ढाका/नई दिल्ली, 16 फरवरी 2026
बांग्लादेश में बीएनपी नेता तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल नहीं होंगे। भारत की ओर से प्रतिनिधित्व लोकसभा स्पीकर ओम बिरला करेंगे। विदेश मंत्रालय ने आज (16 फरवरी 2026) इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। शपथ ग्रहण समारोह 18 फरवरी को ढाका के बंगबंधु अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में होने वाला है।
भारत के फैसले के पीछे मुख्य कारण
- कूटनीतिक संतुलन: भारत ने बीएनपी-जमात गठबंधन सरकार के साथ “सतर्क लेकिन सकारात्मक” रुख अपनाया है। मोदी के शामिल होने से यह संदेश जाता कि भारत पूरी तरह से नई सरकार को स्वीकार कर रहा है, जबकि अल्पसंख्यक सुरक्षा और सीमा मुद्दों पर अभी भी चिंताएं हैं।
- प्रोटोकॉल: शपथ ग्रहण में आमतौर पर विदेश मंत्री या स्पीकर स्तर का प्रतिनिधित्व होता है जब संबंधों में पूरी तरह सामान्यता नहीं आती। ओम बिरला संसदीय प्रतिनिधित्व के तौर पर जाएंगे।
- अल्पसंख्यक सुरक्षा पर चिंता: हाल के महीनों में हिंदू मंदिरों और घरों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। भारत ने कई बार बांग्लादेश से सुरक्षा की गारंटी मांगी है। मोदी के शामिल न होने को “संदेश” माना जा रहा है।
- तारिक रहमान का रुख: तारिक ने हाल ही में कहा था कि “बांग्लादेश किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा” और पाकिस्तान के साथ “नए संबंध” बनाने की बात की। इससे भारत सतर्क है।
भारत का आधिकारिक बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा:
“भारत बांग्लादेश के लोकतंत्र का सम्मान करता है और नई सरकार के साथ काम करने को तैयार है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जी शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। हम बांग्लादेश के साथ अपने बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
अन्य देशों का प्रतिनिधित्व
- पाकिस्तान: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ या विदेश मंत्री शामिल होंगे।
- चीन: विदेश मंत्री वांग यी या उच्च स्तरीय प्रतिनिधि।
- अमेरिका: राजदूत स्तर का प्रतिनिधित्व।
- रूस: डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर स्तर।
भारत की चिंताएं क्या हैं?
- अल्पसंख्यक (हिंदू) सुरक्षा।
- सीमा पर घुसपैठ और तस्करी।
- तीस्ता जल बंटवारा और अन्य जल समझौते।
- चीन-पाकिस्तान के साथ BNP की करीबी।
ओम बिरला का जाना “सौहार्दपूर्ण लेकिन सतर्क” रुख दिखाता है। क्या ये रिश्ते सामान्य होंगे या तनाव बढ़ेगा? आने वाले महीने बताएंगे।


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