नई दिल्ली/ढाका, 14 फरवरी 2026
बांग्लादेश में BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) की भारी जीत और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की संभावना के बाद भारत में चिंता बढ़ गई है। तारिक रहमान और BNP के कई बयान और नीतियां ऐसे हैं जो भारत के लिए खतरे की घंटी बजा रहे हैं। ये बातें सीधे भारत-बांग्लादेश संबंधों, सीमा सुरक्षा, अल्पसंख्यक (हिंदू) सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ी हैं।
तारिक रहमान और BNP की चिंता बढ़ाने वाली मुख्य बातें
- पाकिस्तान के साथ निकटता और ‘1971 की जंग’ पर नए सिरे से बहस
- तारिक रहमान ने 2025 में लंदन से बयान दिया था कि “1971 की जंग में गलतियां हुईं, लेकिन दोनों देशों को अब आगे बढ़ना चाहिए”।
- BNP के कई नेता (जैसे मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर) ने कहा कि “1971 को ज्यादा उछाला नहीं जाना चाहिए, क्योंकि ये पुरानी बात है”।
- भारत को डर है कि BNP सत्ता में आने पर 1971 की मुक्ति संग्राम की विरासत को कमजोर कर सकती है, जो बांग्लादेश की राष्ट्रवादी पहचान का आधार है।
- जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन
- BNP ने 2026 चुनाव में जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन किया।
- जमात 1971 में पाकिस्तान के साथ थी और अब भी इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा रखती है।
- तारिक रहमान ने चुनाव के बाद कहा: “जमात हमारे साथ है, और हम सबको साथ लेकर चलेंगे”।
- भारत को चिंता है कि जमात का प्रभाव बढ़ने से अल्पसंख्यक (हिंदू) पर हमले बढ़ सकते हैं और इस्लामी कट्टरता बढ़ सकती है।
- भारत-विरोधी बयान और ‘भारतीय हस्तक्षेप’ का आरोप
- तारिक रहमान ने 2025 में कहा था: “भारत ने 2024 में शेख हसीना को बचाने की कोशिश की, लेकिन जनता ने फैसला किया”।
- BNP नेताओं ने कई बार “भारतीय हस्तक्षेप” और “RAW की साजिश” का आरोप लगाया।
- चुनाव के बाद भी कुछ BNP नेता कह रहे हैं कि “भारत अब भी बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में दखल दे रहा है”।
- सीमा और अवैध प्रवास पर सख्त रुख
- तारिक रहमान ने कहा: “बांग्लादेश में अवैध प्रवासियों को बाहर किया जाएगा”।
- BNP ने “रोहिंग्या” और “भारतीय सीमा से आने वाले” लोगों को बाहर करने की बात कही।
- भारत को डर है कि ये बयान असम और पश्चिम बंगाल में तनाव बढ़ा सकता है, और सीमा पर फिर से घुसपैठ बढ़ सकती है।
- चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ते संबंध
- BNP ने चुनाव अभियान में कहा कि “बांग्लादेश को किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहिए”।
- तारिक रहमान ने पाकिस्तान के साथ “नए संबंध” की बात कही।
- भारत को चिंता है कि BNP सत्ता में आने पर चीन और पाकिस्तान के साथ करीबी बढ़ा सकती है, जो भारत के लिए रणनीतिक खतरा है (खासकर त्रिपक्षीय संतुलन में)।
भारत की चिंता के मुख्य कारण
- अल्पसंख्यक सुरक्षा: 2024 के बाद हिंदू मंदिरों और घरों पर हमले बढ़े थे। BNP-जमात गठबंधन से ये खतरा और बढ़ सकता है।
- सीमा सुरक्षा: बांग्लादेश से घुसपैठ और तस्करी का खतरा।
- प्रमुख मुद्दे: तीस्ता जल बंटवारा, गंगा-बराक जल समझौता, और CPEC जैसे प्रोजेक्ट्स में बांग्लादेश का रुख।
- क्षेत्रीय संतुलन: अगर BNP चीन-पाकिस्तान के करीब गई तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर असर पड़ सकता है।
भारत सरकार का रुख
- विदेश मंत्रालय ने कहा: “हम बांग्लादेश के लोकतंत्र का सम्मान करते हैं और नए सरकार के साथ काम करने को तैयार हैं।”
- लेकिन पीछे से भारत निगरानी बढ़ा रहा है – अल्पसंख्यक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और खुफिया जानकारी पर फोकस।
तारिक रहमान की सत्ता में आने से बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव आ रहा है। भारत के लिए ये “दोस्ताना लेकिन सतर्क” रिश्ते का दौर हो सकता है। क्या BNP भारत के साथ संबंध सुधार पाएगी या पुरानी शिकायतें फिर उभरेंगी?
(स्रोत: The Daily Star, Prothom Alo, Hindustan Times, The Hindu, India Today, Reuters, BBC Bangla – 14 फरवरी 2026 अपडेट्स)


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