गुजरात के सौराष्ट्र तट पर अरब सागर के किनारे स्थित श्री सोमनाथ मंदिर भारतीय सभ्यता की अटूट आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। वर्ष 2026 विशेष है क्योंकि यह महमूद गजनवी के पहले बड़े हमले (जनवरी 1026) के ठीक 1000 वर्ष पूरे होने का वर्ष है। इसी उपलक्ष्य में सोमनाथ में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को शामिल होंगे।


स्वाभिमान पर्व का आयोजन और PM मोदी का दौरा
- 8 से 11 जनवरी तक सोमनाथ मंदिर परिसर में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
- प्रधानमंत्री मोदी 11 जनवरी को मुख्य समारोह में भाग लेंगे और दर्शन-पूजन करेंगे।
- यह पर्व पूरे वर्ष चलेगा, जिसमें भारत की सांस्कृतिक धरोहर और अटूट आस्था को突出 किया जाएगा।
- PM मोदी (जो सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन भी हैं) ने हाल ही में एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा: “सोमनाथ हमारी सभ्यता की अडिग शक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है, जो संघर्षों के बाद भी गौरव से खड़ा है।”


सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व और संघर्ष गाथा
सोमनाथ मंदिर की महिमा ऋग्वेद, महाभारत, श्रीमद्भागवत और स्कंद पुराण में वर्णित है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रदेव ने यहां तपस्या कर शिवलिंग स्थापित किया, इसलिए इसे ‘सोमनाथ’ कहा गया।
- प्राचीन वैभव: मंदिर सोने-चांदी से बना था, जो समुद्री व्यापार से समृद्ध था।
- हमले और पुनर्निर्माण: इतिहास में इसे कई बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार पुनर्निर्मित किया गया।
- 1026: महमूद गजनवी का पहला बड़ा हमला – मंदिर ध्वस्त, हजारों श्रद्धालु मारे गए।
- बाद में अलाउद्दीन खिलजी, मुगल औरंगजेब आदि ने भी हमले किए।
- हर बार राजा भीमदेव, भोज, अहिल्याबाई होलकर जैसे भक्तों ने पुनर्निर्माण कराया।

- आधुनिक पुनर्निर्माण: स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में दीवाली पर दौरा कर पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उद्घाटन किया (तत्कालीन PM नेहरू इसके विरोध में थे)।
- 2026 में पुनर्निर्मित मंदिर के 75 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं।


वर्तमान स्थिति और संदेश
आज सोमनाथ मंदिर भव्य chalukya शैली में बना है, जिसका शिखर 150 फुट ऊंचा है। यह लाखों श्रद्धालुओं का केंद्र है। PM मोदी ने अपने ब्लॉग में कहा: “विध्वंस करने वाले समय की धूल बन गए, लेकिन सोमनाथ आज भी चमक रहा है। यह आस्था की जीत है।”
यह दौरा और पर्व भारतीय सभ्यता की अजेयता का प्रतीक है, जो युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश देता है। जय सोमनाथ!

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