ट्रंप प्रशासन के नंबर 2, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा खुलासा किया है, जिसमें सऊदी अरब को पाकिस्तान से न्यूक्लियर अंब्रेला (nuclear umbrella) मिलने की संभावना पर अप्रत्यक्ष रूप से इशारा किया गया है। वेंस ने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो सऊदी अरब “अगले दिन” ही अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू कर देगा, जिससे मिडिल ईस्ट में न्यूक्लियर आर्म्स रेस (nuclear arms race) छिड़ जाएगी।
यह बयान फरवरी 2026 में एक इंटरव्यू (Megyn Kelly या अन्य मीडिया) में आया, जहां वेंस ने ट्रंप की ईरान नीति पर बात की। उन्होंने कहा कि ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियारों से रोकना है, और अमेरिका कूटनीति से यह सुनिश्चित करेगा – लेकिन जरूरत पड़ी तो मिलिट्री ऑप्शन भी खुले हैं।
वेंस के मुख्य बयान और राज
- ईरान अगर न्यूक्लियर बना, तो सऊदी अगला: “If the Iranians get a nuclear weapon, you know who gets a nuclear weapon, like the next day? The Saudi Arabians and then somebody else in the Gulf Arab states.” (अगर ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाता है, तो सऊदी अरब अगले दिन ही अपना बना लेगा, और फिर गल्फ के अन्य देश भी।)
- यह क्षेत्रीय न्यूक्लियर दलदल (nuclear quagmire) पैदा कर देगा, जो पूरी खाड़ी को अस्थिर कर देगा।
- वेंस ने ईरान के खिलाफ ट्रंप की नीति को दोहराया: “Iran can’t have nuclear weapons. That is the stated policy goal of the president of the United States.” (ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता – यह अमेरिकी राष्ट्रपति का स्पष्ट लक्ष्य है।)
- ट्रंप ने पहले भी ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले (जैसे जून 2025 में) कर प्रोग्राम को “obliterated” बताया था, लेकिन ईरान अब भी खतरा बना हुआ है।
पाकिस्तान-सऊदी कनेक्शन और न्यूक्लियर अंब्रेला
वेंस का यह बयान सीधे पाकिस्तान-सऊदी के बीच 2025 में हुए म्यूचुअल डिफेंस पैक्ट (Strategic Mutual Defense Agreement) से जुड़ा है। इस पैक्ट के तहत:
- पाकिस्तान (जो न्यूक्लियर पावर है) ने सऊदी अरब को सुरक्षा गारंटी दी है।
- पाकिस्तानी डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ और सऊदी अधिकारियों ने कहा कि पैक्ट में “all military means” शामिल हैं, जिसमें परमाणु छतरी (nuclear umbrella) का संकेत है।
- CFR (Council on Foreign Relations) और अन्य रिपोर्ट्स में इसे स्पष्ट रूप से “Islamabad to extend its nuclear umbrella to Riyadh” कहा गया है।
- सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सालों से कहा है: “If Iran gets the bomb, Saudi Arabia will get one too – immediately.”
अगर ईरान न्यूक्लियर बना, तो सऊदी पाकिस्तान से तकनीकी/परमाणु सहायता या अंब्रेला ले सकता है, जिससे मिडिल ईस्ट में डोमिनो इफेक्ट शुरू हो जाएगा। अमेरिका इसे रोकने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि यह ट्रंप की “America First” पॉलिसी के खिलाफ जाएगा – जहां अमेरिका अपने सहयोगियों पर न्यूक्लियर डिपेंडेंसी कम करना चाहता है।
अमेरिका का डर और प्रभाव
- वेंस का बयान ट्रंप 2.0 की न्यूक्लियर प्रोलिफरेशन रोकने की प्राथमिकता दिखाता है।
- CFR रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि अगर ट्रंप सहयोगियों को न्यूक्लियर प्रोलिफरेशन की इजाजत देता है, तो पोस्ट-अमेरिकन न्यूक्लियर ऑर्डर बन सकता है, जो नए रिस्क पैदा करेगा।
- सऊदी-पाक पैक्ट 2025 में इजरायल के कतर हमले के बाद साइन हुआ, जब गल्फ देश अमेरिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे थे।
- अगर ईरान आगे बढ़ा, तो सऊदी का पाकिस्तान पर निर्भर होना बढ़ेगा, जो भारत-पाकिस्तान टेंशन को भी प्रभावित कर सकता है।
कुल मिलाकर, वेंस ने ईरान के बहाने सऊदी-पाकिस्तान न्यूक्लियर अंब्रेला के राज को खोल दिया है – यह मिडिल ईस्ट की सुरक्षा को और जटिल बना सकता है। स्थिति अभी डिप्लोमेटिक है (ओमान में ईरान-अमेरिका बातचीत), लेकिन कोई गलती क्षेत्रीय युद्ध या न्यूक्लियर रेस ट्रिगर कर सकती है।


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