मॉस्को, 13 फरवरी 2026
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व वाली सरकार ने अमेरिकी कंपनी मेटा (Meta Platforms) के मैसेजिंग ऐप WhatsApp पर देश में पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने आज (13 फरवरी 2026) पुष्टि की कि “मेटा कंपनी की रूसी कानूनों का पालन न करने की वजह से यह फैसला लिया गया और लागू कर दिया गया है।” रूस के इंटरनेट नियामक Roskomnadzor ने WhatsApp के डोमेन को ब्लॉक कर दिया है, जिससे रूस में ऐप अब बिना VPN के इस्तेमाल नहीं हो सकता। सरकार अब नागरिकों को राज्य समर्थित “राष्ट्रीय मैसेंजर” MAX पर स्विच करने की सलाह दे रही है।
बैन की मुख्य वजह (क्रेमलिन और Roskomnadzor के अनुसार)
- रूसी कानूनों का उल्लंघन: रूस के “सूचना प्रसारकों” (information distributors) से जुड़े कानून के तहत विदेशी ऐप्स को यूजर डेटा (व्यक्तिगत जानकारी और मैसेज) रूस में स्टोर करना अनिवार्य है। साथ ही, सुरक्षा एजेंसियों (FSB) को जरूरत पड़ने पर डेटा उपलब्ध कराना होता है। मेटा ने इन नियमों का पालन नहीं किया।
- सुरक्षा और अपराध: Roskomnadzor ने WhatsApp पर आरोप लगाया कि ये ऐप फ्रॉड, एक्सटॉर्शन, आतंकवाद, और अन्य अपराधों में इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन कंपनी सहयोग नहीं कर रही।
- पिछले प्रतिबंधों का विस्तार: 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम को ब्लॉक किया गया था। अगस्त 2025 से WhatsApp पर वॉइस/वीडियो कॉल्स ब्लॉक थे, नवंबर में नए यूजर रजिस्ट्रेशन रोके गए, और अब पूरा ऐप ब्लॉक हो गया।
- सॉवरेन इंटरनेट का हिस्सा: रूस “सॉवरेन इंटरनेट” (खुद का नियंत्रित इंटरनेट) बनाने की कोशिश कर रहा है, जहां विदेशी प्लेटफॉर्म्स या तो रूसी कानून मानें या गायब हो जाएं।
राज्य समर्थित ऐप MAX को बढ़ावा
- क्रेमलिन ने MAX को “राष्ट्रीय मैसेंजर” के रूप में प्रमोट किया है। ये ऐप मैसेजिंग के अलावा सरकारी सेवाएं, पेमेंट्स, टैक्स फाइलिंग और अन्य फीचर्स देता है।
- नए स्मार्टफोन पर MAX को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य कर दिया गया है।
- पूरे रूस में बड़े विज्ञापन अभियान चलाए जा रहे हैं – “WhatsApp छोड़ो, MAX पर आओ”।
- आलोचकों का कहना: MAX में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नहीं है, और ये सरकारी निगरानी (surveillance) का टूल है। यूजर डेटा और मैसेज पर सरकार का पूरा कंट्रोल रहता है।
प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
- यूजर्स पर असर: रूस में WhatsApp के 100 मिलियन से ज्यादा यूजर्स हैं (देश की आबादी का 70% से ज्यादा)। अब बिना VPN के ऐप काम नहीं करेगा, जिससे संचार में दिक्कत हो रही है।
- WhatsApp का बयान: कंपनी ने कहा कि रूस ने “100 मिलियन से ज्यादा लोगों को निजी और सुरक्षित संचार से अलग करने” की कोशिश की है। ये “पीछे की ओर कदम” है और सुरक्षा कम करेगा।
- अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: मानवाधिकार संगठन (Amnesty, HRW) और पश्चिमी मीडिया इसे “सेंसरशिप” और “इंटरनेट कंट्रोल” का कदम बता रहे हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने विदेशी ऐप्स पर कंट्रोल बढ़ाया है।
- VPN का इस्तेमाल: कई यूजर्स VPN यूज कर रहे हैं, लेकिन सरकार VPN पर भी सख्ती बढ़ा रही है।
ये फैसला रूस की डिजिटल नीति में बड़ा बदलाव है – पुतिन सरकार अब पूरी तरह “राष्ट्रीय” ऐप्स को बढ़ावा दे रही है और विदेशी प्लेटफॉर्म्स को बाहर कर रही है। क्या ये कदम रूस को और अलग-थलग करेगा या “सॉवरेन इंटरनेट” का सपना पूरा करेगा?


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