आतंकवाद के मुद्दे पर भारत को मलेशिया से मजबूत और स्पष्ट समर्थन मिला है, खासकर आतंकवाद की फंडिंग (terror financing) को रोकने के लिए एक ठोस प्लान पर सहमति बनी है। यह विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 7-8 फरवरी 2026 की मलेशिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान हुआ, जहां दोनों देशों ने संयुक्त वक्तव्य (Joint Statement) जारी किया। मलेशिया ने भारत के साथ मिलकर क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद, कट्टरपंथ (radicalisation), हिंसक उग्रवाद (violent extremism), और टेरर फंडिंग के खिलाफ सहयोग बढ़ाने का वादा किया है।
यह प्लान बिलेटरल (द्विपक्षीय) और मल्टी-लेटरल (बहुपक्षीय) स्तर पर काम करेगा, जिसमें UN, FATF (Financial Action Task Force), और ASEAN जैसे फोरम्स शामिल हैं।
संयुक्त वक्तव्य के मुख्य पॉइंट्स (आतंकवाद और फंडिंग पर)
- आतंकवाद की निंदा: दोनों प्रधानमंत्रियों ने सभी रूपों में आतंकवाद की कड़ी निंदा की, खासकर क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म की। उन्होंने जीरो टॉलरेंस (शून्य सहनशीलता) की नीति पर जोर दिया।
- टेरर फंडिंग पर फोकस: दोनों देश आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाएंगे। इसमें शामिल हैं:
- सूचना और ज्ञान साझा करना (information and knowledge sharing)।
- बेस्ट प्रैक्टिसेस का आदान-प्रदान (exchange of best practices)।
- क्षमता निर्माण (capacity building) – जैसे ट्रेनिंग, टेक्निकल असिस्टेंस।
- नई टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग रोकना: नए और उभरते टेक्नोलॉजी (जैसे क्रिप्टोकरेंसी, सोशल मीडिया, ड्रोन, AI) को आतंकवादी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल रोकने पर सहमति।
- रैडिकलाइजेशन और वायलेंट एक्सट्रीमिज्म: कट्टरता और हिंसक उग्रवाद का मुकाबला करने के लिए जॉइंट एफर्ट्स।
- ट्रांसनेशनल ऑर्गनाइज्ड क्राइम का लिंक: आतंकवाद और संगठित अपराध (जैसे ड्रग्स, ह्यूमन ट्रैफिकिंग) के बीच कनेक्शन को मानते हुए, इन क्षेत्रों में भी सहयोग।
- मल्टी-लेटरल कोऑपरेशन: UN, FATF, और ADMM-Plus (ASEAN Defence Ministers’ Meeting Plus) में मजबूत सहयोग। भारत और मलेशिया 2024-2027 तक ADMM-Plus के Counter-Terrorism Working Group की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं।
- टेबल-टॉप एक्सरसाइज: 2026 में मलेशिया द्वारा होस्ट की जाने वाली Expert Working Group on Counter Terrorism Table-Top Exercise (EWG CT TTX) में सभी ADMM-Plus सदस्यों को आमंत्रित किया गया है।
PM मोदी के बयान
- PM मोदी ने जोर दिया: “Our message on terrorism is clear: No double standards. No compromise.” (आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है: कोई दोहरे मापदंड नहीं, कोई समझौता नहीं।)
- उन्होंने कहा कि सुरक्षा क्षेत्र में काउंटर-टेररिज्म, इंटेलिजेंस शेयरिंग, और मैरिटाइम सिक्योरिटी में सहयोग मजबूत होगा।
- PM मोदी ने मलेशिया की यात्रा को 2026 की पहली विदेश यात्रा बताते हुए कहा कि दोनों देशों की समृद्धि जुड़ी हुई है, और आतंकवाद के खिलाफ दोस्त देशों का साथ महत्वपूर्ण है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्लान?
- टेरर फंडिंग आजकल हवाला, क्रिप्टो, चैरिटी के नाम पर, और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से होती है। मलेशिया का समर्थन भारत के लिए क्षेत्रीय स्तर पर फंडिंग नेटवर्क्स को ट्रैक करने में मदद करेगा।
- मलेशिया OIC (Organisation of Islamic Cooperation) का सदस्य है, और इसका सपोर्ट पाकिस्तान जैसे देशों के खिलाफ मल्टी-लेटरल फोरम्स में दबाव बढ़ाएगा।
- यह ASEAN-India Comprehensive Strategic Partnership (2026-2030) के Plan of Action से जुड़ता है, जहां काउंटर-टेररिज्म प्रमुख क्षेत्र है।
- हाल के वर्षों में भारत ने UAE, सऊदी अरब, US, और Quad (US, Japan, Australia) से भी इसी तरह का सपोर्ट लिया है। मलेशिया का साथ दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सिक्योरिटी पोजिशन को मजबूत करता है।
- प्रैक्टिकल स्टेप्स: इंटेलिजेंस शेयरिंग बढ़ेगी, जॉइंट ट्रेनिंग, और FATF जैसे बॉडीज में कोऑर्डिनेशन।
अन्य सहयोग (यात्रा के दौरान)
- कुल 11 समझौते साइन हुए – सेमीकंडक्टर, ट्रेड, डिफेंस, सोशल सिक्योरिटी, और लोकल करेंसी ट्रेड पर।
- दोनों देशों ने BRICS में भी सपोर्ट दोहराया (मलेशिया BRICS में शामिल होना चाहता है, भारत 2026 में चेयर)।
यह प्लान आतंकवाद के खिलाफ ग्लोबल फ्रंट को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। अगर अमल हुआ तो क्रॉस-बॉर्डर फंडिंग (जैसे LeT, JeM जैसी ग्रुप्स) पर असर पड़ेगा।


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