पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर कर्ज का बोझ अब इतना भारी हो चुका है कि देश का “भीख का कटोरा” भी छोटा पड़ता दिख रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक कर्ज (public debt) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, और सरकार की कमाई का आधा से ज्यादा हिस्सा सिर्फ ब्याज (interest payments) चुकाने में खर्च हो रहा है। फरवरी 2026 तक की ताजा स्थिति बताती है कि यह संकट लगातार गहरा रहा है, जिससे विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों के लिए फंड्स लगभग खत्म हो चुके हैं।
कर्ज का रिकॉर्ड स्तर
- पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक कर्ज जून 2025 तक Rs 80.5 ट्रिलियन (लगभग 80.6 ट्रिलियन) पहुंच गया, जो जीडीपी (GDP) का 70.7% है। यह पिछले साल के 67.6% से काफी ज्यादा है।
- संसद द्वारा तय सीमा 56% है, लेकिन यह अब काफी आगे निकल चुकी है।
- हर पाकिस्तानी नागरिक पर औसत कर्ज Rs 333,000 (लगभग 3.33 लाख रुपये) हो गया है – एक साल में 13% की बढ़ोतरी।
- बाहरी कर्ज (external debt) Q3 2025 में $134.48 बिलियन (लगभग 134 अरब डॉलर) था, जो GDP का करीब 33-35% है। 2026 में यह और बढ़ने की आशंका है।
- मुख्य वजह: उच्च ब्याज दरें, रुपये की कमजोरी (exchange rate depreciation), और बजट घाटा (fiscal deficit) जो कानूनी सीमा से ज्यादा रहा (6.2% जबकि लिमिट 3.5% है)।
कमाई का आधा हिस्सा ब्याज में
- पाकिस्तान की सरकार की कुल कमाई (revenue) का बड़ा हिस्सा सिर्फ कर्ज के ब्याज चुकाने में जाता है।
- FY25 में ब्याज भुगतान Rs 8.8 ट्रिलियन तक पहुंचा, जो बजट अनुमान से थोड़ा कम लेकिन फिर भी भारी था।
- S&P Global Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, ब्याज भुगतान राजस्व का 41-42% औसत रहेगा अगले कुछ सालों में, लेकिन पहले के पीक में 60% से ज्यादा था। कई रिपोर्ट्स में यह 50% से ज्यादा बताया गया है, खासकर net revenue (प्रांतों को ट्रांसफर के बाद) का 80-90% तक।
- FY26 बजट में debt servicing के लिए Rs 7.5-8.2 ट्रिलियन आवंटित हैं, जो कुल खर्च का लगभग आधा है।
- नतीजा: विकास (development), स्वास्थ्य, शिक्षा, और सामाजिक सुरक्षा के लिए बहुत कम फंड बचता है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि net revenue का 94% तक debt servicing में चला जाता है, बाकी सिर्फ 5-6% अन्य कामों के लिए।
क्या हो रहा है पाकिस्तान में?
पाकिस्तान लगातार IMF और दोस्त देशों (चीन, सऊदी अरब) से rollover और नए लोन ले रहा है। हाल ही में IMF से नई किस्त मिली, लेकिन यह सिर्फ पुराने कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि उच्च ब्याज दरों के कारण (policy rate अभी भी 10.5% पर) और कम राजस्व वृद्धि से यह चक्र (debt spiral) जारी रहेगा।
- S&P Ratings: पाकिस्तान को ‘B-‘ पर अपग्रेड किया, लेकिन चेतावनी दी कि interest-to-revenue ratio दुनिया में सबसे ऊंचा है।
- Finance Ministry: कबूल किया कि debt dynamics बड़ा चैलेंज है, मुख्य वजह ब्याज और exchange rate।
- अनुमान: FY26 में GDP ग्रोथ 3.75-4.75% रह सकती है, लेकिन कर्ज कम होने की बजाय बढ़ रहा है।
यह स्थिति पाकिस्तान को “begging bowl” की छवि दे रही है, जहां IMF और सहयोगी देशों से बार-बार मदद मांगनी पड़ रही है। अगर सुधार नहीं हुए – जैसे टैक्स कलेक्शन बढ़ाना, खर्च कम करना, और structural reforms – तो यह संकट और गहरा सकता है।


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