अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25% पेनल्टी टैरिफ को वापस ले लिया है, जो अगस्त 2025 में रूसी तेल (Russian crude oil) खरीदने के कारण लगाया गया था। इस फैसले से भारतीय कारोबारियों और एक्सपोर्टर्स को करीब ₹40,000 करोड़ की बड़ी राहत मिलेगी। यह कदम भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम ट्रेड डील (interim trade deal) का हिस्सा है, जिसकी घोषणा फरवरी 2026 की शुरुआत में हुई।
क्या था पूरा मामला?
- अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर अतिरिक्त 25% पेनल्टी टैरिफ लगाया था, क्योंकि भारत रूस से सस्ता क्रूड ऑयल खरीद रहा था। अमेरिका का कहना था कि यह रूस को यूक्रेन युद्ध में फंडिंग दे रहा है।
- इससे पहले भारत के सामान पर रिसिप्रोकल टैरिफ भी था, कुल मिलाकर भारतीय एक्सपोर्ट्स पर 50% तक ड्यूटी लग रही थी (25% मुख्य + 25% पेनल्टी)।
- इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स, खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग गुड्स, ज्वेलरी और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर प्रभावित हुए थे। अनुमान है कि अगस्त 2025 से फरवरी 2026 तक अमेरिका ने इस पेनल्टी से लगभग $4 बिलियन (₹40,000 करोड़) एक्स्ट्रा कलेक्ट किया था।
अब क्या बदलाव आया?
- 7 फरवरी 2026 (12:01 AM Washington समय) से यह 25% पेनल्टी टैरिफ पूरी तरह हटा दिया गया है। ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया, जिसमें कहा गया कि भारत ने रूस से डायरेक्ट या इंडायरेक्ट तेल आयात रोकने की प्रतिबद्धता जताई है।
- साथ ही, मुख्य रिसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। अब भारतीय सामान पर कुल ड्यूटी सिर्फ 18% रहेगी।
- रिफंड का प्रावधान: अगस्त 2025 से फरवरी 2026 तक पेनल्टी पर जो एक्स्ट्रा पेमेंट हुआ, उसकी रिफंड प्रक्रिया शुरू होगी। अमेरिकी इंपोर्टर्स भारतीय एक्सपोर्टर्स से बात करके यह अमाउंट शेयर करेंगे – इससे एक्सपोर्टर्स को सीधे राहत मिलेगी, अनुमानित ₹40,000 करोड़।
- ट्रेड डील के अन्य फायदे: भारत ने अमेरिका से $500 बिलियन तक के सामान (एनर्जी, एयरक्राफ्ट, टेक्नोलॉजी) खरीदने का कमिटमेंट दिया है। डिफेंस कोऑपरेशन को अगले 10 सालों में बढ़ाया जाएगा।
लेकिन शर्तें क्या हैं?
ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में साफ चेतावनी है – अगर भारत रूस से तेल खरीदना फिर शुरू करता है (डायरेक्ट या इंडायरेक्ट), तो अमेरिकी सरकार (कॉमर्स, स्टेट, ट्रेजरी डिपार्टमेंट) मॉनिटरिंग करेगी और 25% पेनल्टी दोबारा लगा सकती है। यह “snapback” क्लॉज है, जिसे कुछ एनालिस्ट्स ने “कोएर्शन” (दबाव) बताया है।
- भारत सरकार ने अभी तक ट्रंप के दावे (कि हम रूस से तेल पूरी तरह बंद कर देंगे) की पुष्टि नहीं की है। MEA का कहना है कि एनर्जी डिसीजन नेशनल इंटरेस्ट पर आधारित हैं।
- हाल के महीनों में भारत ने रूसी तेल आयात कम किया है (38 महीने के निचले स्तर पर), लेकिन पूरी तरह बंद नहीं किया। अब अमेरिका/वेनेजुएला से ज्यादा खरीदने की बात चल रही है।
भारतीय कारोबारियों पर प्रभाव
- एक्सपोर्ट बूस्ट: टैरिफ घटने से अमेरिका में भारतीय प्रोडक्ट्स सस्ते होंगे, खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, जेम्स एंड ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में। एक्सपोर्ट ग्रोथ बढ़ेगी।
- ₹40,000 करोड़ राहत: पिछले 6 महीनों का एक्स्ट्रा टैरिफ रिफंड मिलेगा, जो बिजनेस कैश फ्लो सुधारेगा।
- चुनौतियां: रूस से तेल कम करने से भारत की एनर्जी कॉस्ट बढ़ सकती है (रूसी तेल सस्ता था)। लेकिन अमेरिका से ज्यादा खरीदने से डिफेंस और टेक्नोलॉजी में फायदा हो सकता है।
- स्टॉक मार्केट और इंडस्ट्री ने मिक्स्ड रिएक्शन दिया – कुछ सेक्टर में राहत, लेकिन एनर्जी सेक्टर में चिंता।
यह डील भारत-अमेरिका संबंधों में बड़ा टर्निंग पॉइंट है, लेकिन रूस के साथ बैलेंस बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। अगर रूस से तेल आयात जारी रहा, तो टैरिफ वापस आ सकता है।


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