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Lamborghini accident: Shivam Mishra granted immediate bail, out just a few hours after arrest

लेम्बोर्गिनी हादसा: शिवम मिश्रा को तुरंत जमानत, गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद ही बाहर

कानपुर, 13 फरवरी 2026

कानपुर के ग्वालटोली में करोड़ों की लेम्बोर्गिनी रिवोल्टो से हुए भीषण हादसे में आरोपी शिवम मिश्रा को आज (13 फरवरी 2026) जमानत मिल गई है। पुलिस ने कल ही (12 फरवरी) उन्हें गिरफ्तार किया था, लेकिन आज सुबह कोर्ट में पेशी के बाद मजिस्ट्रेट ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया। जमानत की शर्तों में 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड, दो जमानतदार और पासपोर्ट सरेंडर करना शामिल है। शिवम को आगे की जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया है।

घटनाक्रम का अपडेट

  • हादसा: 8 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 3:15 बजे ग्वालटोली VIP रोड पर दिल्ली नंबर (DL 11 CF 4018) वाली लेम्बोर्गिनी ने ऑटोरिक्शा, बाइक और पैदल यात्रियों को टक्कर मारी। 6 लोग घायल हुए।
  • गिरफ्तारी: 12 फरवरी को पुलिस ने CCTV, चश्मदीदों के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर शिवम को गिरफ्तार किया। ड्राइवर मोहन का “कबूलनामा” झूठा साबित हुआ।
  • जमानत: आज सुबह कानपुर की कोर्ट में पेशी हुई। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि शिवम का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, वो सहयोग कर रहे हैं और हादसा दुर्घटना था। कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली।
  • जमानत की शर्तें:
  • 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड।
  • दो जमानतदार (प्रत्येक 2 लाख रुपये का बॉन्ड)।
  • पासपोर्ट सरेंडर।
  • जांच में सहयोग।
  • हादसे के शिकायतकर्ताओं से संपर्क न करने का निर्देश।

पुलिस और पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया

  • पुलिस ने कहा कि जमानत मिलने के बावजूद जांच जारी रहेगी। फोरेंसिक रिपोर्ट, मेडिकल और पोस्टमार्टम (अगर जरूरी) का इंतजार है।
  • पीड़ित पक्ष (मोहम्मद तौसीफ और अन्य घायल) ने जमानत पर आपत्ति जताई, लेकिन कोर्ट ने जमानत दे दी।
  • सोशल मीडिया पर #JusticeForVictims ट्रेंड कर रहा है, लोग VIP संस्कृति और कानून की नरमी पर सवाल उठा रहे हैं।

बैकग्राउंड

शिवम मिश्रा तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे हैं। हादसे के बाद शुरुआत में पुलिस ने FIR “अज्ञात व्यक्ति” के खिलाफ दर्ज की थी, लेकिन CCTV और गवाहों के बयान से शिवम का नाम आया। ड्राइवर मोहन ने कोर्ट में सरेंडर कर दावा किया था कि वो कार चला रहा था, लेकिन पुलिस ने इसे फर्जी साबित किया।

ये मामला अब जमानत के बाद भी चर्चा में है। क्या पीड़ित पक्ष अपील करेगा या जांच आगे बढ़ेगी?

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