काराकास, 6 जनवरी 2026: वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था एक बार फिर गहरे संकट में फंसी हुई है। वर्षों से चल रही हाइपरइन्फ्लेशन, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण बुनियादी खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं। देश में अब ज्यादातर लेन-देन डॉलर में हो रहे हैं, जबकि स्थानीय मुद्रा बोलीवर (VES) तेजी से मूल्यहीन हो रही है। जनवरी 2026 में आधिकारिक विनिमय दर करीब 300-301 बोलीवर प्रति 1 USD है, लेकिन ब्लैक मार्केट में यह 500-560 बोलीवर तक पहुंच गई है।
खाद्य पदार्थों की मौजूदा कीमतें (जनवरी 2026 के आसपास, Numbeo और अन्य स्रोतों के आधार पर)
| पदार्थ | बोलीवर में कीमत (लगभग) | डॉलर में कीमत (लगभग) | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| 1 लीटर दूध | 80,000-1,00,000+ बोलीवर | 2-3 USD | कई जगहों पर 2.24-3 USD तक पहुंचा |
| 1 किलो कॉर्नफ्लोर (आटा) | 50,000-70,000 बोलीवर | 1-1.5 USD | डॉलर में ही बिकता है |
| 1 किलो बीफ/मीट | 1,00,000-1,50,000+ बोलीवर | 3-5.5 USD | औसतन 3.27-5.43 USD/kg |
| 1 किलो चिकन | 80,000-1,20,000 बोलीवर | 2-4 USD | सबसे सस्ता मीट विकल्प |
| 1 किलो चावल | 40,000-60,000 बोलीवर | 1-1.5 USD | आयातित होने से महंगा |
| 1 दर्जन अंडे | 30,000-50,000 बोलीवर | 0.8-1.5 USD | – |
(नोट: कीमतें शहरों (काराकास, वलेंसिया) में अलग-अलग हो सकती हैं। डॉलर में कीमतें स्थिर हैं क्योंकि ज्यादातर दुकानें अब डॉलर में ही बिक्री करती हैं।)
क्यों इतनी महंगाई?
- हाइपरइन्फ्लेशन का साया: 2025 में इन्फ्लेशन 150-500% तक पहुंचा, 2026 में भी जारी। बोलीवर की वैल्यू 2025 से 467% तक गिर चुकी है।
- डॉलराइजेशन: देश में 70-80% लेन-देन डॉलर में होते हैं। गरीब लोग जो बोलीवर में कमाते हैं, वे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
- प्रतिबंध और तेल संकट: अमेरिकी प्रतिबंधों से तेल निर्यात प्रभावित, विदेशी मुद्रा की कमी से आयात महंगा।
- आर्थिक दोहरी व्यवस्था: अमीर/रिमिटेंस पाने वाले डॉलर में खरीदते हैं, जबकि ज्यादातर आबादी बोलीवर में फंसी है।
आम लोगों की हालत
- कई परिवार दिन-ब-दिन भोजन जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
- सूप किचन और सोसायटी में लंबी कतारें लगी रहती हैं।
- 2025-26 में खाद्य असुरक्षा बढ़ी है; लाखों लोग पोषण की कमी से जूझ रहे हैं।
- हाल के घटनाक्रम (जैसे राजनीतिक अस्थिरता) से स्थिति और बिगड़ने का खतरा।
वेनेजुएला में यह स्थिति पिछले 10 वर्षों की सबसे बड़ी आर्थिक तबाही का नतीजा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना बड़े सुधारों के स्थिति सुधरने में सालों लगेंगे। लोग अब डॉलर में ही सोचते हैं, क्योंकि बोलीवर में कमाई का कोई मतलब नहीं रह गया।


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