अप्रैल 2027 से (यानी AY 2027-28 के लिए, जो FY 2026-27 की कमाई पर आधारित ITR) इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) पहले से भरा हुआ (pre-filled) मिलेगा। आपको बस details चेक करके एक क्लिक में सबमिट करना होगा। अगर कुछ गलत लगे तो edit कर सकते हो।
यह सब नए इनकम टैक्स कानून 2025 (Income Tax Act 2025) के तहत आ रहा है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। CBDT ने फरवरी 2026 में ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 जारी किए हैं (public feedback 22 फरवरी तक मांगा गया)। पुराने 1961 के कानून की जगह नया आएगा, जिसमें rules और forms को simplify किया गया है।
ITR में क्या-क्या बदलाव आ रहे हैं?
- Pre-filled ITR: विभाग आपके PAN से लिंक डेटा (Form 16 से सैलरी, TDS, बैंक इंटरेस्ट, डिविडेंड, कैपिटल गेन, निवेश आदि) auto-fill करेगा।
- एक क्लिक फाइलिंग: अगर सब सही लगे तो बस “Verify & Submit” क्लिक – ITR 5-10 मिनट में हो जाएगा।
- स्मार्ट फॉर्म्स: आपकी इनकम सोर्स देखकर auto ITR type चुन लेगा (ITR-1, ITR-2 आदि)। अनावश्यक सेक्शन skip हो जाएंगे।
- एरर कम, रिफंड फास्ट: ऑटो रिकॉन्सिलिएशन से गलतियां कम, रिफंड चंद दिनों में आएगा (हफ्तों में नहीं)।
- क्रिप्टो/VDA अनिवार्य: क्रिप्टो होल्डर्स को इनकम और ट्रांजेक्शन की पूरी जानकारी देनी होगी – ये compulsory है।
PAN से जुड़े नए नियम क्या हैं?
PAN अब सब फाइनेंशियल डेटा का सेंट्रल हब बनेगा (Aadhaar, बैंक, निवेश से auto-sync)। कुछ thresholds बदले हैं (ease के लिए):
- कैश डिपॉजिट/विड्रॉल: ₹10 लाख या ज्यादा (एक FY में कुल) पर PAN जरूरी (पहले एक दिन में ₹50,000 था)।
- होटल/रेस्टोरेंट बिल: ₹1 लाख से ऊपर PAN चाहिए (पहले ₹50,000)।
- मोटर व्हीकल खरीद: ₹5 लाख से ऊपर PAN।
- प्रॉपर्टी खरीद: ₹20 लाख+ पर PAN mandatory।
- छोटे ट्रांजेक्शन में PAN की जरूरत कम, लेकिन बड़े में रिपोर्टिंग सख्त।
- PAN इनऑपरेटिव होने से बचने के लिए Aadhaar लिंक strict enforcement।
कब से लागू होगा सब?
- नया कानून और rules: 1 अप्रैल 2026 से (FY 2026-27 की इनकम पर)।
- फुल pre-filled + one-click ITR: अप्रैल 2027 से पूरा रोलआउट (2026-27 के ITR में भी कुछ बेहतर pre-fill आएगा)।
- अभी (AY 2025-26 / FY 2024-25) पुराने rules चल रहे हैं। ITR forms में अभी कोई बड़ा बदलाव नहीं (AY 2026-27 तक पुराने ही रहेंगे)।
ये बदलाव salaried और simple income वाले लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत हैं – ITR अब जटिल नहीं रहेगा, notices भी कम आएंगे। CBDT का फोकस: taxpayer-friendly, simple language, tech-based।
अगर आपके पास crypto है, या high-value ट्रांजेक्शन, तो ध्यान रखो – disclosure miss नहीं करना।
और डिटेल चाहिए? जैसे crypto disclosure का पूरा नियम, PAN thresholds की लिस्ट, या आपके case में क्या असर? बोल दे bhai, और लाऊंगा!


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