बीजिंग/टोक्यो: ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच चीन ने जापान को आर्थिक और सामरिक झटका देते हुए दोहरे उपयोग (dual-use) वाली वस्तुओं के निर्यात पर बड़ा प्रतिबंध लगा दिया है। 6 जनवरी 2026 को चीन के वाणिज्य मंत्रालय (Ministry of Commerce) ने घोषणा की कि जापान के सैन्य उपयोग, सैन्य उपयोगकर्ताओं या जापान की सैन्य क्षमता बढ़ाने वाले किसी भी अंतिम उपयोग के लिए सभी dual-use आइटम्स का निर्यात तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित है। यह कदम जापान की प्रधानमंत्री साना ताकाइची के पिछले साल ताइवान पर दिए बयान का जवाब बताया जा रहा है, जिसमें उन्होंने चीन के संभावित हमले को जापान के लिए “अस्तित्व का खतरा” करार दिया था।
प्रतिबंध का विवरण
- क्या हैं dual-use आइटम्स? ये वे सामान, सॉफ्टवेयर और तकनीकें हैं जो नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल हो सकती हैं। इसमें कुछ रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ मिट्टी तत्व), रसायन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, ड्रोन बनाने की सामग्री, चिप्स और अन्य हाई-टेक कंपोनेंट्स शामिल हैं।
- प्रतिबंध का दायरा:
- जापान की सेना या सैन्य उपयोगकर्ताओं को सीधे निर्यात पूरी तरह बैन।
- कोई भी ऐसा निर्यात जो जापान की समग्र सैन्य क्षमता बढ़ाए।
- नागरिक उपयोग के लिए निर्यात पर अभी कोई प्रतिबंध नहीं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि व्यावहारिक रूप से इसका असर जापानी कंपनियों पर पड़ सकता है।
- कब से लागू? 6 जनवरी 2026 से तत्काल प्रभावी (2026 का पहला आधिकारिक घोषणा नंबर 1)।
- चीन का आधार: राष्ट्रीय सुरक्षा, गैर-प्रसार (non-proliferation) दायित्व और जापान की “पुन: सैन्यीकरण” (re-militarization) नीति का विरोध।
पृष्ठभूमि: ताइवान पर जापानी बयान
- नवंबर 2025 में जापान की पीएम साना ताकाइची ने कहा था कि ताइवान पर चीन का हमला जापान के लिए “अस्तित्वगत खतरा” होगा, क्योंकि यह जापान की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है।
- जापान ने हाल के वर्षों में अपनी रक्षा नीति बदलकर अधिक आक्रामक रुख अपनाया है, जिसमें हथियार निर्यात नियमों में ढील और रक्षा बजट बढ़ाना शामिल है।
- चीन इसे जापान की “गलत” और “खतरनाक” टिप्पणियां मानता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता को बिगाड़ रही हैं।
जापान की प्रतिक्रिया
- जापान ने इस प्रतिबंध को “पूर्ण रूप से अस्वीकार्य” करार दिया।
- टोक्यो ने कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन है और जापानी कंपनियों को व्यापक नुकसान पहुंचा सकता है।
- जापान सरकार चिंतित है कि यह रेयर अर्थ तत्वों की आपूर्ति बाधित कर सकता है, जो सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और रक्षा उपकरणों के लिए जरूरी हैं (चीन दुनिया का प्रमुख सप्लायर है)।
- जापान ने WTO में शिकायत करने या वैकल्पिक स्रोत तलाशने की बात कही।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
- अमेरिका: चुप्पी, लेकिन जापान अमेरिका का प्रमुख सहयोगी है, इसलिए यह तनाव अमेरिका-चीन संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है।
- यूरोप और अन्य: कई देशों ने इसे “आर्थिक जबरदस्ती” करार दिया।
- विशेषज्ञ: यह 2010 के रेयर अर्थ विवाद की याद दिलाता है, जब चीन ने जापान पर इसी तरह प्रतिबंध लगाया था। अब यह अधिक व्यापक है और ताइवान तनाव को बढ़ा सकता है।
- क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर: जापान-ताइवान-अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग चीन को उकसा रहा है।
वर्तमान स्थिति
- 8 जनवरी 2026 तक प्रतिबंध लागू है, लेकिन इसका व्यावहारिक असर आने वाले हफ्तों में दिखेगा।
- जापानी कंपनियां वैकल्पिक सप्लाई चेन तलाश रही हैं, लेकिन रेयर अर्थ में चीन का प्रभुत्व (90%+) बड़ा चुनौती है।
- ताइवान के आसपास चीन की सैन्य गतिविधियां जारी हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
यह कदम चीन-जापान संबंधों में नया अध्याय है, जो आर्थिक युद्ध को सामरिक स्तर पर ले जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विवाद बढ़ा तो वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो सकती है।


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