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We will strike... where it hurts the most – now sleepless nights are about to begin

‘हम ऐसी जगह मारेंगे, जहां दर्द सबसे ज्यादा होगा…’, ट्रंप की ईरान को खुली धमकी — प्रदर्शनों पर गोलीबारी की चेतावनी, खामेनेई ने कहा ‘ट्रंप तानाशाह’

वॉशिंगटन/तेहरान, 10 जनवरी 2026 — ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की आग तेजी से फैल रही है, और इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को सख्त चेतावनी जारी की है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरानी शासन ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, तो अमेरिका उन्हें ‘ऐसी जगह मारेंगे जहां दर्द सबसे ज्यादा होगा’। यह धमकी ऐसे समय आई है जब ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ जनआंदोलन उग्र हो चुका है, और सुरक्षा बलों द्वारा दमन की खबरें लगातार आ रही हैं।

iranian protests escalate as authorities cut internet and

प्रदर्शनों का पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

ईरान में विरोध प्रदर्शन पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे हैं, लेकिन 7 जनवरी 2026 के बाद इनकी तीव्रता में भारी वृद्धि हुई है। नीति अनुसंधान संस्था ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन तेहरान से लेकर उत्तर-पश्चिमी शहरों जैसे तबरेज, उर्मिया और अन्य इलाकों तक फैल चुके हैं। प्रदर्शनकारी सरकार की आर्थिक नीतियों, भ्रष्टाचार, महिलाओं के अधिकारों और राजनीतिक दमन के खिलाफ सड़कों पर हैं। कुछ शहरों में ‘डेथ टू डिक्टेटर’ (तानाशाह को मौत) जैसे नारे लगाए जा रहे हैं, जो सीधे सुप्रीम लीडर खामेनेई पर निशाना साधते हैं।

ईरानी शासन ने दमन तेज कर दिया है। कम से कम एक प्रांत में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ग्राउंड फोर्स को तैनात किया गया है, जो दुर्लभ और गंभीर कदम माना जा रहा है। एक ईरानी डॉक्टर के दावे के अनुसार, सिर्फ तेहरान के छह अस्पतालों में ही 217 मौतें हुई हैं, जिनमें ज्यादातर गोलीबारी से हुईं। इंटरनेट शटडाउन और मीडिया ब्लैकआउट के बीच प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर रहे हैं, जिसमें सुरक्षा बलों की क्रूरता दिखाई जा रही है। ईरान के निर्वासित प्रिंस रेजा पahlavi ने ट्रंप से ‘एक घंटे में एक्शन’ लेने की गुहार लगाई है, और X (पूर्व ट्विटर) ने ईरान के झंडे को बदलकर पुरानी शाही ‘लाइन एंड सन’ डिजाइन पर लौटा दिया है, जो प्रदर्शनकारियों के लिए प्रतीक बन गया है।

ट्रंप की धमकी: क्या कहा अमेरिकी राष्ट्रपति ने?

व्हाइट हाउस में तेल और गैस कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “ईरान बड़ी परेशानी में है। लोग उन शहरों पर कब्जा कर रहे हैं जिनकी कल्पना नहीं की गई थी। हमने पहले ही साफ शब्दों में चेतावनी दी है। अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, जैसा कि वे पहले करते रहे हैं, तो हम इसमें शामिल होंगे। हम उन्हें ऐसी जगह बहुत जोर से मारेंगे जहां दर्द सबसे ज्यादा होगा।”

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इसका मतलब ‘बूट्स ऑन ग्राउंड’ (जमीन पर सैनिक उतारना) नहीं है, लेकिन अमेरिका हालात पर करीब से नजर रखे हुए है। उन्होंने ईरानी नेताओं से अपील की: “गोलीबारी शुरू मत करना, क्योंकि अगर तुम गोली चलाओगे तो हम भी गोली चलाएंगे।” ट्रंप ने घटनाक्रम को ‘हैरान करने वाला’ और ‘अविश्वसनीय’ बताया, और कहा कि ईरान ने अपने लोगों के साथ बुरा व्यवहार किया और अब कीमत चुक रहा है। यह धमकी 2020 में कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद की गई चेतावनियों की याद दिलाती है, जब ट्रंप ने ईरान के सांस्कृतिक स्थलों को निशाना बनाने की बात कही थी।

खामेनेई का पलटवार: ट्रंप को ‘तानाशाह’ बताया

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने 9 जनवरी 2026 को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रदर्शनों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “प्रदर्शनकारी अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए काम कर रहे हैं। तेहरान और अन्य जगहों पर तोड़फोड़ अमेरिका को खुश करने के लिए है।” खामेनेई ने ट्रंप को ‘घमंडी तानाशाह’ बताया और इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि फिरौन, नमरूद, रजा खान और मोहम्मद रजा जैसे तानाशाहों का पतन तय होता है, और ट्रंप का भी यही अंजाम होगा। उन्होंने जोड़ा कि ईरान की जनता विदेशी ताकतों के लिए काम करने वालों को कभी स्वीकार नहीं करती और ऐसे लोगों को राष्ट्र खारिज कर देता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और संभावित प्रभाव

  • अमेरिका की रणनीति: ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर पहले से ही कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, और यह धमकी साइबर हमलों, ड्रोन स्ट्राइक्स या आर्थिक दबाव को बढ़ाने का संकेत दे सकती है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रहा है, लेकिन सैन्य हस्तक्षेप से बच रहा है।
  • ईरान की स्थिति: प्रदर्शनों से ईरान की अर्थव्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता पर असर पड़ रहा है। तख्तापलट की अटकलें लगाई जा रही हैं, और IRGC की तैनाती से हिंसा बढ़ने की आशंका है।
  • विश्व की प्रतिक्रिया: यूरोपीय यूनियन ने ईरान से संयम बरतने की अपील की है, जबकि चीन और रूस ने अमेरिका की ‘हस्तक्षेपवादी नीति’ की आलोचना की है। भारत ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता पर चिंता जताई है।
  • सोशल मीडिया पर असर: ट्रंप और खामेनेई के बीच सोशल मीडिया पर धमकियों का आदान-प्रदान बढ़ा है, जो 2020 की घटनाओं की याद दिलाता है।

यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में नए तनाव का कारण बन सकता है, जहां पहले से ही इजरायल-हमास युद्ध और अन्य मुद्दे गर्म हैं। ट्रंप की धमकी से ईरान में प्रदर्शनकारियों को हौसला मिल सकता है, लेकिन अगर हिंसा बढ़ी तो अमेरिका-ईरान संबंध और बिगड़ सकते हैं। जांच एजेंसियां और विशेषज्ञ स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। 🇺🇸🇮🇷🚨

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