शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के चुनाव को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता पर 9 जनवरी 2026 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। हालांकि यूजर क्वेरी में उल्लेखित “सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित” की स्थिति 7 जनवरी 2026 तक थी, जब प्रदेश सरकार ने अपना जवाब (अफिडेविट/रिप्लाई) दायर किया और डिवीजन बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया। लेकिन आज (9 जनवरी) ही कोर्ट ने अपना आदेश जारी कर दिया, जिसमें सुक्खू सरकार को बड़ा झटका लगा है।
मुख्य फैसला क्या है?
- हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि पंचायत चुनाव 30 अप्रैल 2026 से पहले ही संपन्न कराए जाएं।
- चुनाव प्रक्रिया 20 फरवरी 2026 से शुरू होनी होगी।
- 28 फरवरी 2026 तक मतदाता सूची अद्यतन, आरक्षण रोस्टर तय करना, वार्ड-बंदी और अन्य सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी करनी होंगी।
- कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संवैधानिक संस्थाओं (पंचायतों) को 5 साल के कार्यकाल से ज्यादा समय तक बिना चुनाव के नहीं चलाया जा सकता। आपदा प्रबंधन अधिनियम (Disaster Management Act) के बहाने चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टालना असंवैधानिक है।
- मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है, इसलिए समय पर चुनाव जरूरी हैं।
कौन सी बेंच ने सुनवाई की?
- जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रोमेश वर्मा की डिवीजन बेंच ने यह आदेश पारित किया।
- मामला जनहित याचिका (PIL) पर था, जिसमें याचिकाकर्ता डिकेन कुमार ठाकुर और अन्य ने समय पर चुनाव कराने की मांग की थी।
- सरकार ने आपदा (जैसे बादल फटना, भूस्खलन) के कारण 6 महीने की मोहलत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
सरकार और चुनाव आयोग की स्थिति
- प्रदेश सरकार (सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार) ने चुनाव टालने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 243-E) सर्वोपरि हैं।
- राज्य निर्वाचन आयोग (SEC), पंचायती राज विभाग और सरकार को मिलकर रणनीति बनानी होगी।
- फैसले के बाद सीएम सुक्खू ने कहा कि वे आदेश का अध्ययन करेंगे और डिजास्टर एक्ट की प्रासंगिकता पर विचार करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार आगे कानूनी कदम उठा सकती है।
राजनीतिक प्रभाव
- यह फैसला सुक्खू सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे चुनाव टालना चाहते थे (संभवतः राजनीतिक तैयारी के लिए)।
- विपक्ष (BJP) इसे सरकार की नाकामी बता रहा है।
- पंचायत चुनाव हिमाचल में ग्रामीण राजनीति का आधार होते हैं, इसलिए यह फैसला ग्रामीण स्तर पर बड़ा असर डालेगा।
- कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र की जड़ों (पंचायतों) को लंबे समय तक बिना चुने प्रतिनिधियों के नहीं चलाया जा सकता।
पृष्ठभूमि
- हिमाचल में पिछला पंचायत चुनाव जनवरी 2021 में हुआ था।
- कई PIL और याचिकाएं दायर हुईं, जिसमें सरकार की देरी और नियमों में संशोधन को चुनौती दी गई।
- 7 जनवरी को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था, लेकिन 9 जनवरी को ही फैसला आ गया।
यह फैसला हिमाचल की ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार समय पर चुनाव करवा पाती है या नहीं।


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