह इतिहास का सबसे बड़ा डिफेंस बजट होगा।
- ट्रंप ने कहा कि यह “ड्रीम मिलिट्री” बनाएगा, लेकिन कर्ज और वैश्विक स्थिरता पर सवाल बने हुए हैं।
यह फैसला ट्रंप के आक्रामक विदेश और रक्षा नीति का प्रमुख उदाहरण है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को बदल सकता है।


More Stories
“12 जनवरी तक नहीं हटाए तो…!” – संभल में 8 मकानों पर बुलडोजर की तलवार लटकी, 1700 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर क्या छिपा है राज़?
“अब कभी नहीं छोड़ेगी…” शादी के बाद प्रेमी का वो राज़ जिसने सबको हिला दिया!
बेटे की मौत के बाद अरबपति अनिल अग्रवाल ने लिया चौंकाने वाला फैसला – 75% संपत्ति दान!