महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित अंबरनाथ नगरपरिषद में हाल के दिनों में राजनीतिक ड्रामा चरम पर पहुंच गया है। पहले भाजपा और कांग्रेस का असामान्य गठबंधन बना, जो कुछ घंटों में ही विवादों के कारण टूट गया। इसके बाद कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया, और अब उन सभी ने भाजपा का दामन थाम लिया। यह घटनाक्रम 7-8 जनवरी 2026 को तेजी से हुआ, जिसे ‘खेला’ करार दिया जा रहा है।
चुनाव परिणाम और शुरुआती स्थिति
- अंबरनाथ नगरपरिषद में कुल 59 सीटें हैं (कुछ रिपोर्ट्स में थोड़ा अंतर)।
- हाल के निकाय चुनाव में:
- शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट): सबसे बड़ी पार्टी, 27 सीटें।
- भाजपा: 14 सीटें।
- कांग्रेस: 12 सीटें।
- एनसीपी (अजीत पवार गुट): 4 सीटें।
- निर्दलीय: 2 सीटें।
- बहुमत के लिए 30 सीटें जरूरी। शिंदे गुट महायुति गठबंधन का हिस्सा होने के कारण सत्ता पर कब्जा करने की स्थिति में था।
गठबंधन का विवादास्पद जन्म और मौत
- 6 जनवरी 2026 को भाजपा और कांग्रेस ने अप्रत्याशित गठबंधन किया। ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ नाम से गठबंधन में भाजपा (14), कांग्रेस (12), एनसीपी (अजीत) (4) और कुछ निर्दलीय शामिल हुए।
- उद्देश्य: शिंदे गुट को सत्ता से बाहर रखना।
- यह गठबंधन महायुति (भाजपा-शिंदे-एनसीपी) और महाविकास अघाड़ी दोनों के लिए झटका था। शिंदे गुट ने इसे ‘विश्वासघात’ करार दिया।
- विवाद बढ़ा: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाराजगी जताई और कार्रवाई की चेतावनी दी। कांग्रेस हाईकमान भी असहज हुआ।
- 7 जनवरी को कांग्रेस ने तुरंत एक्शन लिया: सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और अंबरनाथ ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को पार्टी से निलंबित कर दिया। ब्लॉक कमेटी भी भंग की गई।
- कारण: पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर भाजपा से गठबंधन करना।
अब बड़ा खेला: 12 पार्षद भाजपा में शामिल
- निलंबन के कुछ घंटों बाद ही, 7 जनवरी की शाम को सभी 12 निलंबित कांग्रेस पार्षदों ने भाजपा जॉइन कर ली।
- भाजपा महाराष्ट्र अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने मुंबई में भाजपा कार्यालय में इनका स्वागत किया।
- इससे भाजपा की ताकत बढ़कर 26 हो गई (14 + 12), और एनसीपी (अजीत) के साथ मिलकर बहुमत आसान।
- इसे भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ सफल बताया जा रहा है, जहां विरोधी पार्टियों के नेता तोड़े जाते हैं।
- कांग्रेस का अंबरनाथ में अब आधार शून्य हो गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- भाजपा: इसे स्थानीय विकास के लिए जरूरी कदम बताया। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस पार्षदों ने स्वेच्छा से शामिल होने का फैसला किया।
- कांग्रेस: हाईकमान ने इसे अनुशासनहीनता करार दिया। राज्य कांग्रेस ने सख्त कार्रवाई की। कुछ नेताओं ने भाजपा पर ‘खरीद-फरोख्त’ का आरोप लगाया।
- शिवसेना (शिंदे): गठबंधन को ‘अनैतिक’ बताया और भाजपा पर विश्वासघात का आरोप।
- अन्य: यह घटना महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में ‘सत्ता के लिए कुछ भी’ की मिसाल बनी। BMC चुनाव से पहले यह बड़ा संकेत माना जा रहा है।
वर्तमान स्थिति
- 8 जनवरी 2026 तक अंबरनाथ नगरपरिषद में भाजपा मजबूत स्थिति में है। अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव जल्द होने वाले हैं, जहां भाजपा का पलड़ा भारी।
- क्षेत्र में राजनीतिक हलचल जारी, लेकिन सत्ता अब शिंदे गुट से दूर लग रही है।
यह घटना महाराष्ट्र की बदलती राजनीति का प्रतीक है, जहां स्थानीय स्तर पर गठबंधन और दल-बदल आम हो गए हैं। (स्रोत: आज तक, दैनिक भास्कर, द हिंदू, इंडिया टुडे, टाइम्स ऑफ इंडिया, NDTV आदि की 7-8 जनवरी 2026 रिपोर्ट्स)


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