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Supreme Court cancels judge's dismissal verdict: Advises High Court to remain vigilant

SIR में कोई रुकावट नहीं बर्दाश्त! सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को सख्त चेतावनी दी, डेडलाइन एक हफ्ते बढ़ाई – DGP को हलफनामा जमा करने का आदेश

क्या हुआ? (9 फरवरी 2026 की सुनवाई का पूरा अपडेट)

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) चल रहा है। ये चुनाव आयोग की प्रक्रिया है, जिसमें नामों की स्पेलिंग, पता और छोटी-मोटी गलतियां चेक करके फर्जी या गलत नाम हटाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे चुनौती दी – दावा किया कि 1.36 करोड़+ मतदाताओं के नाम छोटी स्पेलिंग/ट्रांसलेशन गलतियों (जैसे Dutta-Datta) से कट सकते हैं, जो बंगाली मतदाताओं को टारगेट कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट (चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और एनवी अंजारिया की बेंच) ने सुनवाई की और सख्त फैसले दिए:

  • SIR प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं बर्दाश्त: कोर्ट ने साफ कहा – “हम किसी को भी SIR में रुकावट डालने की इजाजत नहीं देंगे। ये सभी राज्यों के लिए मैसेज है।” प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी होनी चाहिए।
  • डेडलाइन एक हफ्ते बढ़ाई: मूल समय सीमा 14 फरवरी 2026 थी (फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने की)। कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 21 फरवरी 2026 तक कर दिया। वजह – नए अधिकारी तैनात हुए हैं, दस्तावेज जांच में ज्यादा समय लगेगा। ERO (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) को अतिरिक्त समय मिलेगा क्लेम्स/ऑब्जेक्शन्स स्क्रूटिनी के लिए।
  • माइक्रो ऑब्जर्वर का रोल क्लियर: ये सिर्फ सहायता करेंगे, कोई अंतिम फैसला नहीं ले सकते। अंतिम निर्णय सिर्फ ERO का होगा।
  • DGP को व्यक्तिगत हलफनामा: चुनाव आयोग ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान अधिकारी धमकियां, हिंसा झेल रहे हैं, नोटिस जलाए जा रहे हैं, FIR नहीं दर्ज हो रही, और राज्य सरकार/स्थानीय पुलिस की मिलीभगत है। कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया – इन आरोपों पर जवाब दें।
  • अधिकारियों की तैनाती: राज्य सरकार को 8505+ ग्रुप B अधिकारियों को तुरंत (10 फरवरी शाम 5 बजे तक) जिला निर्वाचन कार्यालयों में रिपोर्ट करने का निर्देश। पहले देरी थी, अब सख्ती।

विवाद क्यों?

  • बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव होने हैं – SIR से सूची साफ करने का काम।
  • ममता ने कहा: लाखों असली मतदाताओं (खासकर महिलाओं, माइग्रेंट वर्कर्स) के नाम कट सकते हैं।
  • चुनाव आयोग ने पलटवार: राज्य सरकार बाधा डाल रही है, अधिकारी सुरक्षित नहीं।
  • कोर्ट ने कहा: दस्तावेज जैसे माध्यमिक परीक्षा सर्टिफिकेट, आधार आदि स्वीकार होंगे। सॉफ्टवेयर टूल्स में सुधार की जरूरत, लेकिन प्रक्रिया रुकेगी नहीं।

अभी की स्थिति (10 फरवरी 2026 तक)

  • प्रक्रिया जारी रहेगी, कोई रोक नहीं लगी।
  • फाइनल वोटर लिस्ट अब 21 फरवरी के बाद (शायद 28 फरवरी तक) जारी हो सकती है।
  • अगर नाम छूट गया तो सुधार के लिए फॉर्म-6/7/8 आदि से दो चरण उपलब्ध।
  • TMC इसे “बड़ी जीत” बता रही है (सुरक्षा और समय बढ़ने से), BJP कह रही है ममता गुमराह कर रही हैं।
  • DGP का हलफनामा आने पर आगे सुनवाई होगी।

चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा बना हुआ है – अगर DGP हलफनामा या नई अपडेट चाहिए, तो बोल दे भाई! 😎

एक नज़र की खबर

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